आजम खान को 'तनखैया' टिप्पणी मामले में एमपी-एमएलए अदालत ने सुनाई 2 साल की सजा, भाजपा बोली — कानून से ऊपर कोई नहीं

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आजम खान को 'तनखैया' टिप्पणी मामले में एमपी-एमएलए अदालत ने सुनाई 2 साल की सजा, भाजपा बोली — कानून से ऊपर कोई नहीं

सारांश

2019 लोकसभा चुनाव प्रचार की विवादित 'तनखैया' टिप्पणी के मामले में सपा नेता आजम खान को एमपी-एमएलए अदालत ने 2 साल की सजा सुनाई। भाजपा ने इसे कानून की जीत बताया, सपा ने राजनीतिक साजिश। यह खान के खिलाफ दर्ज कई मामलों में एक और दोषसिद्धि है।

मुख्य बातें

आजम खान को एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 16 मई 2025 को 2 साल की कारावास की सजा सुनाई।
मामला 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक सरकारी अधिकारी के विरुद्ध की गई 'तनखैया' टिप्पणी से जुड़ा है।
चुनाव प्रचार के दौरान आजम खान पर 48 घंटे और 72 घंटे के प्रचार प्रतिबंध भी लगाए जा चुके थे।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्री अनिल राजभर सहित भाजपा नेताओं ने फैसले का स्वागत किया।
सपा ने इस फैसले को 'राजनीतिक साजिश' करार दिया; अपील की संभावना बनी हुई है।
आजम खान पर पहले भी हेट स्पीच सहित कई आपराधिक मामलों में सजा हो चुकी है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान को 16 मई 2025 को एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक सरकारी अधिकारी के विरुद्ध की गई विवादित 'तनखैया' टिप्पणी के मामले में दो वर्ष की कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा के साथ-साथ आजम खान पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के तत्काल बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इसे 'कानून की जीत' करार दिया, जबकि सपा ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह प्रकरण 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान का है, जब आजम खान ने एक सरकारी अधिकारी के बारे में आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की थी। उस समय चुनाव आयोग ने उन पर 48 घंटे और बाद में 72 घंटे के प्रचार प्रतिबंध भी लगाए थे। लंबी सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।

गौरतलब है कि आजम खान पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और कुछ मामलों में उन्हें सजा भी हो चुकी है। हेट स्पीच से जुड़े अन्य प्रकरणों में भी वे दोषी ठहराए जा चुके हैं।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'हम सभी अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं। यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो कानून-व्यवस्था से छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं।'

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा, 'यह सजा तो होनी ही थी। आजम खान पूरे समाज, व्यवस्था, प्रशासन, शासन और सरकार को अपने से नीचे समझते थे। वे अहंकार और घमंड से भरे हुए थे। उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर को जमीन माफिया और भारत माता को चुड़ैल कहा और अधिकारियों से अपने पीछे सफाई करवाने की मानसिकता रखते थे।'

भाजपा विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने कहा, 'आज के फैसले ने पूरे देश को साफ संदेश दिया है कि हर नेता को किसी भी अधिकारी के बारे में बोलने से पहले दो बार सोचना चाहिए। ऐसी भाषा का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए।'

सपा का रुख

समाजवादी पार्टी ने इस फैसले को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए इसे 'राजनीतिक साजिश' की संज्ञा दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि आजम खान को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से अपील की आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है।

आगे क्या होगा

दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर विधायकी योग्यता पर भी प्रश्न उठ सकता है, हालांकि यह उच्च न्यायालय में संभावित अपील के परिणाम पर निर्भर करेगा। आजम खान के कानूनी सलाहकारों से अपील दायर करने की संभावना है। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजम खान को किस मामले में सजा मिली है?
आजम खान को 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक सरकारी अधिकारी के विरुद्ध की गई विवादित 'तनखैया' टिप्पणी के मामले में एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने 2 साल की कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर जुर्माना भी लगाया है।
भाजपा ने इस फैसले पर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह फैसला कानून-व्यवस्था से छेड़छाड़ करने वालों के लिए कड़ा संदेश है। मंत्री अनिल राजभर और विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने भी फैसले का स्वागत करते हुए इसे 'अनिवार्य' बताया।
सपा ने इस फैसले पर क्या रुख अपनाया है?
समाजवादी पार्टी ने इस फैसले को राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि आजम खान को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। अपील दायर करने की संभावना बनी हुई है।
क्या आजम खान पर पहले भी इस तरह के मामले रहे हैं?
हाँ, आजम खान पर पहले भी हेट स्पीच सहित कई आपराधिक मामले दर्ज हैं और कुछ में उन्हें सजा भी हो चुकी है। 2019 के इसी प्रचार दौरान चुनाव आयोग ने उन पर 48 घंटे और 72 घंटे के प्रचार प्रतिबंध भी लगाए थे।
इस सजा का आजम खान की विधायकी पर क्या असर पड़ेगा?
दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत विधायकी योग्यता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, यह उच्च न्यायालय में संभावित अपील और उस पर स्थगन आदेश के परिणाम पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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