25 सितंबर 2026
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पहलगाम 50 बेड अस्पताल: 75% निर्माण पूरा, ₹19.90 करोड़ की परियोजना में देरी की वजह बताई

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पहलगाम 50 बेड अस्पताल: 75% निर्माण पूरा, ₹19.90 करोड़ की परियोजना में देरी की वजह बताई

सारांश

पहलगाम में ₹19.90 करोड़ की लागत से बन रहे 50 बेड अस्पताल का 75% काम पूरा हो चुका है, लेकिन भूगोल की चुनौती और कोविड के बाद की महंगाई ने लागत बढ़ाई। मंत्री सकीना इटू ने विधानसभा में प्रगति का ब्यौरा देते हुए व्यक्तिगत निगरानी का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने 25 सितंबर 2026 को विधानसभा में बताया कि पहलगाम के 50 बेड अस्पताल का 75% निर्माण पूरा हो चुका है।
परियोजना 12 मार्च 2020 को ₹19.90 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी के साथ शुरू हुई थी; अब तक ₹16.75 करोड़ जारी और ₹10.53 करोड़ ( 31 मार्च 2026 तक) खर्च।
भूगोल के कारण अतिरिक्त बेसमेंट और कोविड-पश्चात उपकरण महंगाई से परियोजना लागत बढ़ी; संशोधित DPR की प्रतीक्षा।
DG सेट चालू; CSSD , STP और लॉन्ड्री सिस्टम की आपूर्ति व स्थापना पूरी, चालू करने की प्रक्रिया जारी।
पहलगाम, सल्लर और ऐशमुकाम के PHC को सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में अपग्रेड करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं।
बारामूला में ₹24.62 करोड़ की 14 विकास परियोजनाओं पर काम जारी।

जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को विधानसभा में जानकारी दी कि पहलगाम में निर्माणाधीन 50 बेड वाले अस्पताल ब्लॉक का लगभग 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है और शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। यह परियोजना 12 मार्च 2020 को जारी सरकारी आदेश के तहत ₹19.90 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति के साथ शुरू हुई थी।

परियोजना की वित्तीय स्थिति

मंत्री ने सदन को बताया कि इस अस्पताल परियोजना के लिए अब तक ₹16.75 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। 31 मार्च 2026 तक कुल ₹10.53 करोड़ खर्च हुए थे, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक ₹33.31 लाख व्यय किए गए हैं। परियोजना की लागत में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है क्योंकि भूगोल और कोविड के बाद की महंगाई ने कुल खर्च बढ़ा दिया।

अब तक के प्रमुख कार्य

अस्पताल की मुख्य इमारत के साथ-साथ सिविल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल और संबद्ध कार्य इस परियोजना में शामिल हैं। डीजी सेट को सफलतापूर्वक चालू कर सौंप दिया गया है। लॉन्ड्री सिस्टम, सेंट्रल स्टेराइल सप्लाई डिपार्टमेंट (CSSD) और स्टेराइल टनल प्रोजेक्ट (STP) से जुड़े उपकरणों की आपूर्ति व स्थापना हो चुकी है और उन्हें चालू करने की प्रक्रिया जारी है। लिफ्ट लगाने का काम भी अभी चल रहा है।

देरी के कारण

मंत्री इटू ने परियोजना में हुई देरी के दो प्रमुख कारण गिनाए। पहला — निर्माण स्थल की भौगोलिक स्थिति और भूमि के स्तर में अंतर के कारण एक अतिरिक्त बेसमेंट बनाना ज़रूरी हो गया, जिससे निर्मित क्षेत्र बढ़ा और स्ट्रक्चरल, आर्किटेक्चरल व अन्य कार्यों का दायरा भी विस्तृत हुआ। दूसरा — कोविड के बाद उपकरणों और उनकी स्थापना लागत में आई बढ़ोतरी ने भी परियोजना का बजट प्रभावित किया। अतिरिक्त धनराशि जुटाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और निगरानी

मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस परियोजना की प्रगति पर नज़र रख रही हैं और सभी संबंधित पक्षों के साथ समीक्षा बैठक भी कर चुकी हैं। स्वास्थ्य सेवा निदेशालय, कश्मीर से संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) मिलने के बाद संशोधित प्रशासनिक मंजूरी दी जाएगी। गौरतलब है कि यह प्रश्न पहलगाम विधायक अल्ताफ अहमद वानी ने उठाया था।

स्वास्थ्य ढाँचे पर व्यापक नीतिगत स्पष्टता

पहलगाम, सल्लर और ऐशमुकाम के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) को सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पतालों में अपग्रेड करने के पूरक सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। विभाग का ध्यान मौजूदा सुविधाओं को मज़बूत करने पर केंद्रित है। उन्होंने IPHS-2022 के मानकों का हवाला देते हुए बताया कि 5 लाख से कम आबादी वाले जिलों में — जहाँ पहले से जिला अस्पताल हो — सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल अनिवार्य नहीं होता। जम्मू-कश्मीर में पहले से ही इन मानकों से अधिक सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल मौजूद हैं। इसके अलावा, बारामूला शहर में ₹24.62 करोड़ की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

पहलगाम पर्यटन क्षेत्र के केंद्र में होने के कारण यह अस्पताल स्थानीय निवासियों के साथ-साथ यहाँ आने वाले लाखों पर्यटकों की स्वास्थ्य ज़रूरतें पूरी करने के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है। परियोजना के शीघ्र पूर्ण होने पर क्षेत्र की आपातकालीन चिकित्सा क्षमता में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पहलगाम जैसे संवेदनशील पर्यटन-क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की माँग पहले से अधिक है। मंत्री का व्यक्तिगत निगरानी का आश्वासन स्वागतयोग्य है, पर जवाबदेही की असली कसौटी समयबद्ध पूर्णता होगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पहलगाम के 50 बेड अस्पताल का निर्माण कब शुरू हुआ और अब क्या स्थिति है?
यह परियोजना 12 मार्च 2020 के सरकारी आदेश के तहत ₹19.90 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति के साथ शुरू हुई थी। 25 सितंबर 2026 तक इसका लगभग 75% निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
पहलगाम अस्पताल परियोजना में देरी क्यों हुई?
मंत्री सकीना इटू के अनुसार, निर्माण स्थल की भौगोलिक स्थिति के कारण अतिरिक्त बेसमेंट बनाना ज़रूरी हो गया, जिससे निर्मित क्षेत्र और लागत दोनों बढ़े। इसके अलावा कोविड के बाद उपकरणों और उनकी स्थापना की लागत में भी वृद्धि हुई।
अस्पताल परियोजना पर अब तक कितना पैसा खर्च हुआ है?
परियोजना के लिए अब तक ₹16.75 करोड़ जारी किए गए हैं। 31 मार्च 2026 तक ₹10.53 करोड़ खर्च हुए थे और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक ₹33.31 लाख व्यय किए गए हैं।
क्या पहलगाम, सल्लर और ऐशमुकाम के PHC को सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में अपग्रेड किया जाएगा?
नहीं, मंत्री इटू ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। विभाग का ध्यान मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं को मज़बूत करने पर है।
जम्मू-कश्मीर में IPHS-2022 के तहत सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल के क्या मानक हैं?
IPHS-2022 के अनुसार, 5 लाख से कम आबादी वाले जिले में — जहाँ पहले से जिला अस्पताल काम कर रहा हो — सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की ज़रूरत नहीं। 5 से 10 लाख आबादी पर एक और हर अतिरिक्त 10 लाख पर एक और सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल की व्यवस्था हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में पहले से इन मानकों से अधिक सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल मौजूद हैं।
राष्ट्र प्रेस
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