नीट यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने कुलकर्णी और वाघमारे की 14 दिन की कस्टडी मांगी, राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई

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नीट यूजी 2026 पेपर लीक: सीबीआई ने कुलकर्णी और वाघमारे की 14 दिन की कस्टडी मांगी, राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई

सारांश

नीट यूजी 2026 पेपर लीक के कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और सहयोगी मनीषा वाघमारे को सीबीआई ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी ने 14 दिन की कस्टडी मांगी; बचाव पक्ष ने अवैध हिरासत और साक्ष्य की कमी का हवाला देकर विरोध किया। अदालत का फैसला शाम 5 बजे अपेक्षित था।

मुख्य बातें

पीवी कुलकर्णी और मनीषा वाघमारे को पुणे से गिरफ्तार कर राऊज एवेन्यू कोर्ट , नई दिल्ली में पेश किया गया।
सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में 14 दिनों की कस्टडी की मांग की।
जांच एजेंसी के अनुसार मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया और 15 मई को ट्रांजिट रिमांड लिया गया।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि पुणे पुलिस ने मनीषा को 24 घंटे से अधिक अवैध रूप से हिरासत में रखा।
कुलकर्णी के वकील ने अधिकतम 3 दिन की कस्टडी का अनुरोध किया; अदालत का फैसला शाम 5 बजे अपेक्षित था।

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे को शनिवार, 17 मई 2026 को राऊज एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली में पेश किया। दोनों आरोपियों को पुणे से गिरफ्तार किया गया था और जांच एजेंसी ने अदालत से 14 दिनों की कस्टडी की मांग की। कुलकर्णी कथित तौर पर पेशे से केमिस्ट्री के शिक्षक हैं।

अदालत में क्या हुआ

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने दलील दी कि मनीषा वाघमारे, घनजय, कुलकर्णी और मनीषा मांधरे के बीच इस पेपर लीक साजिश में आपसी संपर्क था। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि जांच के सिलसिले में आरोपियों को देश के अन्य हिस्सों में ले जाना होगा, इसलिए लंबी कस्टडी अनिवार्य है।

बचाव पक्ष की दलीलें

मनीषा वाघमारे के वकील ने सीबीआई की कस्टडी मांग का विरोध करते हुए दावा किया कि उनकी मुवक्किल को पुणे पुलिस ने 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। वकील ने यह भी कहा कि मनीषा के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और कार्रवाई केवल कथित डिस्क्लोजर के आधार पर हो रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब मोबाइल फोन पहले से ही सीबीआई के पास है, तो अतिरिक्त कस्टडी की आवश्यकता नहीं है।

पीवी कुलकर्णी के वकील ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि उनके मुवक्किल ने प्रश्नपत्र तैयार भी किया था, तो उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) उनके द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों का चयन करेगी या नहीं। उन्होंने अनुरोध किया कि कस्टडी अधिकतम तीन दिनों तक सीमित रखी जाए।

सीबीआई का पक्ष

बचाव पक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीबीआई ने स्पष्ट किया कि मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था और 15 मई को विधिवत ट्रांजिट रिमांड लिया गया। एजेंसी ने दोहराया कि दोनों आरोपी इस पेपर लीक मामले में सक्रिय भूमिका में रहे हैं।

आगे क्या होगा

अदालत ने कस्टडी मांग पर अपना फैसला उसी दिन शाम 5 बजे सुनाने की बात कही। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट परीक्षा की विश्वसनीयता पर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं और लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर है। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का यह मामला देशभर में व्यापक आक्रोश का कारण बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश के अन्य हिस्सों तक। बचाव पक्ष की 'अवैध हिरासत' की दलील, यदि अदालत में टिकती है, तो जांच की प्रक्रियागत खामियों पर गंभीर सवाल खड़े करेगी। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नीट परीक्षा की पारदर्शिता पर उंगली उठी है — 2024 में भी इसी तरह का विवाद राष्ट्रव्यापी आंदोलन का कारण बना था। असली परीक्षा यह है कि क्या सीबीआई इस बार साजिश की पूरी श्रृंखला — प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर वितरण तक — को अदालत में साबित कर पाती है।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में पीवी कुलकर्णी कौन हैं?
पीवी कुलकर्णी कथित तौर पर पेशे से केमिस्ट्री के शिक्षक हैं, जिन्हें सीबीआई ने नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में कथित मास्टरमाइंड के रूप में पुणे से गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि वे प्रश्नपत्र लीक करने की साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।
सीबीआई ने 14 दिन की कस्टडी क्यों मांगी?
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के सिलसिले में दोनों आरोपियों को देश के अन्य हिस्सों में ले जाना है, इसलिए लंबी कस्टडी आवश्यक है। एजेंसी के अनुसार आरोपियों का आपस में और अन्य संदिग्धों से संपर्क था, जिसकी जांच अभी बाकी है।
मनीषा वाघमारे के वकील ने क्या दलील दी?
मनीषा वाघमारे के वकील ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल को पुणे पुलिस ने 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। उन्होंने यह भी कहा कि मनीषा के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और मोबाइल फोन पहले से ही सीबीआई के पास होने के कारण अतिरिक्त कस्टडी की जरूरत नहीं है।
इस मामले में अदालत का फैसला कब आने की उम्मीद थी?
विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत ने कस्टडी मांग पर उसी दिन शाम 5 बजे फैसला सुनाने की बात कही थी। फैसले में यह तय होना था कि दोनों आरोपियों को कितने दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेजा जाएगा।
नीट पेपर लीक साजिश में कौन-कौन शामिल बताए जा रहे हैं?
सीबीआई के अनुसार इस साजिश में पीवी कुलकर्णी, मनीषा वाघमारे, घनजय और मनीषा मांधरे के बीच आपसी संपर्क था। जांच एजेंसी का दावा है कि ये सभी पेपर लीक की योजना में सक्रिय रूप से शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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