नीट पेपर लीक: मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी समेत दो आरोपी 10 दिन की सीबीआई हिरासत में

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नीट पेपर लीक: मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी समेत दो आरोपी 10 दिन की सीबीआई हिरासत में

सारांश

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने कथित मास्टरमाइंड केमिस्ट्री शिक्षक पीवी कुलकर्णी और सहयोगी मनीषा वाघमारे को पुणे से दबोचा। अदालत ने 10 दिन की हिरासत मंजूर की — जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूरे लीक नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।

मुख्य बातें

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत ने 16 मई 2026 को दोनों आरोपियों को 10 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा।
कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी (केमिस्ट्री शिक्षक) और मनीषा वाघमारे को पुणे से गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई के अनुसार, धनंजय लोखंडे और मनीषा मांधरे भी इस साजिश में शामिल थे और चारों आपस में संपर्क में थे।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि मनीषा वाघमारे को 24 घंटे से अधिक समय तक पुणे पुलिस की अवैध हिरासत में रखा गया।
सीबीआई का कहना है कि पूछताछ से पेपर लीक नेटवर्क के अन्य सदस्यों और साजिश के पूरे तंत्र का खुलासा होने की संभावना है।

नई दिल्ली में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत ने 16 मई 2026 को नीट पेपर लीक मामले के कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी और उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे को 10 दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का आदेश दिया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दोनों आरोपियों को पुणे से गिरफ्तार कर शनिवार को अदालत के समक्ष पेश किया था।

मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका

जांच एजेंसी के अनुसार, केमिस्ट्री के शिक्षक पीवी कुलकर्णी को इस पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। सीबीआई ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा मांधरे — ये चारों आपस में संपर्क में थे और कथित तौर पर इस पेपर लीक साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।

एजेंसी का कहना है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों और साजिश के पूरे तंत्र का खुलासा होने की संभावना है।

सीबीआई ने लंबी हिरासत क्यों मांगी

केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में तर्क दिया कि जांच के सिलसिले में आरोपियों को देश के अन्य हिस्सों में ले जाना आवश्यक है, इसलिए लंबी हिरासत अवधि ज़रूरी है। अदालत ने यह दलील स्वीकार करते हुए 10 दिन की सीबीआई कस्टडी मंजूर की।

बचाव पक्ष की दलीलें

मनीषा वाघमारे की ओर से पेश वकील ने सीबीआई की हिरासत मांग का विरोध किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी मुवक्किल को अवैध तरीके से हिरासत में रखा गया और पुणे पुलिस ने उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक अपनी कस्टडी में रखा। वकील ने यह भी कहा कि मनीषा के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और केवल कथित प्रकटीकरण (disclosure) के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

पीवी कुलकर्णी के वकील ने भी आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया कि यदि उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार किया भी था, तो उन्हें यह ज्ञात नहीं था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) उनके तैयार किए गए प्रश्नों का चयन करेगी या नहीं।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि नीट पेपर लीक मामला देशभर में बड़े विवाद का विषय बना हुआ है, जिसने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 10 दिन की हिरासत के दौरान सीबीआई आरोपियों से पूछताछ कर लीक नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने की कोशिश करेगी। मामले की अगली सुनवाई हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद निर्धारित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी दिशा महत्वपूर्ण है — पहली बार किसी कथित मास्टरमाइंड को सीधे हिरासत में लेकर नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने की कोशिश हो रही है। असली सवाल यह है कि क्या जांच केवल निचले स्तर के ऑपरेटिव तक सीमित रहेगी या प्रश्नपत्र के स्रोत तक पहुँचेगी — यानी NTA की आंतरिक प्रक्रियाओं और संभावित संस्थागत चूक की जांच भी होगी। बचाव पक्ष की 'अवैध हिरासत' की दलील अदालत में जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
RashtraPress
16 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने किसे गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने कथित मास्टरमाइंड और केमिस्ट्री शिक्षक पीवी कुलकर्णी तथा उनकी सहयोगी मनीषा वाघमारे को पुणे से गिरफ्तार किया है। अदालत ने दोनों को 10 दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।
पीवी कुलकर्णी को नीट लीक का मास्टरमाइंड क्यों माना जा रहा है?
जांच एजेंसी के अनुसार, पीवी कुलकर्णी केमिस्ट्री के शिक्षक हैं और कथित तौर पर उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने में भूमिका निभाई। सीबीआई का मानना है कि वे मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे और मनीषा मांधरे के साथ मिलकर पेपर लीक नेटवर्क चला रहे थे।
अदालत ने 10 दिन की हिरासत क्यों मंजूर की?
सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के लिए आरोपियों को देश के अन्य हिस्सों में ले जाना ज़रूरी है और पूछताछ से पेपर लीक नेटवर्क के अन्य सदस्यों का खुलासा हो सकता है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने यह दलील स्वीकार कर 10 दिन की कस्टडी मंजूर की।
मनीषा वाघमारे के वकील ने क्या आपत्ति जताई?
मनीषा वाघमारे के वकील ने दावा किया कि उनकी मुवक्किल को पुणे पुलिस ने 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा और उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वकील के अनुसार, कार्रवाई केवल कथित प्रकटीकरण (disclosure) के आधार पर की जा रही है।
नीट पेपर लीक मामले में आगे क्या होगा?
10 दिन की हिरासत के दौरान सीबीआई आरोपियों से गहन पूछताछ कर लीक नेटवर्क की पूरी श्रृंखला उजागर करने की कोशिश करेगी। हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में अगली सुनवाई होगी, जिसमें आगे की कार्रवाई तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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