मीराबाई चानू: लकड़ियों के गठ्ठर से कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक, इतिहास रचने वाली पहली वेटलिफ्टर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता और इस प्रतियोगिता के इतिहास में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गईं। मणिपुर के एक साधारण परिवार से उठकर विश्व के शीर्ष पर पहुँचने की उनकी यात्रा संघर्ष, साहस और असाधारण आत्मबल की कहानी है।
बचपन: लकड़ियों के गठ्ठर और पहाड़ियों की चढ़ाई
मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के इंफाल के निकट नोंगपोक काकचिंग गाँव में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर थी, लेकिन बचपन से ही उनमें असाधारण शारीरिक क्षमता दिखती थी — वह लकड़ियों के भारी गठ्ठर उठाकर पहाड़ियों पर चढ़ जाया करती थीं। परिवार का खेल जगत से कोई सीधा नाता नहीं था, फिर भी माता-पिता ने बेटी की प्रतिभा को पहचाना और हर कदम पर उनका साथ दिया।
ट्रेनिंग का संघर्ष: ट्रक ड्राइवरों से माँगनी पड़ती थी लिफ्ट
शुरुआत में मीराबाई की रुचि तीरंदाजी में थी, परंतु इंफाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण देखकर उनका झुकाव इस खेल की ओर हो गया। उन्होंने साल 2008 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी में औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ किया। घर की तंगी इतनी थी कि अकादमी तक पहुँचने के लिए उन्हें बालू और पत्थर ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट माँगनी पड़ती थी। यह वह दौर था जब उनका हौसला ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी था।
करियर का उदय: डेब्यू से विश्व चैंपियन तक
राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। यह उनके स्वर्णिम करियर की केवल शुरुआत थी। साल 2017 में उन्होंने विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और दो दशकों में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक जीता।
ओलंपिक चाँदी और पेरिस की निराशा
टोक्यो ओलंपिक 2021 में मीराबाई चानू ने 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा और ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने लगातार दूसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण जीता। हालाँकि, पेरिस ओलंपिक 2024 में वह पदक से चूक गईं — यह उनके करियर का एक कठिन अध्याय रहा।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: हैट्रिक से रचा इतिहास
पेरिस की निराशा को पीछे छोड़ते हुए मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जबरदस्त वापसी की। 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का भार उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली विश्व की पहली वेटलिफ्टर बन गईं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में बल्कि वैश्विक वेटलिफ्टिंग में भी अभूतपूर्व है। गौरतलब है कि साल 2018 में उन्हें पद्म श्री और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। नोंगपोक काकचिंग के उस छोटे से गाँव से शुरू हुई यात्रा आज विश्व कीर्तिमान पर आकर ठहरी है — और मीराबाई की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत बनती रहेगी।