जीईएम का 10 साल में ₹422 करोड़ से ₹1.55 लाख करोड़ तक सफर, पीयूष गोयल ने गिनाई उपलब्धियाँ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 10 अगस्त 2026 को कहा कि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने भारत की सार्वजनिक खरीद प्रणाली को जड़ से बदल दिया है। उन्होंने बताया कि जीईएम का सकल व्यापारिक मूल्य (जीएमवी) एक दशक में मात्र ₹422 करोड़ से बढ़कर ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक हो गया है — यह वृद्धि भारतीय डिजिटल प्रोक्योरमेंट इतिहास में अभूतपूर्व है।
जीईएम की विकास यात्रा
वर्ष 2016 में लॉन्च हुआ जीईएम अब अपने 11वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। वर्तमान में यह प्लेटफॉर्म 1.37 लाख से अधिक सरकारी खरीदार संगठनों को लगभग 25 लाख विक्रेताओं और सेवा प्रदाताओं से जोड़ता है। पोर्टल पर 10,660 से अधिक उत्पाद श्रेणियाँ और 350 सेवा श्रेणियाँ उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों की ज़रूरतें पूरी की जाती हैं।
गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई अपनी पोस्ट में कहा, 'पिछले 10 वर्षों में जीईएम ने प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है, बेहतर मूल्य खोज सुनिश्चित की है, खरीद प्रक्रिया की अवधि को कम किया है, सरकार के लिए बड़ी बचत पैदा की है और एंड-टू-एंड डिजिटल खरीद प्रक्रिया के माध्यम से जवाबदेही को मजबूत किया है।'
एमएसएमई और महिला उद्यमियों को मिली नई राह
जीईएम की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है छोटे व्यवसायों की भागीदारी। पोर्टल पर 12.28 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं। इनमें 2.25 लाख से अधिक महिला उद्यमियों द्वारा संचालित इकाइयाँ शामिल हैं। इसके अलावा 42,000 से अधिक स्टार्टअप्स भी इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं।
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकार 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों को गति देने की कोशिश कर रही है। गोयल ने कहा कि जीईएम ने सरकारी खरीद बाज़ार को एमएसएमई, स्टार्टअप्स, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), कारीगरों और बुनकरों के लिए अधिक सुलभ बनाया है।
पारदर्शिता और डिजिटल सुशासन
एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, जीईएम अब केवल खरीद-बिक्री का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत के डिजिटल प्रोक्योरमेंट इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। मंत्री ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सशक्तीकरण की वास्तविक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
गौरतलब है कि जीईएम की पारदर्शी संरचना ने पारंपरिक खरीद प्रक्रिया में होने वाली देरी और मनमानी पर काफी हद तक अंकुश लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इसके बावजूद छोटे विक्रेताओं के लिए भुगतान में देरी की समस्या अभी पूरी तरह हल नहीं हुई है।
आगे की राह: एआई और विस्तार
सरकार के अनुसार, आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और व्यापक भागीदारी के ज़रिए जीईएम को और अधिक स्मार्ट एवं एकीकृत बनाया जाएगा। इससे पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन को और मज़बूती मिलने की उम्मीद है। जीईएम की यह विकास गाथा 'आत्मनिर्भर भारत' और 'विकसित भारत' के लक्ष्यों की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।