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यूसीसी पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का विरोध: 'मुसलमानों को निशाना बनाकर लाया जा रहा कानून'

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यूसीसी पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का विरोध: 'मुसलमानों को निशाना बनाकर लाया जा रहा कानून'

सारांश

बरेली से ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने यूसीसी को मुसलमानों को निशाना बनाने वाला कानून बताया और उत्तराखंड में परामर्श प्रक्रिया की अनदेखी पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने NCERT के आपातकाल अध्याय का स्वागत और सना मलिक के बयान की आलोचना की।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 26 जून को बरेली से यूसीसी को मुसलमानों को 'टार्गेट' करने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी लागू करते समय जस्टिस रंजना देसाई की समिति ने मुस्लिम समुदाय से परामर्श नहीं किया।
ST, SC और कबाइली समुदायों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने पर उन्होंने संवैधानिक सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुहर्रम सुरक्षा बयान का समर्थन किया; उत्तर प्रदेश में मुहर्रम शांतिपूर्ण रहा।
NCERT के आपातकाल अध्याय का स्वागत किया; हुसैन दलवई की आपत्ति को खारिज किया।
सना मलिक के बयान में पाकिस्तान का संदर्भ देने को अनुचित बताया, भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर दिया।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 26 जून को बरेली से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कड़ा विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि यह कानून खासतौर पर मुसलमानों को निशाना बनाकर लाया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में यूसीसी लागू किया गया है, वहाँ संविधान-सम्मत प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।

यूसीसी पर मौलाना का रुख

मौलाना रजवी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनावी एजेंडे में यूसीसी शुरू से शामिल रहा है, इसीलिए उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू करने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, संविधान के तहत यूसीसी लागू करने से पहले संबंधित राज्य की जनता और सभी समुदायों की सहमति अनिवार्य है, जो अब तक नहीं ली गई।

उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि जस्टिस रंजना देसाई की समिति ने यूसीसी का मसौदा तैयार करते समय मुस्लिम समुदाय से कोई परामर्श नहीं किया। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि लागू होने के बाद कबाइली, अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) को इसके दायरे से बाहर क्यों रखा गया। मौलाना ने कहा, 'यूसीसी कागज के पुलिंदों में बंद होकर रह जाएगा।'

मुहर्रम और कानून-व्यवस्था पर टिप्पणी

मौलाना रजवी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुहर्रम सुरक्षा संबंधी बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जहाँ भीड़ और अव्यवस्था की आशंका हो, वहाँ सख्ती ज़रूरी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मुहर्रम के आखिरी दिन पूरे उत्तर प्रदेश में शांति रही और पुलिस व जिला प्रशासन की व्यवस्था सराहनीय रही।

सना मलिक विवाद पर प्रतिक्रिया

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता नवाब मलिक की बेटी सना मलिक द्वारा कुरान शरीफ के हवाले से दिए गए बयान पर मौलाना रजवी ने कहा कि उन्होंने संदर्भ को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। उनके अनुसार, मुसलमान भारत के संविधान और कानून का पालन करते हैं और भारत में रहने वाले मुसलमान 'भारतीय मुस्लिम' हैं।

मौलाना ने कहा कि विवाद तब और गहरा हुआ जब सना मलिक ने बहुविवाह से संबंधित चर्चा में पाकिस्तान का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान एक इस्लामी राज्य है जबकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है, जहाँ सैकड़ों धर्मों के मानने वाले लोग रहते हैं और सभी धर्मों का सम्मान होता है।

एनसीईआरटी और आपातकाल अध्याय पर रुख

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई द्वारा एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में आपातकाल अध्याय शामिल किए जाने पर आपत्ति जताने पर मौलाना रजवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे दलवई की टिप्पणी से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, भारत के युवाओं को देश के इतिहास और संस्कृति को जानने का पूरा अधिकार है और NCERT के इस कदम का वे स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि आपातकाल का अध्याय कांग्रेस के लिए 'आईना' है जिसे वह देखना नहीं चाहती।

आगे क्या

यूसीसी को लेकर मुस्लिम संगठनों और सत्तारूढ़ दल के बीच विरोध का यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया पर सभी पक्षों की नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका यह तर्क कि संवैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी हुई, कानूनी दृष्टि से अधिक ठोस है — क्योंकि उत्तराखंड में ST और SC को बाहर रखने का निर्णय खुद सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। उल्लेखनीय यह है कि वे योगी आदित्यनाथ के मुहर्रम बयान का समर्थन करते हैं — यह दर्शाता है कि उनका विरोध राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया केंद्रित है। NCERT के आपातकाल अध्याय का स्वागत करके उन्होंने कांग्रेस से स्पष्ट दूरी बनाई है, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नज़रअंदाज़ होता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने यूसीसी का विरोध क्यों किया?
मौलाना रजवी का कहना है कि यूसीसी खासतौर पर मुसलमानों को निशाना बनाकर लाया जा रहा है और इसे लागू करने से पहले सभी समुदायों की सहमति नहीं ली गई। उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण दिया जहाँ जस्टिस रंजना देसाई की समिति ने मुस्लिम समुदाय से परामर्श नहीं किया।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने पर क्या विवाद है?
मौलाना रजवी के अनुसार, उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद ST, SC और कबाइली समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया, जो संविधान की भावना के विरुद्ध है। उनका सवाल है कि क्या ये समुदाय आबादी का हिस्सा नहीं हैं।
मौलाना रजवी ने सना मलिक के बयान पर क्या कहा?
मौलाना रजवी ने कहा कि NCP नेता नवाब मलिक की बेटी सना मलिक कुरान शरीफ का संदर्भ सही तरीके से प्रस्तुत नहीं कर पाईं, जिससे विवाद हुआ। बहुविवाह चर्चा में पाकिस्तान का उल्लेख करना उचित नहीं था क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है।
NCERT के आपातकाल अध्याय पर मौलाना का क्या रुख है?
मौलाना रजवी ने NCERT के इस कदम का स्वागत किया और कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की आपत्ति को खारिज किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारत के इतिहास और संस्कृति को जानने का पूरा अधिकार है।
मुहर्रम पर सीएम योगी के बयान पर मौलाना ने क्या कहा?
मौलाना रजवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुहर्रम सुरक्षा बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जहाँ भीड़ और अव्यवस्था की आशंका हो वहाँ सख्ती ज़रूरी है और पूरे उत्तर प्रदेश में मुहर्रम शांतिपूर्ण रहा।
राष्ट्र प्रेस
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