आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का जेनजी से संवाद सराहनीय: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 6 अगस्त को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के जेनजी (Gen-Z) के साथ संवाद को एक स्वागतयोग्य और समयोचित पहल करार दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को सही दिशा में मार्गदर्शन देने के लिए इस प्रकार के संवाद आज की सबसे बड़ी ज़रूरत हैं। इसके साथ ही निरुपम ने सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले, कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों और राहुल गांधी की राजनीति पर भी बेबाकी से अपने विचार रखे।
भागवत-जेनजी संवाद पर निरुपम का समर्थन
निरुपम ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपनी स्थापना से ही व्यक्तित्व निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाला संगठन रहा है। उनके अनुसार, लगभग सौ वर्षों से संघ देशभर में लाखों शाखाओं के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव जागृत करता आया है। उन्होंने कहा, 'आज कुछ लोग युवाओं को भ्रमित कर उन्हें गलत दिशा में ले जाने और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे माहौल में मोहन भागवत का संवाद युवाओं को सकारात्मक सोच, राष्ट्रहित और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर प्रेरित करेगा।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि युवाओं की समस्याओं से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन राजनीतिक प्रभाव में आकर छात्रों को भटकने से बचाना भी उतना ही आवश्यक है।
शिवसेना सिंबल मामले में सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी सुनवाई पर निरुपम ने कहा कि उनकी पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि विधानसभा अध्यक्ष और चुनाव आयोग दोनों पहले ही तकनीकी और कानूनी आधार पर यह निर्णय दे चुके हैं कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही वास्तविक शिवसेना है और चुनाव चिह्न उसी के पास रहना चाहिए। निरुपम ने दावा किया कि बड़ी संख्या में शिवसेना के विधायक, सांसद और वरिष्ठ नेता उद्धव ठाकरे की कार्यशैली और विचारधारा से असहमति के कारण शिंदे के साथ आए थे। उन्हें विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला भी उनकी पार्टी के पक्ष में होगा।
कांग्रेस की 'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी पर तीखी आपत्ति
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए 'गूंगी गुड़िया' शब्द को लेकर उठे विवाद पर निरुपम ने कहा कि यह केवल किसी शब्द का मामला नहीं, बल्कि एक महिला जनप्रतिनिधि के सम्मान का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री होने के साथ-साथ एक सक्रिय सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक है कि उनके प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग किया जाए। निरुपम ने माँग की कि कांग्रेस इस टिप्पणी के लिए तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी माँगे।
राहुल गांधी पर सीधा हमला
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए निरुपम ने कहा कि महात्मा गांधी और राहुल गांधी की तुलना संभव नहीं है। उनके अनुसार, महात्मा गांधी सत्य और अहिंसा के पथ पर चलकर देश को स्वतंत्रता दिलाने वाले नेता थे, जबकि राहुल गांधी राजनीतिक लाभ के लिए हर मुद्दे का राजनीतिकरण करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर छात्रों के मुद्दे से शुरू हुआ आंदोलन बाद में राजनीतिक रंग देने की कोशिश का शिकार हो गया। निरुपम ने कहा कि यदि राहुल गांधी वास्तव में छात्रों के हितैषी हैं, तो उन्हें झारखंड के रांची जाकर उन छात्रों से मिलना चाहिए जो कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आलोचना की कि कांग्रेस शासित राज्यों के ऐसे मुद्दों पर राहुल गांधी प्रायः मौन रहते हैं, जबकि अन्य राज्यों के मामलों को राजनीतिक रूप से उठाते हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिवसेना का सिंबल विवाद सुप्रीम कोर्ट में निर्णायक चरण में है और महाराष्ट्र की राजनीति में विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। निरुपम के इन बयानों से स्पष्ट है कि एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश में है।