30 अगस्त 2026
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मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में आह्वान: पर्यावरण रक्षा इंसानों की सर्वोच्च जिम्मेदारी

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मोहन भागवत का न्यूयॉर्क में आह्वान: पर्यावरण रक्षा इंसानों की सर्वोच्च जिम्मेदारी

सारांश

न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने पर्यावरण संकट को मानवीय जिम्मेदारी का प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य ने 8,000 पौधों और 5,000 जानवरों की प्रजातियाँ नष्ट कीं — और अब उसकी बुद्धि का दायित्व है कि वह सृष्टि को बचाए, न कि उस पर राज करे।

मुख्य बातें

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में सार्वभौमिक एकता समारोह को संबोधित किया।
भागवत ने कहा कि मनुष्य ने 8,000 पौधों की प्रजातियों और लगभग 5,000 जानवरों की प्रजातियों को नष्ट किया है।
उन्होंने विकास और पर्यावरण को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बताया।
भारतीय सभ्यता के त्याग और संयम के सिद्धांतों को पर्यावरण संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।
RSS के 'पंच परिवर्तन' कार्यक्रम को मानवता, पर्यावरण और सृष्टि की रक्षा का माध्यम बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित सार्वभौमिक एकता समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण और इस धरती को बचाए रखना मनुष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विकास और पर्यावरण संरक्षण को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बताया और एक ऐसे विकास मॉडल की पैरवी की जो प्रकृति को क्षति पहुँचाए बिना मानव समृद्धि सुनिश्चित करे।

विकास और प्रकृति का द्वंद्व

भागवत ने कहा कि आज दुनिया के सामने एक बड़ा प्रश्न खड़ा है — विकास करें तो पर्यावरण को नुकसान होता है, और पर्यावरण बचाएँ तो विकास रुकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, 'दुनिया कई समस्याओं का सामना कर रही है। विकास से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। पर्यावरण बचाने का मतलब विकास रोकना माना जाता है। तो इसका क्या रास्ता है?' उन्होंने इस प्रश्न का उत्तर भारतीय सभ्यतागत परंपरा में खोजने की बात कही और कहा कि पूर्वजों ने त्याग व संयम के माध्यम से यह रास्ता पहले ही दिखाया है।

मानव बुद्धि — अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व

संघ प्रमुख ने तर्क दिया कि मनुष्य को जो विशेष बौद्धिक क्षमता प्राप्त है, वह उसे सृष्टि का स्वामी नहीं बनाती, बल्कि उस पर अन्य जीवों की रक्षा का दायित्व डालती है। उन्होंने कहा, 'मनुष्य दुनिया के लिए जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्हें सोचने-समझने की खास काबिलियत मिली है। उन्हें सही और गलत की समझ भी दी गई है।' भागवत ने जोर देकर कहा कि इंसानी समझ का उपयोग प्राकृतिक संसार पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन के अन्य रूपों की रक्षा के लिए होना चाहिए।

मानव विस्तार की पर्यावरणीय कीमत

खाद्य श्रृंखला में मनुष्यों के उत्थान का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए भागवत ने कहा कि यह प्रगति भारी पर्यावरणीय कीमत पर हासिल हुई है। उन्होंने कहा, 'इस खाद्य श्रृंखला में मनुष्य का आगमन बहुत देर से हुआ और वह सबसे निचले पायदान पर था, लेकिन 3,000 वर्षों के भीतर वह मध्य में आ गया और 7,000 वर्षों में वह शीर्ष पर पहुंच गया और 8,000 पौधों की प्रजातियों और लगभग 5,000 जानवरों की प्रजातियों को नष्ट कर दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि जानवर भाग सकते थे इसलिए बच गए, लेकिन पौधे नहीं भाग सके — और यह इंसानों के जीने का तरीका नहीं है।

