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मोहन भागवत बोले: शिक्षा का असली मकसद मनुष्य निर्माण, करियर नहीं; युवाओं से प्रतिभा पलायन पर की अपील

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मोहन भागवत बोले: शिक्षा का असली मकसद मनुष्य निर्माण, करियर नहीं; युवाओं से प्रतिभा पलायन पर की अपील

सारांश

RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने नई दिल्ली में छात्रों से सीधा संवाद किया और कहा कि शिक्षा का असली मकसद इंसान बनाना है, डिग्री नहीं। प्रतिभा पलायन रोकने की अपील के साथ उन्होंने भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

मोहन भागवत ने 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आईआईएलएम विश्वविद्यालय व बनयान ट्री विद्यालय के संयुक्त संवाद कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया।
भागवत ने कहा — 'शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य निर्माण है, केवल करियर निर्माण नहीं।' नई पीढ़ी को पुरानी पीढ़ी से अधिक ईमानदार और साहसी बताया।
प्रतिभा पलायन पर युवाओं को देश के लिए योगदान देने की अपील की।
रामकृष्ण परमहंस और नीब करौरी बाबा के उदाहरण देकर मानवीय गुणों की शिक्षा की आवश्यकता बताई।
भारत का लक्ष्य विश्वगुरु बनना है, न केवल सैन्य या आर्थिक महाशक्ति।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आईआईएलएम विश्वविद्यालय और बनयान ट्री विद्यालय के संयुक्त आयोजन में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल करियर बनाना नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान गढ़ना है। इस संवाद कार्यक्रम में कक्षा 10 से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया और अपने प्रश्न सीधे भागवत के सामने रखे।

शिक्षा और मनुष्यता पर मुख्य संदेश

भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'शिक्षा का उद्देश्य केवल करियर निर्माण नहीं है, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य निर्माण है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि शिक्षा ही वह कड़ी है जो मनुष्य को पशु से अलग करती है, और मनुष्य निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। यह विचार भारतीय शिक्षा दर्शन की परंपरागत अवधारणा से जुड़ता है, जहाँ ज्ञान को केवल उपजीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्म-विकास का मार्ग माना गया है।

नई पीढ़ी पर भरोसा

भागवत ने युवाओं की तारीफ करते हुए अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से अधिक ईमानदार है और उनमें प्राकृतिक रूप से अधिक साहस है। इस टिप्पणी को उपस्थित छात्रों ने उत्साह के साथ सुना।

प्रतिभा पलायन पर आह्वान

विदेश पलायन यानी 'ब्रेन ड्रेन' के प्रश्न पर भागवत ने युवाओं को देशसेवा की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा, 'विदेशों में आपको सबकुछ मिल जाएगा, लेकिन आपकी पहचान आपके देश से है।' उन्होंने जोड़ा कि भारत के अन्न-जल से हमें अपनी देह मिली है, इसलिए जितना अपने लिए आवश्यक हो उतना रखें और शेष समाज व देश के लिए अर्पित करें। गौरतलब है कि प्रतिभा पलायन भारत की शिक्षा नीति में दशकों से बहस का विषय रहा है।

संतों और आधुनिक शिक्षा का संतुलन

भागवत ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में आई फिल्म 'हनुमान अंश' में संत नीब करौरी बाबा को दर्शाया गया है, जिनसे स्टीव जॉब्स भी मिलने आए थे। उन्होंने स्मरण दिलाया कि स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं थी, फिर भी वे समाज के महान पथप्रदर्शक बने — क्योंकि उनकी मनुष्यता का स्तर असाधारण था। भागवत के अनुसार, आज आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ मानवीय गुणों को विकसित करने वाली शिक्षा की भी उतनी ही आवश्यकता है।

भारत को विश्वगुरु बनाने का संकल्प

कार्यक्रम के समापन में भागवत ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल सैन्य या आर्थिक महाशक्ति बनना नहीं है। उन्होंने कहा, 'भारत को विश्वगुरु के सिंहासन पर पुनर्स्थापित करना है' और 'मनुष्यता का ज्ञान' ही भारत की सच्ची पहचान और ताकत है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देशभर में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन को लेकर व्यापक बहस जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उद्यमिता और मेरिट को पुरस्कृत करने वाला पारिस्थितिकी तंत्र नहीं बनता। 'विश्वगुरु' की अवधारणा प्रेरक है, परंतु इसे साकार करने के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा और संस्थागत सुधार दोनों की एक साथ ज़रूरत है — केवल एक को दूसरे का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने शिक्षा के बारे में क्या कहा?
भागवत ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य निर्माण है, केवल करियर बनाना नहीं। उनके अनुसार शिक्षा ही मनुष्य को पशु से अलग करती है और मनुष्य निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है।
भागवत ने प्रतिभा पलायन पर क्या कहा?
उन्होंने युवाओं से अपील की कि विदेश में सब कुछ मिल सकता है, लेकिन पहचान देश से है। उन्होंने कहा कि भारत के अन्न-जल से जो देह मिली है, उसके ऋण को देश और समाज की सेवा से चुकाना चाहिए।
यह संवाद कार्यक्रम कहाँ और किनके लिए आयोजित था?
यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आईआईएलएम विश्वविद्यालय और बनयान ट्री विद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में हुआ। इसमें कक्षा 10 से स्नातकोत्तर स्तर तक के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
भागवत ने किन महापुरुषों का उदाहरण दिया?
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस और संत नीब करौरी बाबा का उदाहरण दिया, जिनकी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा नहीं थी, फिर भी वे समाज के महान मार्गदर्शक बने। उन्होंने यह भी बताया कि स्टीव जॉब्स नीब करौरी बाबा से मिलने आए थे।
भागवत के अनुसार भारत का वैश्विक लक्ष्य क्या है?
भागवत ने कहा कि भारत को केवल सैन्य या आर्थिक महाशक्ति नहीं बनना है, बल्कि विश्वगुरु के सिंहासन पर पुनर्स्थापित होना है। उनके अनुसार 'मनुष्यता का ज्ञान' ही भारत की असली पहचान और वैश्विक योगदान है।
राष्ट्र प्रेस
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