जेपी नड्डा ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की समीक्षा की, KSCH में 894 बिस्तरों तक विस्तार का खाका
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (LHMC) और इससे संबद्ध श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल (SSKH) तथा कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) की व्यापक प्रगति समीक्षा की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढाँचे, विशेषीकृत नैदानिक सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और मरीज़-केंद्रित देखभाल को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया गया।
कलावती सरन अस्पताल का बड़ा विस्तार
समीक्षा बैठक में मंत्री को कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल (KSCH) के चल रहे विस्तार कार्य की विस्तृत जानकारी दी गई। इस परियोजना के तहत अस्पताल की कुल बिस्तर क्षमता 394 से बढ़ाकर 894 करने की योजना है। साथ ही, आईसीयू क्षमता 40 से बढ़ाकर 200 बिस्तर और ऑपरेशन थिएटरों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
KSCH परिसर में निर्माण कार्य सक्रिय रूप से जारी है। इस विस्तार का उद्देश्य तृतीयक और सुपर-स्पेशियलिटी बाल चिकित्सा देखभाल को मज़बूत करने के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण की क्षमता का विस्तार करना है।
नड्डा के निर्देश: मरीज़-केंद्रित और भविष्योन्मुखी योजना
समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया कि LHMC और इससे संबद्ध अस्पतालों में चल रही तथा आगामी परियोजनाओं की योजना मरीज़-केंद्रित और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण के साथ तैयार की जानी चाहिए, जिसमें बदलती चिकित्सा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि योजना और डिज़ाइन तैयार करते समय संबंधित क्षेत्रों के अग्रणी संस्थानों की विशेषज्ञता और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का लाभ उठाया जाना चाहिए।
नड्डा ने निर्माण की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने और परियोजनाओं की समय-सीमा की कड़ाई से निगरानी करने पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने अनुमोदन और स्वीकृति से जुड़े मुद्दों को समय पर मंत्रालय के समक्ष उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ-साथ नर्सों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की भर्ती समानांतर रूप से आगे बढ़नी चाहिए।
भविष्य की दिशा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीर्घकालिक संस्थागत दृष्टिकोण के साथ एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार करने का आह्वान किया, जिसमें तत्काल प्राथमिकताओं को चरणबद्ध विकास और आने वाले दशकों के लिए दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ समाहित किया जाए। उन्होंने बड़े पैमाने की परियोजनाओं में, जहाँ उपयुक्त हो, निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और साझेदारियों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
LHMC की अत्याधुनिक स्किल लैब का निरीक्षण
दौरे के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में स्थापित अत्याधुनिक स्किल लैब का निरीक्षण किया। यह एक व्यापक बहु-विषयक सिमुलेशन-आधारित प्रशिक्षण सुविधा है, जो सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण में व्यावहारिक एवं दक्षता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करती है।
इस सुविधा में आईसीयू, सर्जिकल कौशल, सिमुलेटेड ओटी, प्रसूति ओटी, एनआईसीयू, ट्रॉमा, ईएनटी और नेत्र विज्ञान के लिए समर्पित सिमुलेशन क्षेत्र हैं। इसके साथ ही ब्रीफिंग-डीब्रीफिंग क्षेत्र तथा प्रक्रियात्मक कौशल प्रशिक्षण के लिए टास्क ट्रेनर भी उपलब्ध हैं। यह लैब स्नातक एवं स्नातकोत्तर प्रशिक्षण, संकाय विकास, बहुविषयक टीम प्रशिक्षण तथा दक्षता-आधारित मूल्यांकन के लिए एकीकृत मंच के रूप में कार्य करती है।
नवजात देखभाल केंद्र: 93% से अधिक जीवित रहने की दर
मंत्री ने कलावती सरन चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में हाल ही में कार्यशील हुए ऑगमेंटेड लेवल III-बी नवजात देखभाल केंद्र का भी दौरा किया। नियोनेटोलॉजी विभाग में 80 गहन चिकित्सा बिस्तर हैं और यहाँ प्रतिवर्ष 10,000 से अधिक प्रसव तथा 2,500 एनआईसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है। यहाँ समग्र जीवित रहने की दर 93 प्रतिशत से अधिक है।
नवजात देखभाल सुविधा में हाई-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन (HFOV), इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड थेरेपी, चिकित्सीय हाइपोथर्मिया तथा व्यापक श्वसन सहायता सहित उन्नत सेवाएँ उपलब्ध हैं। हाल ही में कार्यशील हुए NICU-B में 7 एनआईसीयू बिस्तर, 8 एचडीयू बिस्तर, 15 कंगारू मदर केयर (KMC) शय्याएँ तथा माताओं के लिए 12 कॉट हैं। यहाँ परिवार-एकीकृत देखभाल, कंगारू मदर केयर और स्तनपान सहायता पर विशेष बल दिया जाता है।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में सुनील कुमार बर्नवाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA); डॉ. एलजी कृष्णा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ (DGHS); जीएस चित्रा, संयुक्त सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय; डॉ. हिमानी आहलूवालिया, निदेशक, LHMC; डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. विक्रम दत्ता, चिकित्सा अधीक्षक, LHMC; तथा डॉ. सुजाता गौतम, प्राचार्य, LHMC उपस्थित रहे।
यह समीक्षा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब देश में सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर केंद्र सरकार का विशेष ज़ोर है। LHMC परिसर में प्रस्तावित सुधारों का क्रियान्वयन दिल्ली में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा तय करेगा।