सक्रिय सहअस्तित्व का संदेश

भागवत ने उपस्थित श्रोताओं से आग्रह किया कि वे केवल 'दूसरों को जीने देने' की निष्क्रिय सोच से आगे बढ़ें और सक्रिय रूप से दूसरों के जीवन को संभव बनाने में भागीदार बनें। उनके शब्दों में, 'मैं दूसरों को सहारा दूं। मैं सिर्फ दूसरों को जीने न दूं, बल्कि खुद भी जीऊं और दूसरों को भी जीने में मदद करूं। यही संदेश है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बड़े सामाजिक बदलाव की प्रतीक्षा करने की बजाय रोजमर्रा के व्यवहार में छोटे-छोटे बदलावों से ही परिवर्तन की शुरुआत होती है।

RSS का 'पंच परिवर्तन' और वैश्विक संदेश

भागवत ने RSS के 'पंच परिवर्तन' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके सिद्धांतों को पहले व्यक्ति को अपनाना होगा, तत्पश्चात समाज में प्रसारित करना होगा। उन्होंने कहा, 'ये सिद्धांत मानवता को बचाए रखेंगे। ये पर्यावरण को बचाए रखेंगे। ये सृष्टि और अस्तित्व को बचाए रखेंगे। यही लक्ष्य है।' न्यूयॉर्क के इस वैश्विक मंच पर भागवत का यह संबोधन भारत की सभ्यतागत सोच को पर्यावरणीय संकट के समाधान के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास था — और आने वाले समय में यह विमर्श अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और गहरा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित सभ्यतागत कूटनीति भी है — जो भारतीय दर्शन को पश्चिमी संकट के उत्तर के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती है। हालाँकि, आलोचक यह पूछ सकते हैं कि जब देश में औद्योगिक प्रदूषण, वन कटाई और नदियों के प्रदूषण पर संघ-समर्थित सरकारों का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है, तो यह वैश्विक नैतिक नेतृत्व कितना विश्वसनीय है। प्रजातियों के विनाश के जो आँकड़े उन्होंने उद्धृत किए, वे वैज्ञानिक रूप से गंभीर हैं और मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं। असली कसौटी यह होगी कि 'पंच परिवर्तन' जैसे कार्यक्रम नीतिगत दबाव में तब्दील होते हैं या केवल प्रेरक भाषणों तक सीमित रहते हैं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में क्या कहा?
RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने 30 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में कहा कि पर्यावरण और दुनिया को बचाए रखना मनुष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विकास और प्रकृति संरक्षण को एक-दूसरे का विरोधी मानने की सोच को गलत बताया और भारतीय सभ्यतागत दृष्टिकोण को समाधान के रूप में प्रस्तुत किया।
भागवत ने प्रजातियों के विनाश के बारे में क्या कहा?
भागवत ने कहा कि मनुष्य ने खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर पहुँचते-पहुँचते 8,000 पौधों की प्रजातियों और लगभग 5,000 जानवरों की प्रजातियों को नष्ट कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जानवर भाग सकने के कारण बच गए, लेकिन पौधे नहीं बच सके।
RSS का 'पंच परिवर्तन' कार्यक्रम क्या है?
भागवत के अनुसार 'पंच परिवर्तन' RSS का एक सिद्धांत-आधारित कार्यक्रम है जिसके मूल्यों को पहले व्यक्ति को अपनाना होता है और फिर समाज में फैलाना होता है। उन्होंने कहा कि ये सिद्धांत मानवता, पर्यावरण और समूची सृष्टि को बचाए रखने में सक्षम हैं।
सार्वभौमिक एकता समारोह कहाँ और कब हुआ?
यह समारोह 30 अगस्त को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर स्थित मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर RSS सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे।
भागवत के अनुसार पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन कैसे बनेगा?
भागवत का मानना है कि भारतीय पूर्वजों द्वारा दिखाया गया त्याग और संयम का मार्ग इस संतुलन की कुंजी है। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के व्यवहार में छोटे बदलाव और दूसरों के जीवन को सक्रिय रूप से सहारा देने की भावना से ही वास्तविक परिवर्तन आ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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