नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: पुणे की शिक्षिका मनीषा मांधरे गिरफ्तार, कुलकर्णी-वाघमारे 10 दिन की CBI हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 16 मई 2026: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई तेज़ हो गई है। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मामले के मुख्य साजिशकर्ता पी.वी. कुलकर्णी और उनकी कथित सहयोगी मनीषा वाघमारे को 10 दिनों की CBI हिरासत में भेज दिया है, ताकि पूरे गिरोह के नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इसी मामले में पुणे के मॉडर्न कॉलेज की वरिष्ठ जीवविज्ञान शिक्षिका मनीषा मांधरे की गिरफ्तारी ने शिक्षा जगत में गहरी हलचल मचा दी है।
मुख्य गिरफ्तारियाँ और अदालती कार्रवाई
CBI ने इस घोटाले में अब तक कई गिरफ्तारियाँ की हैं। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पी.वी. कुलकर्णी — जिन्हें जाँचकर्ता इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड मानते हैं — और मनीषा वाघमारे को न्यायिक हिरासत की जगह CBI रिमांड पर भेजा। सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से परीक्षा पेपर लीक करने में सक्रिय था और इसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं।
कॉलेज प्रिंसिपल की प्रतिक्रिया
मॉडर्न कॉलेज की प्रिंसिपल निवेदिता एकबोटे ने कहा, 'मनीषा मांधरे पिछले 24 साल से हमारे जूनियर कॉलेज में कार्यरत हैं। हमने सबसे पहले मीडिया में उनका नाम सुना। CBI के आधिकारिक बयान के बाद हमें बहुत बुरा लगा। नैतिक और चारित्रिक दोनों दृष्टि से हम हैरान हैं। पूरे देश का ध्यान इस मुद्दे पर है, इसलिए हमारे कॉलेज की शिक्षिका का नाम आने से गहरा सदमा लगा है।' उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से पूरे शिक्षण समुदाय को झटका लगा है।
राजनीतिक विरोध और माँगें
महाराष्ट्र के लातूर में एनएसयूआई और युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नीट पेपर लीक घोटाले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों छात्र और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे।
कांग्रेस सांसद शिवाजी कालगे ने कहा, '22 से 24 लाख छात्रों ने मेहनत से परीक्षा दी। माता-पिता दिन-रात मेहनत करते हैं। शिक्षक कड़ी मेहनत करते हैं। कुछ भ्रष्ट लोगों को बचाने के चक्कर में सरकार ने पूरे देश के छात्रों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। हम पूछना चाहते हैं कि इन लाखों छात्रों की क्या गलती है?' कालगे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग भी की।
परीक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
गौरतलब है कि नीट परीक्षा विवाद यह पहली बार नहीं है — 2024 में भी नीट-यूजी पेपर लीक का मामला सामने आया था, जिसने लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर पहले से ही गहरी चिंताएँ हैं। आलोचकों का कहना है कि परीक्षा तंत्र में संरचनात्मक सुधार के बिना महज गिरफ्तारियाँ पर्याप्त नहीं हैं।
आगे क्या होगा
CBI पी.वी. कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे से 10 दिन की हिरासत में पूछताछ कर गिरोह के बाकी सदस्यों की पहचान करने की कोशिश करेगी। सरकार पर दबाव है कि वह 22-24 लाख प्रभावित छात्रों के भविष्य को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश करे। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।