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आजम खान और अब्दुल्ला आजम को कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, सत्र न्यायालय ने खारिज की याचिका

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आजम खान और अब्दुल्ला आजम को कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, सत्र न्यायालय ने खारिज की याचिका

सारांश

रामपुर की सत्र न्यायालय ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें जेल में रहने का आदेश दिया। जानिए इस मामले की पूरी जानकारी।

मुख्य बातें

आजम खान और अब्दुल्ला आजम की याचिकाएं खारिज हुईं।
सत्र न्यायालय ने उन्हें जेल में रहने का आदेश दिया।
भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने शिकायत की थी।
उनके खिलाफ जाली दस्तावेजों का मामला है।
सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी।

रामपुर, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख नेता आजम खान और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को न्यायालय से एक बड़ा झटका मिला है। न्यायालय ने उनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें जेल में रहने का आदेश दिया है।

रामपुर की सेशन कोर्ट में आजम खान और अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो पैन कार्ड और दो पासपोर्ट मामलों की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने उनकी अपील को खारिज कर दिया। इससे पहले एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाई थी। आजम और उनके बेटे ने इस सजा के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील की थी।

इस मामले में भाजपा नेता और विधायक आकाश सक्सेना ने साल 2019 में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड बनवाए। इस जांच में आजम खान को भी आरोपी माना गया।

लंबी सुनवाई के बाद, रामपुर एमपी-एमएलए कोर्ट ने 17 नवंबर, 2025 को आजम खान और अब्दुल्ला को दोषी ठहराते हुए दोनों को 7-7 साल की कैद और प्रत्येक पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। इसके बाद से दोनों जेल में बंद हैं।

इसके बाद, दोनों ने सत्र न्यायालय में अपनी सजा को चुनौती दी। सुनवाई 6 अप्रैल, 2026 को समाप्त हुई और न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रखते हुए 20 अप्रैल को सुनवाई की तारीख तय की थी।

इस मामले में अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की थी कि पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों का उपयोग करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। हालांकि, न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

इससे पहले, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अब्दुल्ला आजम की एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि जाली जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना और बाद में पासपोर्ट लेना ‘अलग-अलग कृत्य’ हैं।

अब्दुल्ला आजम को इससे पहले एक अन्य मामले में जाली दस्तावेजों के उपयोग से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि पासपोर्ट उसी जाली प्रमाण पत्र के आधार पर जारी किया गया था, इसलिए बाद में मुकदमा चलाना दोहरी सजा के बराबर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें राजनीतिक नेताओं की भूमिका और उनके खिलाफ उठाए गए कदमों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। न्यायालय का निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे व्यक्ति कितनी भी शक्ति या प्रतिष्ठा रखता हो।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजम खान और अब्दुल्ला आजम को किस मामले में सजा मिली?
उन्हें दो पैन कार्ड और दो पासपोर्ट मामलों में सजा मिली है।
सत्र न्यायालय ने उनकी याचिका क्यों खारिज की?
सत्र न्यायालय ने उनके द्वारा प्रस्तुत याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिससे उन्हें जेल में रहना पड़ा।
क्या अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी?
हाँ, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जाली दस्तावेजों के आरोप को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी।
इस मामले में किसने शिकायत दर्ज कराई थी?
भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी।
सजा का परिणाम क्या था?
दोनों को 7-7 साल की कैद और 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया।
राष्ट्र प्रेस
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