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मीराबाई चानू: लकड़ियों के गठ्ठर से कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक, इतिहास रचने वाली पहली वेटलिफ्टर

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मीराबाई चानू: लकड़ियों के गठ्ठर से कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड की हैट्रिक, इतिहास रचने वाली पहली वेटलिफ्टर

सारांश

लकड़ियों के गठ्ठर उठाने से लेकर ट्रक से लिफ्ट माँगने तक — मीराबाई चानू का सफर आसान नहीं था। लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 190 किलो उठाकर उन्होंने वह कर दिखाया जो दुनिया में किसी वेटलिफ्टर ने नहीं किया: लगातार तीन राष्ट्रमंडल स्वर्ण।

मुख्य बातें

मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता।
वह राष्ट्रमंडल खेलों में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली विश्व की पहली वेटलिफ्टर बनीं।
जन्म 8 अगस्त 1994 , नोंगपोक काकचिंग, मणिपुर ; 2008 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी से प्रशिक्षण शुरू।
2017 में विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण — दो दशकों में ऐसा करने वाली पहली भारतीय।
टोक्यो ओलंपिक 2021 में 49 किग्रा वर्ग में रजत — ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर।
2018 में पद्म श्री और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित।

भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता और इस प्रतियोगिता के इतिहास में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गईं। मणिपुर के एक साधारण परिवार से उठकर विश्व के शीर्ष पर पहुँचने की उनकी यात्रा संघर्ष, साहस और असाधारण आत्मबल की कहानी है।

बचपन: लकड़ियों के गठ्ठर और पहाड़ियों की चढ़ाई

मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के इंफाल के निकट नोंगपोक काकचिंग गाँव में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति कमज़ोर थी, लेकिन बचपन से ही उनमें असाधारण शारीरिक क्षमता दिखती थी — वह लकड़ियों के भारी गठ्ठर उठाकर पहाड़ियों पर चढ़ जाया करती थीं। परिवार का खेल जगत से कोई सीधा नाता नहीं था, फिर भी माता-पिता ने बेटी की प्रतिभा को पहचाना और हर कदम पर उनका साथ दिया।

ट्रेनिंग का संघर्ष: ट्रक ड्राइवरों से माँगनी पड़ती थी लिफ्ट

शुरुआत में मीराबाई की रुचि तीरंदाजी में थी, परंतु इंफाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में वेटलिफ्टिंग का प्रशिक्षण देखकर उनका झुकाव इस खेल की ओर हो गया। उन्होंने साल 2008 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी में औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ किया। घर की तंगी इतनी थी कि अकादमी तक पहुँचने के लिए उन्हें बालू और पत्थर ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट माँगनी पड़ती थी। यह वह दौर था जब उनका हौसला ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी था।

करियर का उदय: डेब्यू से विश्व चैंपियन तक

राष्ट्रीय खेलों में शानदार प्रदर्शन के बाद मीराबाई ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2014 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता। यह उनके स्वर्णिम करियर की केवल शुरुआत थी। साल 2017 में उन्होंने विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और दो दशकों में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में उन्होंने अपना पहला राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक जीता।

ओलंपिक चाँदी और पेरिस की निराशा

टोक्यो ओलंपिक 2021 में मीराबाई चानू ने 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा और ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने लगातार दूसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण जीता। हालाँकि, पेरिस ओलंपिक 2024 में वह पदक से चूक गईं — यह उनके करियर का एक कठिन अध्याय रहा।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: हैट्रिक से रचा इतिहास

पेरिस की निराशा को पीछे छोड़ते हुए मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जबरदस्त वापसी की। 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो का भार उठाकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली विश्व की पहली वेटलिफ्टर बन गईं। यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में बल्कि वैश्विक वेटलिफ्टिंग में भी अभूतपूर्व है। गौरतलब है कि साल 2018 में उन्हें पद्म श्री और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। नोंगपोक काकचिंग के उस छोटे से गाँव से शुरू हुई यात्रा आज विश्व कीर्तिमान पर आकर ठहरी है — और मीराबाई की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अटूट स्रोत बनती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस व्यवस्था की भी परीक्षा है जो प्रतिभाओं को ट्रक से लिफ्ट माँगने पर मजबूर करती है। पेरिस ओलंपिक की निराशा के बाद उनकी हैट्रिक यह साबित करती है कि असली चैंपियन विफलता में भी नहीं टूटते। लेकिन सवाल यह भी है कि मणिपुर जैसे राज्यों में ऐसी प्रतिभाएँ बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कितनी और दफन हो जाती हैं। मीराबाई की सफलता एक व्यक्तिगत जीत है — खेल अवसंरचना की जीत अभी बाकी है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 48 किलोग्राम वर्ग में 190 किलो भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली वेटलिफ्टर बन गईं।
मीराबाई चानू का जन्म कहाँ और कब हुआ?
मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के इंफाल के निकट नोंगपोक काकचिंग गाँव में हुआ। वह एक साधारण परिवार से आती हैं और बचपन से ही उनमें असाधारण शारीरिक क्षमता थी।
मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत कैसे की?
मीराबाई ने 2008 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया। शुरुआती दिनों में आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अकादमी तक पहुँचने के लिए बालू-पत्थर ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों से लिफ्ट माँगनी पड़ती थी।
मीराबाई चानू को कौन-कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं?
मीराबाई चानू को 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इसी वर्ष वेटलिफ्टिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
मीराबाई चानू का ओलंपिक में कैसा प्रदर्शन रहा है?
मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2021 में 49 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय वेटलिफ्टर बनीं। हालाँकि पेरिस ओलंपिक 2024 में वह पदक जीतने से चूक गईं, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में उन्होंने शानदार वापसी की।
राष्ट्र प्रेस
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