दिल्ली प्रदर्शन: लेडी हार्डिंग में 83 घायलों का उपचार, जेपी नड्डा ने अस्पताल पहुँचकर लिया जायज़ा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 21 जुलाई को लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, नई दिल्ली का दौरा किया और दिल्ली विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए प्रदर्शनकारियों व पुलिसकर्मियों की चिकित्सा स्थिति की जानकारी ली। अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. हिमानी अहलूवालिया ने बताया कि सोमवार रात कुल 83 घायल अस्पताल लाए गए थे, जिनमें प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों शामिल थे।
मुख्य घटनाक्रम
डॉ. अहलूवालिया के अनुसार, 83 घायलों को विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगी चोटों के चलते अस्पताल लाया गया था। मेडिकल टीम ने सभी का तत्काल उपचार किया और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराईं। राहत की बात यह रही कि कोई भी मरीज इतनी गंभीर स्थिति में नहीं था कि उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़े या दीर्घकालिक अस्पताल प्रवास की आवश्यकता हो।
अधिकांश घायलों को उपचार और आवश्यक ऑब्जर्वेशन के बाद छुट्टी दे दी गई। डिस्चार्ज किए गए सभी मरीजों को उचित चिकित्सकीय निर्देश भी दिए गए। हालाँकि, एक मरीज को अभी भी अस्पताल के वार्ड में भर्ती रखा गया है, क्योंकि उसकी चोटें अपेक्षाकृत गंभीर हैं।
जेपी नड्डा का दौरा और समीक्षा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने दौरे के दौरान अस्पताल प्रशासन से घटना के समय की तैयारियों, मरीजों की संख्या और मेडिकल टीम की प्रतिक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने भर्ती मरीज का इलाज कर रही विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से भी बात की और आगे की उपचार योजना को समझा।
नड्डा स्वयं भर्ती मरीज से मिलने वार्ड पहुँचे और उसका हालचाल जाना। उन्होंने मरीज को आश्वस्त किया कि उपचार के दौरान किसी भी प्रकार की सहायता की ज़रूरत पड़ने पर केंद्र सरकार हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराएगी।
अस्पताल की तैयारी और वर्तमान स्थिति
डॉ. अहलूवालिया ने बताया कि घटना के समय अस्पताल के सभी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी पूरी तत्परता के साथ सेवाएँ दे रहे थे। वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और अस्पताल भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद कानून-व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्तता को लेकर सवाल उठ रहे थे। केंद्रीय मंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति इस संदर्भ में सरकार की संवेदनशीलता का संकेत मानी जा रही है।
फॉलो-अप और आगे की व्यवस्था
डॉ. अहलूवालिया ने स्पष्ट किया कि जिन मरीजों को आगे ओपीडी में फॉलो-अप जाँच की आवश्यकता होगी या बाद में किसी चिकित्सा सहायता की ज़रूरत पड़ेगी, वे अस्पताल से संपर्क कर सकते हैं। अस्पताल प्रशासन सभी पूर्व मरीजों को आवश्यकतानुसार सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सुनिश्चित करना कि घायलों को दीर्घकालिक चिकित्सा सहायता मिले, आने वाले दिनों में प्रशासन की प्राथमिकता रहेगी।