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जौहर प्रथा इस्लाम में भी अच्छी नहीं — यूसीसी सभी धर्मों पर समान रूप से लागू हो: मौलाना मोहसिन तकवी

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जौहर प्रथा इस्लाम में भी अच्छी नहीं — यूसीसी सभी धर्मों पर समान रूप से लागू हो: मौलाना मोहसिन तकवी

सारांश

शिया धर्मगुरु मौलाना मोहसिन तकवी ने जौहर को इस्लामी नज़रिए से भी अनुचित बताया और यूसीसी पर कहा — कानून सभी धर्मों पर समान लागू हो, सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाना यूसीसी के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।

मुख्य बातें

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहसिन तकवी ने कहा — जौहर की प्रथा इस्लामी दृष्टि से भी 'अच्छी बात नहीं थी।' उन्होंने यूसीसी का सैद्धांतिक समर्थन करते हुए कहा कि यह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा निकाहनामे से बहुविवाह के कॉलम हटाने को उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बताया।
इस्लाम में दूसरी शादी अनुमत है, लेकिन अनिवार्य नहीं — दोनों पत्नियों के साथ समानता की शर्त लागू होती है।
मौलाना तकवी ने कहा — यूसीसी जैसे मुद्दों से देश की असली समस्याओं से जनता का ध्यान हटाया जा रहा है।

शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद मोहसिन तकवी ने 4 सितंबर को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि जौहर की प्रथा इस्लामी दृष्टिकोण से भी उचित नहीं थी, और साथ ही यह भी कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) यदि लागू हो, तो वह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए — केवल मुसलमानों को निशाना बनाना इसके मूल सिद्धांत के विरुद्ध है। उनकी यह टिप्पणी अभिनेत्री स्वरा भास्कर के जौहर संबंधी बयान के संदर्भ में आई।

जौहर पर इस्लामी नज़रिया

मौलाना तकवी ने कहा कि इस्लामी दृष्टि से भी जौहर की परंपरा 'अच्छी बात नहीं थी।' उनके अनुसार, 'इंसान को परिस्थितियों का सामना बहादुरी और हिम्मत के साथ करना चाहिए।' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आज के भारत में जौहर जैसी स्थिति वास्तव में कहाँ हो रही है — उनके अनुसार यह केवल 'विचार और गलतफहमियाँ' हैं।

मुसलमानों के अधिकारों पर चिंता

मौलाना तकवी ने यह भी कहा कि जब 'हर तरफ हिंदुत्व की इतनी बातें हो रही हैं' और 'मुसलमानों के अधिकारों को कुचला जा रहा है,' तो ऐसे में जौहर जैसी बहस का कोई व्यावहारिक आधार नहीं रह जाता। उन्होंने इसे एक काल्पनिक विमर्श बताया जिसका ज़मीनी हकीकत से संबंध नहीं है।

निकाहनामे में बदलाव और यूसीसी विवाद

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा निकाहनामे से दूसरी, तीसरी और चौथी शादी के कॉलम हटाने के निर्णय पर मौलाना तकवी ने कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग सामान्यतः एक ही विवाह करते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बहुविवाह केवल मुसलमानों में नहीं, बल्कि हिंदुओं सहित अन्य समुदायों में भी होता है। उनके अनुसार, 'अगर कोई कानून बनाया जाता है, तो वह सभी के लिए समान होना चाहिए।'

उन्होंने कहा कि यूसीसी की बात करते हुए यदि कार्रवाई केवल मुसलमानों के विरुद्ध होती है, तो यह यूसीसी के मूल सिद्धांत के ही विरुद्ध है। मौलाना तकवी ने स्पष्ट किया कि वे दूसरी शादी को 'पुरजोर समर्थन या बढ़ावा' नहीं देते, लेकिन इस्लाम में यह अनुमत है — बशर्ते दोनों पत्नियों के साथ समानता और न्याय बरता जाए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ और असली मुद्दे

मौलाना तकवी के अनुसार निकाह के नियमों में बदलाव मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मसले को सुलझाने से देश की कौन-सी बड़ी समस्या हल होगी। उनका कहना था कि देश की प्रमुख समस्याओं — जैसे बेरोज़गारी, महँगाई और विकास — से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के विषयों को उछाला जा रहा है।

आगे क्या

यूसीसी को लेकर देश में बहस जारी है और विभिन्न धार्मिक समुदायों के नेता अपनी-अपनी राय सामने रख रहे हैं। मौलाना तकवी जैसे शिया धर्मगुरु का यह बयान इस बहस में एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है — जो न तो पूरी तरह विरोध में है और न ही पक्ष में, बल्कि समानता के सिद्धांत पर ज़ोर देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'यूनिफॉर्म' शब्द ही बेमानी हो जाता है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का निकाहनामे में बदलाव इसी असंतुलन का प्रतीक है। असली सवाल यह है कि क्या यूसीसी की बहस वास्तव में सामाजिक सुधार के लिए है, या यह एक चुनिंदा राजनीतिक उपकरण बन चुकी है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना मोहसिन तकवी ने जौहर प्रथा पर क्या कहा?
मौलाना तकवी ने कहा कि जौहर की प्रथा इस्लामी दृष्टिकोण से भी 'अच्छी बात नहीं थी' और इंसान को परिस्थितियों का सामना बहादुरी से करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आज के भारत में जौहर जैसी स्थिति वास्तव में कहाँ हो रही है।
यूसीसी पर मौलाना तकवी का क्या रुख है?
मौलाना तकवी ने कहा कि यदि यूसीसी लागू हो, तो वह सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उनके अनुसार, केवल मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई करना यूसीसी के मूल सिद्धांत के ही विरुद्ध है।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के निकाहनामे में बदलाव पर उनकी क्या राय है?
मौलाना तकवी ने इसे मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा कि बहुविवाह केवल मुसलमानों में नहीं होता और अगर इस पर कानून बनना है तो वह सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होना चाहिए।
इस्लाम में दूसरी शादी को लेकर मौलाना तकवी ने क्या स्पष्ट किया?
उन्होंने कहा कि इस्लाम में दूसरी शादी अनुमत है, लेकिन अनिवार्य नहीं है और न ही इसके लिए उकसाया गया है। इसके लिए शर्त है कि दोनों पत्नियों के साथ समानता और न्याय बरता जाए।
मौलाना तकवी के अनुसार यूसीसी बहस का असली उद्देश्य क्या है?
मौलाना तकवी ने कहा कि देश की प्रमुख समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के मुद्दे उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार यूसीसी जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित करने से बेरोज़गारी और महँगाई जैसी असली चुनौतियाँ पीछे रह जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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