ताशकंद में PM मोदी ने देखा योग सत्र, उज्बेकिस्तान के 52 साधकों ने पेश की अनूठी प्रस्तुति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त 2026 को ताशकंद में उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों की विशेष प्रस्तुति देखी, जो भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों की एक जीवंत मिसाल बनी। इस अवसर पर मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का आभार जताया और कहा कि उन्होंने अपने देश को योग से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्य घटनाक्रम
ताशकंद में आयोजित इस विशेष योग सत्र में उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन के छह विशिष्ट सदस्य भी शामिल रहे, जिन्होंने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया था। इन छह साधकों के नाम हैं — रखमानोव कामोल एर्किनोविच, रखमानोव अलीखोन कामोलादिनोविच, अखुनोवा दिनारा एर्किनोव्ना, जुमानोवा आलिया अबुबाकिर किजी, अंसातबायेवा आयसुलु अरिसलान किजी और शकिरोव रेडजेप दिमित्रियेविच।
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्र की क्लिप एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा करते हुए लिखा, 'आप लोगों ने बहुत बढ़िया योग करके दिखाया है और इसमें सभी उम्र के लोग शामिल हुए। मैं अपने मित्र, राष्ट्रपति का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ दिया है।'
विश्व योगासन चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान का प्रदर्शन
4 से 8 जून 2026 के बीच अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान की पूरी टीम ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 25 पदक जीते। इनमें से 18 पदक उन्हीं छह साधकों ने हासिल किए, जिन्होंने ताशकंद के इस सत्र में प्रदर्शन किया — 1 स्वर्ण, 14 रजत और 3 कांस्य पदक। यह उपलब्धि उज्बेकिस्तान में योग की गहरी होती जड़ों का प्रमाण है।
गौरतलब है कि यह चैंपियनशिप अपनी तरह की पहली वैश्विक प्रतियोगिता थी, जिसने योगासन को एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच दिया। विभिन्न देशों की भागीदारी ने यह स्पष्ट किया कि योग अब केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि एक वैश्विक खेल विधा बन चुका है।
भारत-उज्बेकिस्तान सांस्कृतिक संबंध
यह ऐसे समय में आया है जब भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध कूटनीतिक और सांस्कृतिक — दोनों स्तरों पर मज़बूत हो रहे हैं। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के कार्यकाल में उज्बेकिस्तान में योग को संस्थागत समर्थन मिला है, और योग फेडरेशन की सक्रियता इसी का परिणाम है। 52 साधकों की विविध आयु वर्ग की भागीदारी यह दर्शाती है कि योग वहाँ जन-जन तक पहुँच चुका है।
यह Nवीं ऐसी घटना है जहाँ प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा के दौरान योग एक सॉफ्ट-पावर कूटनीति के उपकरण के रूप में उभरा है — चाहे वह संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल हो या द्विपक्षीय मंचों पर योग प्रदर्शन।
आगे की राह
अहमदाबाद में मिली सफलता और ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में हुए इस सत्र के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देशों के बीच योग और खेल के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग और गहरा होगा। उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन की अगली विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।