सोपोर पुलिस ने पाकिस्तान से संचालित हिजबुल मुजाहिदीन सरगना गुलाम मोहम्मद भट की संपत्ति जब्त की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के सोपोर में पुलिस ने शुक्रवार, 15 मई को आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध चल रहे व्यापक अभियान के तहत प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े एक घोषित भगोड़े आतंकी सरगना की अचल संपत्ति कुर्क कर ली। अभियुक्त गुलाम मोहम्मद भट उर्फ हैदर फिलहाल पाकिस्तान से हिजबुल मुजाहिदीन नेटवर्क के साथ समन्वय में सक्रिय बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, गुलाम मोहम्मद भट उर्फ हैदर — पुत्र गुलाम मोहिउद्दीन भट, मूल निवासी रोहामा, बारामूला — ने अवैध हथियारों और गोला-बारूद का प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में अवैध रूप से घुसपैठ की थी। इसके बाद वह पाकिस्तान से आतंकी सरगना के रूप में काम कर रहा है।
यह कार्रवाई पंजल्ला पुलिस स्टेशन में निकास और आंतरिक आवागमन (नियंत्रण) अध्यादेश (ईआईएमसीओ) अधिनियम की धारा 2/3 के तहत दर्ज एफआईआर के अंतर्गत की गई है।
कुर्क की गई संपत्ति का विवरण
राजस्व विभाग के सहयोग से दो स्थानों पर संपत्ति जब्त की गई — दाएंगरुत रोहामा में छह मरला और रेशिनार रोहामा में दस मरला भूमि। अधिकारियों के अनुसार, इन संपत्तियों का मूल्य लाखों रुपये में है।
राजस्व अभिलेखों और स्थानीय जांच के माध्यम से उचित सत्यापन के बाद न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए कुर्की की प्रक्रिया पूरी की गई।
न्यायालय द्वारा भगोड़ा घोषित
पुलिस के बयान के अनुसार, अभियुक्त लंबे समय से लगातार प्रयासों के बावजूद कानूनी कार्रवाई से बचता रहा। परिणामस्वरूप, न्यायालय ने उसे दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 88 के तहत भगोड़ा घोषित कर दिया। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर पुलिस आतंकी वित्तपोषण और संपत्ति नेटवर्क को तोड़ने के लिए कानूनी उपकरणों का व्यापक उपयोग कर रही है।
आतंकी नेटवर्क पर प्रभाव
गौरतलब है कि संपत्ति कुर्की जैसी कार्रवाइयाँ आतंकी संगठनों के स्थानीय आर्थिक आधार को कमज़ोर करने की रणनीति का हिस्सा हैं। हिजबुल मुजाहिदीन भारत में प्रतिबंधित संगठन है और कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित होता रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की कुर्की कार्रवाइयाँ आतंकियों के परिजनों और स्थानीय सहयोगियों को भी एक स्पष्ट संदेश देती हैं।
सोपोर क्षेत्र में यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर पुलिस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसमें भगोड़े आतंकियों की संपत्तियाँ चिह्नित कर कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त की जा रही हैं।