नीदरलैंड्स में PM मोदी ने सराही भारतीय संस्कृति, महाराष्ट्र-असम की प्रस्तुतियों को बताया 'यादगार उत्सव'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2025 को नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान द हेग में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और परंपराओं की जीवंत प्रस्तुतियों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक विरासत लगातार नई पहचान बना रही है और दुनिया भर में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।
महाराष्ट्र और असम की सांस्कृतिक छटा
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर महाराष्ट्र की पारंपरिक प्रस्तुतियों की झलक साझा करते हुए लिखा, 'नीदरलैंड्स में आयोजित सामुदायिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र की गौरवशाली संस्कृति जीवंत हो उठी। यह महाराष्ट्र की परंपराओं का यादगार उत्सव था, जो दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही हैं।' इसी क्रम में उन्होंने असम की सांस्कृतिक प्रस्तुति की भी सराहना करते हुए कहा, 'असम की संस्कृति की झलक ने नीदरलैंड्स के सामुदायिक कार्यक्रम में विशेष ऊर्जा भर दी। यह वैश्विक मंच पर असम की सांस्कृतिक भावना का शानदार उदाहरण है।'
भारतीय प्रवासी समुदाय का उत्साह
द हेग में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित भारतीय समुदाय के अपार स्नेह से भावुक हुए मोदी ने लिखा, 'उनकी ऊर्जा और भारत से जुड़ाव बेहद खास है।' उन्होंने प्रवासी भारतीयों को डच समाज में उनके योगदान और भारत-नीदरलैंड्स मित्रता के 'जीवंत सेतु' के रूप में उनकी भूमिका के लिए विशेष रूप से सराहा। गौरतलब है कि सूरीनामी-हिंदुस्तानी समुदाय के भारत से ऐतिहासिक और गहरे संबंध रहे हैं, और प्रधानमंत्री ने पीढ़ियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने के उनके प्रयासों की प्रशंसा की।
यात्रा का रणनीतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार देर रात अपने बहु-देशीय यूरोप दौरे के तहत नीदरलैंड्स पहुंचे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यूरोप में भारत की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और सुदृढ़ करना है। द हेग में डच नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, जल प्रबंधन, कृषि, रक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी।
आर्थिक साझेदारी और भविष्य की संभावनाएँ
अधिकारियों के अनुसार, नीदरलैंड्स यूरोप में भारत का एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश संबंध काफी मजबूत हैं। रॉटरडैम बंदरगाह भारतीय निर्यात के लिए यूरोप का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। इसके अलावा जलवायु कार्रवाई, ग्रीन हाइड्रोजन, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल नवाचार और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को और विस्तार देने पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
आगे की राह
यह यात्रा भारत की व्यापक यूरोप कूटनीति का हिस्सा है, जो सांस्कृतिक संपर्क को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ जोड़ती है। प्रधानमंत्री मोदी की यह यूरोप यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी विदेश नीति को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।