आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में 2,000 जेनजी छात्रों से किया सीधा संवाद
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 6 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) के विशेष कार्यक्रम में 'जेनजी' और 'जेन अल्फा' पीढ़ी के लगभग 2,000 छात्र-छात्राओं से सीधा संवाद किया। देशभर से आए युवा प्रतिनिधियों ने इस मंच को प्रेरणादायक और नेतृत्व-विकास का अनूठा अवसर बताया।
कार्यक्रम का स्वरूप और महत्व
आईआईएमयूएन का यह आयोजन मॉडल यूनाइटेड नेशंस (MUN) की परंपरा पर आधारित है, जिसमें छात्र वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। इस बार कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि मोहन भागवत ने मुख्य अतिथि के रूप में युवाओं से आमने-सामने संवाद किया — जो इस पीढ़ी के लिए एक असाधारण अनुभव रहा। गौरतलब है कि इतने बड़े स्तर पर और इतनी अधिक युवा भागीदारी वाला यह आयोजन अपनी तरह का विशिष्ट रहा।
छात्रों की प्रतिक्रियाएँ
कार्यक्रम में शामिल छात्रा आर्ना ने कहा कि वह पहले भी कई MUN सम्मेलनों में हिस्सा ले चुकी हैं, लेकिन इतने व्यापक स्तर के आयोजन में पहली बार शामिल हुईं। उन्होंने कहा, 'पहली बार मुझे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को व्यक्तिगत रूप से सुनने का अवसर मिला, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित थी।' आर्ना ने आईआईएमयूएन की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच ने युवाओं को देश के भविष्य पर अपने विचार रखने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है।
एक अन्य छात्रा तन्वी ने बताया कि उन्होंने पहले भागवत के कई भाषण सुने हैं, लेकिन आमने-सामने सुनने का यह पहला मौका था। उनके अनुसार, 'छात्रों से इस तरह का सीधा संवाद युवाओं और नेतृत्व के बीच बेहतर जुड़ाव स्थापित करता है और नया दृष्टिकोण देता है।'
चैंपियनशिप राउंड तक पहुँचने वाली प्रतिभागी का अनुभव
आईआईएमयूएन से लंबे समय से जुड़ी अन्विता शिवशंकर ने बताया कि चैंपियनशिप राउंड तक पहुँचना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र में पढ़ते ही कि भागवत मुख्य अतिथि होंगे, वह उत्साहित हो गई थीं। अन्विता ने यह भी कहा कि इस तरह के कार्यक्रम केवल भारत में नहीं, बल्कि दुनियाभर में आयोजित होने चाहिए, ताकि विभिन्न देशों के छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव और नेतृत्व क्षमता विकसित कर सकें।
युवाओं और नेतृत्व के बीच संवाद की बढ़ती ज़रूरत
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देश की युवा आबादी को नीति-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनाने की माँग तेज़ हो रही है। आईआईएमयूएन जैसे मंच इस खाई को पाटने का प्रयास करते हैं, जहाँ छात्र वरिष्ठ नेतृत्व से सीधे प्रश्न पूछ सकते हैं और अपने विचार साझा कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेनजी और जेन अल्फा पीढ़ी के साथ इस तरह का संवाद भविष्य की नागरिक भागीदारी की दिशा तय करने में सहायक होता है।