मयूरभंज आश्रम स्कूल में छात्रा की मौत: NCST ने ओडिशा सरकार से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

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मयूरभंज आश्रम स्कूल में छात्रा की मौत: NCST ने ओडिशा सरकार से 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

सारांश

मयूरभंज के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में 12 अप्रैल को सामूहिक फूड पॉइज़निंग के बाद 5वीं कक्षा की आदिवासी छात्रा रूपाली बेसरा की मौत ने आदिवासी स्कूलों की भोजन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। NCST और NHRC दोनों ने ओडिशा सरकार से रिपोर्ट मांगी है — अब जवाबदेही की असली परीक्षा शुरू होती है।

Key Takeaways

  • 12 अप्रैल को मयूरभंज के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में खाना खाने के बाद सैकड़ों छात्र बीमार पड़े।
  • 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा की 14 अप्रैल को पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज के ICU में इलाज के दौरान मौत हो गई।
  • NCST ने संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत जांच शुरू करते हुए 7 दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी।
  • ओडिशा सरकार ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित किया और मृत छात्रा के परिवार को ₹7 लाख की सहायता की घोषणा की।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी स्वतः संज्ञान लेकर रिपोर्ट मांगी है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में सामूहिक फूड पॉइज़निंग और 5वीं कक्षा की आदिवासी छात्रा रूपाली बेसरा की मौत के मामले में ओडिशा सरकार को कड़ा नोटिस जारी किया है। 27 अप्रैल को जारी इस नोटिस में सात दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। यह घटना 12 अप्रैल को स्कूल में परोसा गया खाना खाने के बाद सैकड़ों छात्रों के बीमार पड़ने से शुरू हुई थी।

घटनाक्रम: 12 अप्रैल से 14 अप्रैल तक

12 अप्रैल को ओडिशा के मयूरभंज जिले के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में स्कूल का खाना खाने के बाद सैकड़ों छात्र अचानक बीमार पड़ गए। गंभीर रूप से बीमार 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा को बारीपदा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती कराया गया। 14 अप्रैल को इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई। इस दुखद घटना ने आदिवासी आश्रम स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

NCST का नोटिस और जांच का आदेश

15 अप्रैल को बीजू जनता दल (BJD) के नेता प्रियब्रत माझी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए NCST ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस मामले की जांच करने का निर्णय लिया। आयोग ने अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के आयुक्त-सह-सचिव, मयूरभंज के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट नहीं मिली तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है।

ओडिशा सरकार की प्रतिक्रिया

घटना के बाद ओडिशा सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया और मृत छात्रा के परिवार को ₹7 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मामले की जांच राजस्व संभागीय आयुक्त स्तर पर की जा रही है। इसके अलावा, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी है।

विपक्ष के आरोप और व्यापक चिंताएँ

विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने आरोप लगाया कि सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को तत्काल जवाब देने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ओडिशा के आदिवासी आश्रम स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हों — आलोचकों का कहना है कि इन स्कूलों में निगरानी तंत्र की गंभीर कमी है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब आदिवासी बच्चों के कल्याण और उनके शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।

आगे क्या होगा

NCST और NHRC दोनों के नोटिस के बाद अब ओडिशा सरकार पर जवाब देने का दोहरा दबाव है। आयोग के हस्तक्षेप से जांच में तेजी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित होने से आदिवासी छात्रों के लिए संचालित आश्रम स्कूलों में भोजन सुरक्षा के मानकों को लागू करने की दिशा में एक मिसाल कायम हो सकती है।

Point of View

न कि संरचनात्मक सुधार। असली सवाल यह है कि NCST और NHRC के नोटिस के बाद क्या सिस्टम में जवाबदेही का कोई स्थायी ढाँचा बनेगा — या यह भी पिछली ऐसी घटनाओं की तरह फाइलों में दब जाएगा। आदिवासी बच्चों की सुरक्षा केवल मुआवज़े से नहीं, बल्कि नियमित और स्वतंत्र खाद्य सुरक्षा ऑडिट से सुनिश्चित होती है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

मयूरभंज के काकाबन्धा आश्रम स्कूल में क्या हुआ था?
12 अप्रैल को स्कूल में बना खाना खाने के बाद सैकड़ों आदिवासी छात्र बीमार पड़ गए। 5वीं कक्षा की छात्रा रूपाली बेसरा को ICU में भर्ती कराया गया, जहाँ 14 अप्रैल को उसकी मौत हो गई।
NCST ने ओडिशा सरकार को क्यों नोटिस दिया?
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338A के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए BJD नेता प्रियब्रत माझी की याचिका पर संज्ञान लिया और मयूरभंज कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा विभागीय आयुक्त को 7 दिनों में ATR जमा करने का निर्देश दिया।
ओडिशा सरकार ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
सरकार ने स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित किया, मृत छात्रा के परिवार को ₹7 लाख की आर्थिक सहायता दी और राजस्व संभागीय आयुक्त स्तर पर जांच शुरू की।
NHRC ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए ओडिशा सरकार से रिपोर्ट मांगी है, जिससे सरकार पर जवाबदेही का दोहरा दबाव है।
इस घटना का आदिवासी आश्रम स्कूलों पर क्या असर पड़ेगा?
इस घटना ने आदिवासी आश्रम स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि NCST के हस्तक्षेप से इन स्कूलों में खाद्य सुरक्षा ऑडिट को अनिवार्य बनाने की दिशा में दबाव बढ़ेगा।
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