30 अगस्त 2026
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प्रयागराज में गंगा-यमुना उफान पर: लेटे हनुमान जी का हुआ स्नान, वाराणसी के सभी 84 घाट डूबे

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प्रयागराज में गंगा-यमुना उफान पर: लेटे हनुमान जी का हुआ स्नान, वाराणसी के सभी 84 घाट डूबे

सारांश

प्रयागराज में गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने से लेटे हनुमान जी तक पानी पहुँचा और भव्य आरती के साथ 'गंगा स्नान' हुआ। वाराणसी के सभी 84 घाट डूबे, जलस्तर 68.94 मीटर पर; भागलपुर में भी शहरी इलाके जलमग्न। तीनों शहरों में प्रशासन अलर्ट पर है।

मुख्य बातें

प्रयागराज में 30 अगस्त को गंगा-यमुना के उफान से दशाश्वमेध घाट सहित कई प्रमुख घाट जलमग्न हुए।
लेटे हनुमान जी (बड़े हनुमान मंदिर) तक गंगा का पानी पहुँचा, भव्य आरती के साथ 'स्नान' संपन्न।
वाराणसी में गंगा 68.94 मीटर पर, प्रति घंटे 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही; सभी 84 घाट डूबे।
भागलपुर में गंगा शहरी इलाकों तक पहुँची, मंदिर परिसर जलमग्न; एडीएम कुंदन कुमार ने जहाज़ तैनाती की जानकारी दी।
दारागंज-नागवासुकी क्षेत्र में यातायात बाधित, निवासी नाव से आवाजाही कर रहे हैं।
दोनों नदियाँ अभी खतरे के निशान से नीचे, लेकिन प्रशासन पूरी तरह सतर्क।

प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में 30 अगस्त को लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे दशाश्वमेध घाट सहित संगम क्षेत्र के कई प्रमुख घाट जलमग्न हो गए। रविवार को जलस्तर इतना बढ़ा कि बड़े हनुमान जी (लेटे हनुमान मंदिर) तक गंगा का पानी पहुँच गया और मान्यता के अनुसार माँ गंगा ने उन्हें स्नान कराया — इस अवसर पर भव्य आरती भी संपन्न हुई। फिलहाल दोनों नदियाँ खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन सतर्क है।

मुख्य घटनाक्रम

दारागंज-नागवासुकी इलाके में सड़कों पर पानी भर जाने से यातायात बाधित हो गया है। स्थानीय निवासी संदीप ने बताया, 'पानी काफी तेज़ी से बढ़ रहा है। लोग अपना सामान हटा रहे हैं। एक-दो दिन में पानी काफी तेज़ी से बढ़ा है। अभी सड़क पर पानी है, घरों में घुसने की आशंका बढ़ गई है। हम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।'

एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि माघ मेले के दौरान बनाई गई रिंग रोड पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है और सब्जी मंडी खिसककर दारागंज थाने तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा, 'जो मकान बने हैं, फर्स्ट फ्लोर और सेकेंड फ्लोर पानी में डूब जाते हैं। आवागमन के लिए लोग नाव का इस्तेमाल करते हैं। प्रशासन की ओर से भी पूरी तरह सहयोग किया जाता है।'

वाराणसी की स्थिति

वाराणसी में गंगा का जलस्तर प्रति घंटे 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रहा है और 30 अगस्त तक यह 68.94 मीटर तक पहुँच चुका है। यहाँ खतरे का निशान 71.26 मीटर है, यानी जलस्तर अभी उससे लगभग 2.32 मीटर नीचे है। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं, जिसके चलते अधिकारियों ने बाढ़ निगरानी और तैयारी तेज़ कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीज़न अभी अपने चरम पर है।

भागलपुर में बाढ़ का असर

बिहार के भागलपुर जिले में भी गंगा का पानी शहरी इलाकों तक पहुँच गया है और मंदिर परिसर जलमग्न हो गया है। भागलपुर आपदा प्रबंधन के एडीएम कुंदन कुमार ने बताया कि अगले दिन से जहाज़ का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीच में जमी गाद को लेकर भी बातचीत जारी है और सभी इंजीनियर व प्रशासनिक अधिकारी कैंप कर रहे हैं।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि प्रयागराज में हर वर्ष मानसून के दौरान गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ता है और निचले इलाकों में रहने वाले हज़ारों परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। इस बार भी दारागंज और नागवासुकी क्षेत्र के निवासी नाव के सहारे आवाजाही कर रहे हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव दल तैनात किए हैं।

क्या होगा आगे

यदि अगले कुछ दिनों में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा जारी रही, तो वाराणसी में जलस्तर के खतरे के निशान के करीब पहुँचने की आशंका है। प्रयागराज और भागलपुर में प्रशासनिक निगरानी जारी है और स्थिति पर नज़र रखी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की वास्तविकता हर साल दोहराई जाने वाली वही त्रासदी है — निचले इलाकों के हज़ारों परिवार बेघर, सड़कें जलमग्न और प्रशासन 'कैंप' मोड में। वाराणसी में 84 घाटों का एक साथ डूबना और भागलपुर में शहरी क्षेत्रों तक पानी का पहुँचना यह दर्शाता है कि गंगा बेसिन में बाढ़ प्रबंधन अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, न कि पूर्वानुमान-आधारित। हर साल माघ मेले की रिंग रोड डूबती है, हर साल नाव चलती है — फिर भी स्थायी समाधान की दिशा में ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रयागराज में लेटे हनुमान जी का गंगा स्नान क्या है?
जब गंगा का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि पानी बड़े हनुमान जी (लेटे हनुमान मंदिर) तक पहुँच जाता है, तो इसे धार्मिक मान्यता के अनुसार 'माँ गंगा द्वारा हनुमान जी का स्नान' कहा जाता है। 30 अगस्त को यह घटना हुई और इस अवसर पर भव्य आरती का आयोजन किया गया।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर कितना है और खतरा कब है?
30 अगस्त तक वाराणसी में गंगा 68.94 मीटर पर है और प्रति घंटे 4 सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही है। खतरे का निशान 71.26 मीटर है, यानी अभी लगभग 2.32 मीटर की दूरी है, लेकिन लगातार बारिश जारी रही तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
प्रयागराज में बाढ़ से कौन-से इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
दारागंज और नागवासुकी इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहाँ सड़कों पर पानी भर गया है और यातायात बाधित है। माघ मेले की रिंग रोड भी जलमग्न है और निवासी नाव से आवाजाही कर रहे हैं।
भागलपुर में बाढ़ की स्थिति क्या है और प्रशासन क्या कर रहा है?
बिहार के भागलपुर में गंगा का पानी शहरी इलाकों और मंदिर परिसर तक पहुँच गया है। एडीएम कुंदन कुमार के अनुसार जहाज़ की तैनाती की जाएगी, सभी इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी कैंप कर रहे हैं और स्थिति पर निरंतर नज़र रखी जा रही है।
क्या गंगा-यमुना अभी खतरे के निशान से ऊपर हैं?
नहीं, 30 अगस्त तक प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं। हालाँकि वाराणसी में जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है और प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
राष्ट्र प्रेस
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