29 सितंबर 2026
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जेपी नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की समीक्षा की, KSCH में 894 बिस्तरों तक विस्तार का खाका

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जेपी नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की समीक्षा की, KSCH में 894 बिस्तरों तक विस्तार का खाका

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 28 सितंबर को LHMC और KSCH की समीक्षा की। KSCH में बिस्तर क्षमता 394 से 894, ICU 40 से 200 और OT 4 से 12 करने की योजना है। साथ ही अत्याधुनिक स्किल लैब और 93% से अधिक जीवित रहने की दर वाले नवजात देखभाल केंद्र का निरीक्षण भी किया गया।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 28 सितंबर 2026 को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) और संबद्ध अस्पतालों की प्रगति समीक्षा की।
कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) की बिस्तर क्षमता 394 से 894 , ICU क्षमता 40 से 200 बिस्तर और OT संख्या 4 से 12 करने की योजना है।
LHMC की अत्याधुनिक स्किल लैब में ICU, सर्जिकल, प्रसूति ओटी, NICU, ट्रॉमा सहित 8 से अधिक सिमुलेशन क्षेत्र उपलब्ध हैं।
KSCH के नियोनेटोलॉजी विभाग में प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव और 2,500 NICU भर्ती ; जीवित रहने की दर 93% से अधिक ।
नड्डा ने बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ स्वास्थ्य पेशेवरों की समानांतर भर्ती और व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का निर्देश दिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) और इससे संबद्ध श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल (SSKH) तथा कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) की व्यापक प्रगति समीक्षा की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे, विशेषीकृत नैदानिक सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मरीज़-केंद्रित देखभाल को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।

कलावती सरन अस्पताल का बड़ा विस्तार

समीक्षा बैठक में मंत्री को कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) के चल रहे विस्तार कार्य की विस्तृत जानकारी दी गई। इस परियोजना के तहत अस्पताल की कुल बिस्तर क्षमता 394 से बढ़ाकर 894 करने की योजना है। साथ ही, आईसीयू क्षमता 40 से बढ़ाकर 200 बिस्तर और ऑपरेशन थिएटरों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

KSCH परिसर में निर्माण कार्य सक्रिय रूप से जारी है। इस विस्तार का उद्देश्य तृतीयक और सुपर-स्पेशियलिटी बाल चिकित्सा देखभाल को मज़बूत करने के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण की क्षमता का विस्तार करना है।

नड्डा के निर्देश: मरीज़-केंद्रित और भविष्योन्मुखी योजना

समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि LHMC और इससे संबद्ध अस्पतालों में चल रही तथा आगामी परियोजनाओं की योजना मरीज़-केंद्रित और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ तैयार की जानी चाहिए, जिसमें बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि योजना और डिज़ाइन तैयार करते समय संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी संस्थानों की विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का लाभ उठाया जाना चाहिए।

नड्डा ने निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं की समय-सीमा की कड़ाई से निगरानी करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने अनुमोदन और स्वीकृति से जुड़े मुद्दों को समय पर मंत्रालय के समक्ष उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ-साथ नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती समानांतर रूप से आगे बढ़नी चाहिए।

भविष्य की दिशा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीर्घकालिक संस्थागत दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का आह्वान किया, जिसमें तत्काल प्राथमिकताओं को चरणबद्ध विकास और आने वाले दशकों के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ समाहित किया जाए। उन्होंने बड़े पैमाने की परियोजनाओं में, जहाँ उपयुक्त हो, निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और साझेदारियों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

LHMC की अत्याधुनिक स्किल लैब का निरीक्षण

दौरे के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में स्थापित अत्याधुनिक स्किल लैब का निरीक्षण किया। यह एक व्यापक बहु-विषयक सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण सुविधा है, जो सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में व्यावहारिक एवं दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करती है।

इस सुविधा में आईसीयू, सर्जिकल कौशल, सिमुलेटेड ओटी, प्रसूति ओटी, एनआईसीयू, ट्रॉमा, ईएनटी और नेत्र विज्ञान के लिए समर्पित सिमुलेशन क्षेत्र हैं। इसके साथ ही ब्रीफिंग-डीब्रीफिंग क्षेत्र तथा प्रक्रियात्मक कौशल प्रशिक्षण के लिए टास्क ट्रेनर भी उपलब्ध हैं। यह लैब स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रशिक्षण, संकाय विकास, बहुविषयक टीम प्रशिक्षण तथा दक्षता-आधारित मूल्यांकन के लिए एकीकृत मंच के रूप में कार्य करती है।

