30 अगस्त 2026
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किश्तवाड़ नाबालिग आदिवासी छात्रा दुष्कर्म-हत्या: राजौरी में कैंडल मार्च, एक हफ्ते में न्याय की माँग

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किश्तवाड़ नाबालिग आदिवासी छात्रा दुष्कर्म-हत्या: राजौरी में कैंडल मार्च, एक हफ्ते में न्याय की माँग

सारांश

किश्तवाड़ में एक अध्यापक द्वारा नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसकी मौत के आठ दिन बाद राजौरी की सड़कों पर मोमबत्तियाँ जलीं। प्रदर्शनकारियों की माँग है — एक हफ्ते में इंसाफ, और क्राइम ब्रांच से निष्पक्ष जाँच।

मुख्य बातें

किश्तवाड़ में नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और मौत के मामले में 30 अगस्त 2026 को राजौरी में कैंडल मार्च निकाली गई।
घटना के आठ दिन बाद भी आरोपी अध्यापक के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई न होने पर प्रदर्शनकारियों में आक्रोश।
प्रदर्शनकारियों ने एक सप्ताह के भीतर न्याय और पारदर्शी जाँच की माँग की।
मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
एडवोकेट इबरार चौधरी सहित नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने संविधानसम्मत त्वरित न्याय की अपील की।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उसकी मौत के मामले के विरोध में 30 अगस्त 2026 को राजौरी में युवाओं ने कैंडल मार्च निकाली। प्रदर्शनकारियों ने पारदर्शी जाँच, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई और एक सप्ताह के भीतर न्याय सुनिश्चित करने की माँग की। मामले की जाँच अब क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।

मुख्य घटनाक्रम

घटना के आठ दिन बाद राजौरी के युवाओं ने सड़कों पर उतरकर मोमबत्तियाँ थामीं और न्याय की गुहार लगाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक अध्यापक द्वारा छात्रा के साथ यह जघन्य कृत्य किया गया। आरोपी के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने पर आक्रोश व्याप्त है।

प्रदर्शनकारियों की आवाज़

कैंडल मार्च में शामिल मेहर हसीन ने कहा, 'किश्तवाड़ में दरिंदगी का मामला सामने आया है, जहाँ एक अध्यापक की ओर से छात्रा के साथ ऐसी गंदी हरकत की गई, जिसे हम बोल भी नहीं पाते। हमने आज इंसाफ के लिए मार्च निकाली है।' उन्होंने आगे कहा कि यदि घटना के उसी दिन आरोपी को दंडित किया जाता, तो यह मार्च निकालने की नौबत नहीं आती।

मेहर हसीन ने लोगों से अपील की कि वे अपनी आवाज़ स्वयं उठाएँ और पीड़ितों के पक्ष में खड़े हों। उन्होंने कहा, 'अगर क्राइम ब्रांच जम्मू तक यह बात पहुँची है, तो एक महिला होने के नाते मुझे उम्मीद है कि इस मामले को जल्द से जल्द हल किया जाएगा।' उन्होंने एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई की माँग दोहराई।

राजौरी निवासी बिलाल रशीद ने कहा कि मार्च का उद्देश्य निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करना है और जो भी आरोपी पाए जाएँ, उन्हें कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।

कानूनी और नागरिक समाज की प्रतिक्रिया

एडवोकेट इबरार चौधरी ने खेद जताते हुए कहा, 'हम शर्मिंदा हैं कि घटना के आठ दिन बाद हमें कैंडल मार्च निकालनी पड़ी। हमें उम्मीद थी कि हमारा संविधान जिंदा है और आरोपी को तत्काल दंड मिलेगा।' उन्होंने बताया कि अब क्राइम ब्रांच द्वारा जाँच किए जाने की सूचना मिली है और उन्हें आशा है कि यह जाँच निष्पक्ष होगी।

आम जनता पर असर

यह घटना जम्मू-कश्मीर में आदिवासी समुदाय की बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न करती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय को लेकर सामाजिक बहस पहले से ही तेज़ है। स्थानीय लोगों का मानना है कि शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के लिए तंत्र को और मज़बूत करने की ज़रूरत है।

क्या होगा आगे

क्राइम ब्रांच की जाँच के नतीजे इस मामले की दिशा तय करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो विरोध और तेज़ होगा। समाज के विभिन्न वर्गों की नज़रें अब जाँच एजेंसी की कार्यवाही पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि जाँच समयबद्ध हो और परिणाम पारदर्शी। बिना जवाबदेही के सुधार के, ऐसी मार्चें महज़ रस्म बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किश्तवाड़ नाबालिग आदिवासी छात्रा दुष्कर्म मामला क्या है?
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में एक अध्यापक द्वारा नाबालिग आदिवासी छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म किया गया और बाद में उसकी मौत हो गई। यह मामला सामने आने के आठ दिन बाद भी त्वरित कार्रवाई न होने पर राजौरी में कैंडल मार्च निकाली गई।
राजौरी कैंडल मार्च में क्या माँगें रखी गईं?
प्रदर्शनकारियों ने एक सप्ताह के भीतर न्याय, मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच, तथा दोषी पाए जाने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की माँग की।
किश्तवाड़ मामले की जाँच कौन कर रहा है?
घटना के आठ दिन बाद यह जानकारी सामने आई कि इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच को सौंपी जाएगी। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि क्राइम ब्रांच निष्पक्ष तरीके से जाँच करेगी।
इस मामले में आरोपी कौन है?
प्रदर्शनकारियों के बयानों के अनुसार, एक अध्यापक पर नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का आरोप है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी की विस्तृत जानकारी अधिकारियों की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस घटना का आदिवासी समुदाय पर क्या असर पड़ा है?
यह घटना जम्मू-कश्मीर के आदिवासी समुदाय में गहरे आक्रोश और असुरक्षा की भावना उत्पन्न करती है। नागरिक समाज का कहना है कि दूरदराज़ के क्षेत्रों में आदिवासी बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण संस्थानों में निगरानी तंत्र को और मज़बूत किया जाना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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