21 जुलाई 2026
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दिल्ली हिंसा: नड्डा ने आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से की मुलाकात, सीजेपी का ज्ञापन लिया

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दिल्ली हिंसा: नड्डा ने आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों से की मुलाकात, सीजेपी का ज्ञापन लिया

सारांश

'संसद चलो' मार्च की हिंसा के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने घायलों से मुलाकात की और सीजेपी का ज्ञापन लिया — लेकिन तीनों माँगों पर कोई आश्वासन नहीं दिया। नीट पेपर लीक विवाद और सोनम वांगचुक की रिहाई की माँग के साथ जंतर-मंतर पर तनाव बरकरार है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 21 जुलाई को आरएमएल और लेडी हार्डिंग अस्पताल में 'संसद चलो' मार्च में घायल प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
सीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने तीन माँगें रखीं: सोनम वांगचुक की रिहाई, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और नीट पीड़ित परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार नड्डा ने तीनों माँगों पर कोई आश्वासन नहीं दिया।
पुलिस द्वारा मंच-टेंट हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर मंगलवार को फिर एकत्र हुए।
इलाके में दिल्ली पुलिस और आरएएफ की भारी तैनाती जारी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा मंगलवार, 21 जुलाई को नई दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल और लेडी हार्डिंग अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़पों में घायल प्रदर्शनकारियों का हालचाल जाना। उन्होंने आरएमएल अस्पताल में चिकित्सकों के साथ बैठक कर घायलों की स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा भी की।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थकों और छात्रों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक समेत परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद महीनों से राष्ट्रीय सुर्खियों में है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

सीजेपी प्रतिनिधिमंडल की तीन प्रमुख माँगें

सोमवार को सीजेपी के दो प्रतिनिधियों — सौरव दास और आशुतोष रांका — ने नड्डा से उनके आवास पर दो बार मुलाकात की। सरकारी सूत्रों के अनुसार पहली बैठक सुबह करीब 11:50 बजे हुई, जिसमें मौखिक रूप से माँगें रखी गईं। इसके बाद नड्डा के कहने पर प्रतिनिधिमंडल दोपहर करीब चार बजे दोबारा पहुँचा और लिखित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने तीन प्रमुख माँगें रखीं:

पहली — सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिना किसी प्रतिबंध के रिहाई। दूसरी — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। तीसरी — नीट-2026 पेपर लीक विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा।

सरकार की प्रतिक्रिया

सरकारी सूत्रों के मुताबिक नड्डा ने तीनों माँगों पर कोई आश्वासन नहीं दिया। मंगलवार को एनडीए के 'मंगल मिलन' कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने केवल इतना कहा, "बैठक अच्छी रही। बैठक हमेशा अच्छी होती है।" प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। हालाँकि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर का धरना समाप्त कर संसद भवन क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। बैठक के बाद नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और यह पहल सीजेपी की ओर से की गई थी।

जंतर-मंतर पर स्थिति

पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से मंच और टेंट हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी मंगलवार सुबह फिर वहाँ एकत्र हुए और विरोध जारी रखा। सीजेपी की अपील के बाद बड़ी संख्या में समर्थक जंतर-मंतर पहुँचे। स्थिति को देखते हुए इलाके में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों की भारी तैनाती की गई है। गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में उठी छात्र नाराज़गी की व्यापक लहर का हिस्सा है।

आगे क्या

सीजेपी की तीन माँगों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग और नीट पीड़ित परिवारों के मुआवजे का मुद्दा संसद सत्र में भी गूँजने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों के अगले कदम और सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ठोस आश्वासन से परहेज़ रखा जाता है। तीन माँगों में से एक — नीट पीड़ित परिवारों को मुआवजा — सीधे सरकार की परीक्षा-प्रणाली की विफलता को रेखांकित करती है, जिसे स्वीकार करना राजनीतिक रूप से महँगा साबित हो सकता है। सोनम वांगचुक की रिहाई की माँग इस आंदोलन को लद्दाख के मुद्दे से भी जोड़ती है, जो इसे केवल नीट-विरोध से आगे ले जाती है। बिना किसी ठोस प्रतिबद्धता के, जंतर-मंतर का तनाव संसद सत्र तक खिंचने का जोखिम है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संसद चलो' मार्च में हिंसा क्यों हुई?
सोमवार को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे सीजेपी समर्थकों और छात्रों की पुलिस के साथ हिंसक झड़प हुई। प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे।
सीजेपी ने जेपी नड्डा को क्या माँगें सौंपी हैं?
सीजेपी ने तीन माँगें रखी हैं — सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिना प्रतिबंध रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, और नीट-2026 विवाद के बाद कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा। ज्ञापन 21 जुलाई को दोपहर चार बजे नड्डा के आवास पर सौंपा गया।
क्या सरकार ने प्रदर्शनकारियों की माँगें मान ली हैं?
नहीं। सरकारी सूत्रों के अनुसार जेपी नड्डा ने तीनों माँगों पर कोई आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर का धरना समाप्त कर प्रशासन का सहयोग करने की अपील ज़रूर की।
जंतर-मंतर पर अभी क्या स्थिति है?
पुलिस द्वारा मंच और टेंट हटाए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी मंगलवार सुबह फिर जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। इलाके में दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) की भारी तैनाती की गई है।
सोनम वांगचुक कौन हैं और उनकी रिहाई की माँग क्यों उठ रही है?
सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन चला रहे हैं। सीजेपी ने उनकी बिना किसी प्रतिबंध के रिहाई को अपनी तीन प्रमुख माँगों में शामिल किया है।
राष्ट्र प्रेस
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