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सीएम योगी की स्वास्थ्य समीक्षा: यूपी में 83 मेडिकल कॉलेज, 26.41 करोड़ OPD सेवाएं, गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

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सीएम योगी की स्वास्थ्य समीक्षा: यूपी में 83 मेडिकल कॉलेज, 26.41 करोड़ OPD सेवाएं, गुणवत्ता पर सख्त निर्देश

सारांश

सीएम योगी की समीक्षा बैठक में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा आंकड़ों में बड़ा दिखता है — 83 मेडिकल कॉलेज, 26.41 करोड़ OPD, 96.75 लाख मुफ्त इलाज। अब असली कसौटी यह है कि विस्तार गुणवत्ता में भी तब्दील हो।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 26 मई 2026 को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की व्यापक समीक्षा की।
यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2016-17 के 44 से बढ़कर 2025-26 में 83 हो गई — 88.6% वृद्धि।
वर्ष 2025-26 में 26.41 करोड़ OPD , 1.23 करोड़ IPD सेवाएं और 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांच दर्ज।
6,480 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े; अब तक 96.75 लाख से अधिक निशुल्क उपचार।
15.28 करोड़ आभा आईडी और 15.14 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए।
मेडटेक और अनुसंधान क्षेत्र में लगभग ₹1,500 करोड़ निवेश के लिए इंटेंट फाइल।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 मई 2026 को लखनऊ में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज, जांच, दवाओं और आपात सेवाओं का सीधा लाभ आम नागरिक तक पहुंचना चाहिए। चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य महज संस्थान बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रदेश को प्रशिक्षित चिकित्सक, विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य ढांचे का मौजूदा विस्तार

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस समय 108 जनपदीय चिकित्सालय, 106 विशिष्ट चिकित्सालय, 976 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 3,757 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 27,668 स्वास्थ्य उपकेंद्र संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में सरकारी अस्पतालों में 26.41 करोड़ ओपीडी सेवाएं और 1.23 करोड़ आईपीडी सेवाएं दी गईं, जबकि 24.33 करोड़ पैथोलॉजी जांच की गईं।

मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति सामने आई — वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश में 44 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 83 हो गई है, जो 88.6 प्रतिशत की वृद्धि है। इसी अवधि में पीजी सीटें 1,344 से बढ़कर 5,067 और एमबीबीएस सीटें 5,390 से 12,800 तक पहुंच गई हैं। सुपर स्पेशियलिटी सीटों में लगभग 165 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

नर्सिंग शिक्षा और मिशन निरामया

प्रदेश में वर्तमान में 652 नर्सिंग संस्थान संचालित हैं और राज्य में लगभग 3.95 लाख पंजीकृत नर्सिंग स्टाफ उपलब्ध है। एएनएम, जीएनएम, बीएससी नर्सिंग और अन्य पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

'मिशन निरामया 1.0' के तहत 17,000 स्कूलों में परामर्श सत्र आयोजित किए गए और 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच बनाई गई। इस अभियान में 10,570 नर्सिंग संकाय सदस्यों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

आयुष्मान योजना और डिजिटल स्वास्थ्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष्मान योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों का सबसे बड़ा सहारा बन रही है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 6,480 अस्पताल योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक निशुल्क उपचार किए जा चुके हैं। उन्होंने क्लेम दावों का समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने और अस्पतालों को समय पर भुगतान के निर्देश दिए।

डिजिटल स्वास्थ्य के मोर्चे पर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं और 15.14 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। हॉस्पिटल इंफॉर्मेशन सिस्टम और लैब इंफॉर्मेशन सिस्टम का दायरा भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना में आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी जैसी आयुष पद्धतियों की आईपीडी सेवाओं को भी शामिल करने के निर्देश दिए।

एम्बुलेंस, दवाएं और विशेष सेवाएं

बैठक में बताया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा की प्रतिक्रिया अवधि में सुधार हुआ है। वर्तमान में 375 एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस संचालित हैं और अब तक 9.38 लाख मरीजों को रेफर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम और कम करने तथा संचालकों का भुगतान समय से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन माह से कम एक्सपायरी अवधि वाली दवाएं अस्पतालों में नहीं होनी चाहिए। प्रदेश के 75 जनपदों में डायलिसिस और 74 जनपदों में सीटी स्कैन सेवा उपलब्ध है। मार्च 2026 तक 35.69 लाख से अधिक डायलिसिस सत्र और 45.35 लाख से अधिक सीटी स्कैन किए जा चुके हैं। 227 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टेली-रेडियोलॉजी सेवा संचालित है।

