नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: प्रियंका चतुर्वेदी बोलीं — सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरे नेटवर्क पर हो कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) की वरिष्ठ नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 16 मई 2026 को मुंबई में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महज गिरफ्तारियाँ पर्याप्त नहीं हैं — इस पूरे अपराधी नेटवर्क की जड़ों तक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई और परीक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की माँग की।
सिस्टम की विफलता का आरोप
चतुर्वेदी ने कहा कि यह घटना कोई अचानक नहीं हुई — यह सिस्टम की बार-बार दोहराई जाने वाली विफलता है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में भी नीट पेपर लीक का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था, और तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।
उस समय एक सात सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट सुझाव दिया था कि पेन-टू-पेपर परीक्षा बंद कर कंप्यूटर-आधारित परीक्षा प्रणाली अपनाई जाए। चतुर्वेदी के अनुसार, वह रिपोर्ट 'ठंडे बस्ते में' पड़ी रही और उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
छात्रों के भविष्य पर सवाल
चतुर्वेदी ने भावुक होते हुए पूछा कि उन छात्रों का क्या, जिनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया — और उन छात्रों का क्या, जिन्होंने परीक्षा के दबाव में अपनी जान गँवा दी। उन्होंने कहा, 'हम बच्चों को यह भरोसा क्यों नहीं दे पा रहे कि परीक्षा फुलप्रूफ होगी और पेपर लीक नहीं होंगे?'
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लाखों मेडिकल अभ्यर्थी नीट-यूजी की तैयारी में वर्षों लगाते हैं। गौरतलब है कि यह 2024 के बाद दूसरी बड़ी नीट पेपर लीक घटना है, जो परीक्षा सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
एसआईआर प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
चतुर्वेदी ने स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान विपक्षी समर्थकों को मतदाता सूची से हटाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जो इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करती हैं।
उन्होंने माँग की कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और किसी भी वैध मतदाता का मताधिकार न छीना जाए। उन्होंने पूछा कि यदि यह प्रक्रिया फुलप्रूफ नहीं है, तो इसकी जवाबदेही कौन लेगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शिक्षा नीति विश्लेषकों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा केंद्रों पर निगरानी तंत्र की कमज़ोरियाँ बार-बार उजागर होती रही हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली का डिजिटलीकरण और केंद्रीकृत निगरानी नहीं होती, तब तक लीक का सिलसिला थमना मुश्किल है।
आगे क्या होगा
फिलहाल जाँच एजेंसियाँ गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुँचने की कोशिश कर रही हैं। चतुर्वेदी की माँग है कि जाँच का दायरा केवल गिरफ्तारियों तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे तंत्र — प्रश्नपत्र छपाई से लेकर वितरण तक — की जाँच हो। अब देखना होगा कि सरकार 2024 की समिति की रिपोर्ट पर कब और कैसे अमल करती है।