उत्तराखंड यूसीसी के तहत हलाला का पहला मामला: मंत्री खजान दास बोले — मुस्लिम बहनों को मिलेगी पूरी सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद राज्य में 'हलाला' का पहला मामला सामने आया है। हरिद्वार के बुग्गावाला क्षेत्र की एक मुस्लिम महिला ने हलाला के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है, जिसकी चार्जशीट भी आ चुकी है। इस घटनाक्रम ने राज्य में यूसीसी की प्रासंगिकता को केंद्र में ला दिया है।
मंत्री खजान दास की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने इस मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जिस साहस के साथ पीड़ित मुस्लिम महिला ने बिना किसी झिझक और डर के एफआईआर दर्ज कराई, वह सराहनीय है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार हर तरह से उनके साथ खड़ी है और उनकी पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्री दास ने बताया कि उन्होंने हरिद्वार एसएसपी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पीड़िता की सुरक्षा को लेकर बात की है। साथ ही वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष को भी वहाँ जाकर हर संभव मदद करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे स्वयं वहाँ जाएंगे और आर्थिक सहित हर तरह की सहायता उपलब्ध कराएंगे।
यूसीसी का ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में यूसीसी लागू करने का वादा किया था। उत्तराखंड यह कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। मंत्री दास के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रेरणा से मुख्यमंत्री धामी ने इस कानून को क्रियान्वित किया। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भी मुख्यमंत्री धामी की इस पहल की सराहना की है।
मुस्लिम महिलाओं पर असर
मंत्री दास ने कहा कि यह मामला केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है — इससे पूरे देश में एक संदेश जाता है कि मुस्लिम महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए निडर होकर आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि दहेज उत्पीड़न, तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं से पीड़ित महिलाओं को अब न्याय मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में महिला अधिकारों को लेकर व्यापक बहस जारी है।
अन्य राज्यों पर प्रभाव
मंत्री के अनुसार, उत्तराखंड के इस कदम का असर दूसरे राज्यों पर भी पड़ा है और वे भी अपने यहाँ यूसीसी लागू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यूसीसी के क्रियान्वयन की व्यापकता और उसके दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन अभी बाकी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अन्य राज्य किस गति से इस कानून को अपनाते हैं।