मोहन भागवत का जेनजी संवाद: कांग्रेस ने उठाए सवाल, भाजपा ने बताया युवाओं के लिए प्रेरणादायी
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा जेनजी और जेन अल्फा पीढ़ी के छात्रों के साथ किए गए संवाद ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने इस पहल के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
कांग्रेस की आपत्तियाँ
कांग्रेस नेता रजनी मोहंती ने इस पहल पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की लगभग 45 प्रतिशत आबादी जेनजी की है और यह वर्ग देश का सबसे ऊर्जावान तथा भविष्य का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने पूछा कि यदि RSS स्वयं को देश का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बताता है, तो यह संवाद पहले क्यों नहीं हुआ। मोहंती ने आरोप लगाया कि यह पहल राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसका उद्देश्य RSS तथा BJP की छवि को बेहतर बनाना है। उनका यह भी कहना था कि ऐसे संवाद केवल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों तक सीमित रहेंगे और विभिन्न विचारधाराओं के छात्रों को समान अवसर नहीं मिलेगा।
विश्वविद्यालयों पर उठे सवाल
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मोहन भागवत को सबसे पहले देश के शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में कुलपति, रजिस्ट्रार और डीन जैसे पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों को नुकसान पहुँचाया है।
गौतम ने कहा कि यदि वास्तव में युवाओं के भविष्य की चिंता है, तो योग्य और सक्षम लोगों को विश्वविद्यालयों में जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में दलीय राजनीति नहीं होनी चाहिए और विश्वविद्यालयों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखा जाना चाहिए।
BAP का रुख: कथनी और करनी में अंतर न हो
भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि RSS का इतिहास रहा है कि जब भी परिस्थितियाँ बदलती दिखती हैं, वह अपने रुख में परिवर्तन करता है। उन्होंने हाल के पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए कहा कि उन मामलों में नागपुर और राजस्थान के सीकर से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे और की गई कार्रवाई केवल औपचारिक रही। रोत ने कहा कि आज का युवा जागरूक है और केवल बयानों से प्रभावित होने वाला नहीं है। यदि RSS वास्तव में आत्ममंथन कर रहा है और युवाओं के हित में बदलाव लाना चाहता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा — लेकिन कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए।
भाजपा का समर्थन
BJP सांसद दामोदर अग्रवाल ने मोहन भागवत के इस संवाद का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं की दिशा ही देश की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि सरसंघचालक का संदेश पूरी तरह प्रेरणादायी और अनुकरणीय है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लंबे समय से छात्रों और जेनजी के साथ संवाद करते रहे हैं और परीक्षा सहित विभिन्न विषयों पर उनसे चर्चा करते हैं। उन्होंने कहा कि RSS अपनी शाखाओं के माध्यम से बचपन से ही युवाओं में राष्ट्रभक्ति और 'नेशन फर्स्ट' की भावना विकसित करने का कार्य करता रहा है।
आगे क्या
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में युवा रोजगार, शिक्षा की गुणवत्ता और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक असंतोष बढ़ा है। गौरतलब है कि RSS की यह पहल एक ऐसे दौर में आई है जब सत्तारूढ़ गठबंधन को जेनजी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ बताती हैं कि इस संवाद को महज एक सामाजिक पहल के रूप में नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत के रूप में भी पढ़ा जा रहा है।