नए निर्माण और अनुसंधान की दिशा

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ में 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं। यहां प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर भी स्थापित किया जा रहा है और नए परिसर में 1,010 बेड क्षमता वाले अत्याधुनिक चिकित्सालय के निर्माण को स्वीकृति मिल चुकी है। एसजीपीजीआई में 500 बेड एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर परियोजना पर कार्य प्रगति पर है।

चिकित्सा अनुसंधान और मेडटेक क्षेत्र में लगभग ₹1,500 करोड़ निवेश के लिए इंटेंट फाइल किए गए हैं। 'यूपी-आईएमआरएएस' डिजिटल पहल, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और क्लिनिकल ट्रायल यूनिट पर भी कार्य जारी है। आगामी महीनों में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का बहुमंजिला गर्ल्स हॉस्टल, अयोध्या मेडिकल कॉलेज का 110 बेड ट्रॉमा सेंटर, सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का बीएससी नर्सिंग कॉलेज तथा कानपुर मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभाग विस्तार एवं डी-एडिक्शन वार्ड ब्लॉक के लोकार्पण-शिलान्यास प्रस्तावित हैं।

मुख्यमंत्री ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि हर गर्भवती महिला तक समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा पहुंचनी चाहिए। नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कोविड काल में सेवाएं देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के प्राथमिकता आधार पर समायोजन और आशा वर्करों के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न हो — यह निर्देश भी बैठक में दिए गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

26 करोड़ से अधिक OPD — लेकिन विस्तार और गुणवत्ता अक्सर साथ नहीं चलते। असली प्रश्न यह है कि क्या नई सीटें और नए संस्थान योग्य फैकल्टी और मानक देखभाल के साथ आ रहे हैं, या केवल बुनियादी ढांचा खड़ा हो रहा है। आशा वर्करों के लंबित भुगतान और कोविड-काल के स्वास्थ्यकर्मियों के समायोजन जैसे मुद्दों का बैठक में उठना यह संकेत देता है कि ज़मीनी स्तर पर अभी भी अंतर बना हुआ है। ₹1,500 करोड़ के मेडटेक निवेश इरादे और वास्तविक रोगी परिणामों के बीच की खाई को पाटने के लिए पारदर्शी निगरानी तंत्र अनिवार्य होगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी की स्वास्थ्य समीक्षा बैठक में क्या मुख्य निर्देश दिए गए?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 मई 2026 को हुई समीक्षा बैठक में सरकारी अस्पतालों में इलाज, दवाओं और आपात सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने, एम्बुलेंस रिस्पॉन्स टाइम घटाने और तीन माह से कम एक्सपायरी वाली दवाएं हटाने के सख्त निर्देश दिए। साथ ही आशा वर्करों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने और हेल्थ एटीएम सेवाओं का विस्तार करने को भी कहा।
उत्तर प्रदेश में अभी कितने मेडिकल कॉलेज हैं और कितनी वृद्धि हुई है?
2025-26 में उत्तर प्रदेश में 83 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि 2016-17 में यह संख्या 44 थी — यानी 88.6 प्रतिशत की वृद्धि। इसी अवधि में एमबीबीएस सीटें 5,390 से बढ़कर 12,800 और पीजी सीटें 1,344 से 5,067 हो गई हैं।
आयुष्मान योजना का उत्तर प्रदेश में क्या हाल है?
उत्तर प्रदेश में 6,480 अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं और अब तक 96.75 लाख से अधिक निशुल्क उपचार किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने क्लेम दावों का समय पर निस्तारण और अस्पतालों को समय से भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
यूपी में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है?
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत प्रदेश में 15.28 करोड़ से अधिक आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं और 15.14 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं। 'यूपी-आईएमआरएएस' डिजिटल पहल और मेडटेक कार्यक्रमों पर भी काम जारी है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई में क्या नई सुविधाएं आ रही हैं?
लोहिया संस्थान में 376 से अधिक रोबोटिक सर्जरी और 250 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं; प्रदेश का पहला गामा नाइफ सेंटर स्थापित हो रहा है और 1,010 बेड के नए अत्याधुनिक चिकित्सालय को स्वीकृति मिली है। एसजीपीजीआई में 500 बेड का एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर निर्माणाधीन है।
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