नवजात देखभाल केंद्र: 93% से अधिक जीवित रहने की दर

मंत्री ने कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में हाल ही में कार्यशील हुए ऑगमेंटेड लेवल III-बी नवजात देखभाल केंद्र का भी दौरा किया। नियोनेटोलॉजी विभाग में 80 गहन चिकित्सा बिस्तर हैं और यहाँ प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव तथा 2,500 एनआईसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है। यहाँ समग्र जीवित रहने की दर 93 प्रतिशत से अधिक है।

नवजात देखभाल सुविधा में हाई-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन (HFOV), इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी, चिकित्सीय हाइपोथर्मिया तथा व्यापक श्वसन सहायता सहित उन्नत सेवाएँ उपलब्ध हैं। हाल ही में कार्यशील हुए NICU-B में 7 एनआईसीयू बिस्तर, 8 एचडीयू बिस्तर, 15 कंगारू मदर केयर (KMC) शय्याएँ तथा माताओं के लिए 12 कॉट हैं। यहाँ परिवार-एकीकृत देखभाल, कंगारू मदर केयर और स्तनपान सहायता पर विशेष बल दिया जाता है।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

इस समीक्षा बैठक में सुनील कुमार बर्नवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA); डॉ. एलजी कृष्णा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS); जीएस चित्रा, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय; डॉ. हिमानी आहलूवालिया, निदेशक, LHMC; डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. विक्रम दत्ता, चिकित्सा अधीक्षक, LHMC; तथा डॉ. सुजाता गौतम, प्राचार्य, LHMC उपस्थित रहे।

यह समीक्षा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर है। LHMC परिसर में प्रस्तावित सुधारों का क्रियान्वयन दिल्ली में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में है — दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अवसंरचना विस्तार की घोषणाएँ अक्सर निर्माण विलंब और जनशक्ति की कमी के कारण लक्ष्य से पिछड़ती रही हैं। नड्डा का यह निर्देश कि भर्ती और निर्माण साथ-साथ चलें, सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में रिक्तियों की दीर्घकालिक समस्या को देखते हुए यह लक्ष्य कठिन है। निजी क्षेत्र की साझेदारी का सुझाव भी तब तक अधूरा है जब तक गुणवत्ता और सार्वजनिक पहुँच की गारंटी सुनिश्चित करने वाला स्पष्ट नियामक ढाँचा न हो।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की समीक्षा में क्या देखा?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 28 सितंबर 2026 को LHMC, SSKH और KSCH की प्रगति समीक्षा की, जिसमें अवसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा, सिमुलेशन-आधारित स्किल लैब और नवजात देखभाल केंद्र का निरीक्षण शामिल था। उन्होंने मरीज़-केंद्रित दृष्टिकोण और समयबद्ध क्रियान्वयन पर ज़ोर दिया।
कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में क्या विस्तार होगा?
KSCH की कुल बिस्तर क्षमता 394 से बढ़ाकर 894, ICU क्षमता 40 से 200 बिस्तर और ऑपरेशन थिएटरों की संख्या 4 से 12 करने की योजना है। परिसर में निर्माण कार्य पहले से जारी है।
LHMC की स्किल लैब में क्या सुविधाएँ हैं?
LHMC की स्किल लैब एक बहु-विषयक सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण सुविधा है जिसमें ICU, सर्जिकल, सिमुलेटेड ओटी, प्रसूति ओटी, NICU, ट्रॉमा, ENT और नेत्र विज्ञान के लिए समर्पित क्षेत्र हैं। यह स्नातक, स्नातकोत्तर और संकाय विकास प्रशिक्षण के लिए एकीकृत मंच के रूप में कार्य करती है।
KSCH के नवजात देखभाल केंद्र की क्या विशेषताएँ हैं?
KSCH के नियोनेटोलॉजी विभाग में 80 गहन चिकित्सा बिस्तर हैं और प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव तथा 2,500 NICU भर्ती की देखभाल होती है। यहाँ जीवित रहने की दर 93 प्रतिशत से अधिक है और HFOV, इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी तथा चिकित्सीय हाइपोथर्मिया जैसी उन्नत सेवाएँ उपलब्ध हैं।
नड्डा ने LHMC के लिए कौन-से प्रमुख निर्देश दिए?
नड्डा ने निर्देश दिया कि परियोजनाओं की योजना मरीज़-केंद्रित और भविष्योन्मुखी हो, निर्माण गुणवत्ता और समय-सीमा की कड़ाई से निगरानी हो, और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ-साथ डॉक्टरों व नर्सों की भर्ती समानांतर रूप से आगे बढ़े। उन्होंने दीर्घकालिक मास्टर प्लान और उचित स्थानों पर निजी क्षेत्र की साझेदारी की संभावना तलाशने पर भी बल दिया।
राष्ट्र प्रेस
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