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मोहन भागवत का जेनजी संवाद: कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने बताया युवाओं के लिए प्रेरणादायी

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मोहन भागवत का जेनजी संवाद: कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने बताया युवाओं के लिए प्रेरणादायी

सारांश

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत का जेनजी छात्रों से संवाद राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। कांग्रेस इसे छवि-सुधार की कोशिश बता रही है, BAP पेपर लीक से जोड़ रही है, और BJP इसे राष्ट्र-निर्माण की दिशा में ज़रूरी कदम करार दे रही है — जबकि देश का युवा रोज़गार और शिक्षा के असली सवाल पूछ रहा है।

मुख्य बातें

RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने जेनजी और जेन अल्फा छात्रों के साथ संवाद किया, जिसने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया।
कांग्रेस नेता रजनी मोहंती ने आरोप लगाया कि यह पहल राजनीतिक रूप से प्रेरित है और केवल ABVP से जुड़े छात्रों तक सीमित रहेगी।
AICC के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने विश्वविद्यालयों में राजनीतिक नियुक्तियों पर सवाल उठाए।
BAP सांसद राजकुमार रोत ने पेपर लीक मामलों से RSS की इस पहल को जोड़ते हुए कहा कि कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने संवाद को प्रेरणादायी बताते हुए इसे PM मोदी की युवा-केंद्रित पहलों के अनुरूप कहा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा जेनजी और जेन अल्फा पीढ़ी के छात्रों के साथ किए गए संवाद ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने इस पहल के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

कांग्रेस की आपत्तियाँ

कांग्रेस नेता रजनी मोहंती ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की लगभग 45 प्रतिशत आबादी जेनजी की है और यह वर्ग देश का सबसे ऊर्जावान तथा भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने पूछा कि यदि RSS स्वयं को देश का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताता है, तो यह संवाद पहले क्यों नहीं हुआ। मोहंती ने आरोप लगाया कि यह पहल राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका उद्देश्य RSS तथा BJP की छवि को बेहतर बनाना है। उनका यह भी कहना था कि ऐसे संवाद केवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों तक सीमित रहेंगे और विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों को समान अवसर नहीं मिलेगा।

विश्वविद्यालयों पर उठे सवाल

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मोहन भागवत को सबसे पहले देश के शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में कुलपति, रजिस्ट्रार और डीन जैसे पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुँचाया है।

गौतम ने कहा कि यदि वास्तव में युवाओं के भविष्य की चिंता है, तो योग्य और सक्षम लोगों को विश्वविद्यालयों में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में दलीय राजनीति नहीं होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाना चाहिए।

BAP का रुख: कथनी और करनी में अंतर न हो

भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि RSS का इतिहास रहा है कि जब भी परिस्थितियाँ बदलती दिखती हैं, वह अपने रुख में परिवर्तन करता है। उन्होंने हाल के पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि उन मामलों में नागपुर और राजस्थान के सीकर से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे और की गई कार्रवाई केवल औपचारिक रही। रोत ने कहा कि आज का युवा जागरूक है और केवल बयानों से प्रभावित होने वाला नहीं है। यदि RSS वास्तव में आत्ममंथन कर रहा है और युवाओं के हित में बदलाव लाना चाहता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा — लेकिन कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।

भाजपा का समर्थन

BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने मोहन भागवत के इस संवाद का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं की दिशा ही देश की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक का संदेश पूरी तरह प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से छात्रों और जेनजी के साथ संवाद करते रहे हैं और परीक्षा सहित विभिन्न विषयों पर उनसे चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि RSS अपनी शाखाओं के माध्यम से बचपन से ही युवाओं में राष्ट्रभक्ति और 'नेशन फर्स्ट' की भावना विकसित करने का कार्य करता रहा है।

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में युवा रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक असंतोष बढ़ा है। गौरतलब है कि RSS की यह पहल एक ऐसे दौर में आई है जब सत्तारूढ़ गठबंधन को जेनजी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ बताती हैं कि इस संवाद को महज एक सामाजिक पहल के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत के रूप में भी पढ़ा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब पेपर लीक और रोज़गार के मुद्दों पर युवा असंतोष अपने चरम पर है। विपक्ष के सवाल सतही नहीं हैं: यदि संवाद वास्तव में समावेशी है, तो उसमें विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों की भागीदारी का ठोस प्रमाण होना चाहिए। दूसरी ओर, BJP का यह तर्क कि RSS दशकों से युवाओं से जुड़ा है, इस विशेष पहल की नवीनता पर ही सवाल खड़ा करता है। असली कसौटी यह होगी कि यह संवाद नीतिगत बदलाव में तब्दील होता है या केवल एक मीडिया क्षण बनकर रह जाता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत का जेनजी संवाद क्या है?
RSS सरसंघचालक मोहन भागवत ने जेनजी और जेन अल्फा पीढ़ी के छात्रों के साथ संवाद किया, जिसका उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक मूल्यों से जोड़ना बताया गया। इस पहल ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की हैं।
कांग्रेस ने इस पहल पर क्या आपत्ति जताई है?
कांग्रेस नेता रजनी मोहंती ने आरोप लगाया कि यह पहल राजनीतिक रूप से प्रेरित है और RSS व BJP की छवि सुधारने का प्रयास है। उनका कहना है कि ऐसे संवाद केवल ABVP से जुड़े छात्रों तक सीमित रहेंगे और विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों को समान अवसर नहीं मिलेगा।
BAP सांसद राजकुमार रोत ने क्या कहा?
BAP सांसद राजकुमार रोत ने इस पहल को हाल के पेपर लीक मामलों से जोड़ा और कहा कि RSS छवि सुधारने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज का युवा जागरूक है और केवल बयानों से प्रभावित नहीं होगा — कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
BJP ने इस संवाद का समर्थन क्यों किया?
BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा कि सरसंघचालक का संदेश प्रेरणादायी और अनुकरणीय है, और युवाओं की दिशा ही देश की दिशा तय करती है। उन्होंने इसे PM मोदी की छात्रों से संवाद की परंपरा के अनुरूप बताया।
इस विवाद का व्यापक राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पेपर लीक, रोज़गार और शिक्षा की गुणवत्ता पर युवा असंतोष बढ़ा है। AICC के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने विश्वविद्यालयों में राजनीतिक नियुक्तियों को भी इस बहस से जोड़ा है, जो इस संवाद को एक व्यापक शिक्षा-नीति विमर्श का हिस्सा बनाता है।
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