अब्दुल्ला आजम खान दो पासपोर्ट मामले में बरी, अपीलीय कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
रामपुर की स्पेशल जज सांसद-विधायक अपीलीय अदालत ने समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के पुत्र और पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को दो पासपोर्ट मामले में बरी कर दिया है। अदालत ने निचली ट्रायल कोर्ट द्वारा 5 मार्च 2025 को सुनाई गई सात वर्ष की सजा को पलटते हुए यह राहत दी। इस फैसले पर सपा ने खुशी जाहिर करते हुए इसे न्यायिक व्यवस्था की जीत बताया है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
अधिवक्ता नासिर सुल्तान के अनुसार, इस मामले की जड़ें 2019 में हैं, जब रामपुर के सिविल लाइंस थाने में तत्कालीन एवं मौजूदा सादर विधायक आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम खान ने अलग-अलग समय पर दो पासपोर्ट बनवाए और उनमें भिन्न जन्मतिथियों का उपयोग किया, जिन्हें पहचान-प्रमाण के रूप में कई जगह इस्तेमाल किया गया।
मामला ट्रायल सांसद-विधायक स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट, रामपुर में चला। लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने 5 मार्च 2025 को अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध अपील दायर की गई, जो स्पेशल जज सांसद-विधायक कोर्ट में सुनी गई और अब अपीलीय अदालत ने निचली अदालत का निर्णय पलट दिया।
बचाव पक्ष का तर्क
अधिवक्ता नासिर सुल्तान ने दावा किया कि मामला शुरू से ही तथ्यात्मक रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। उनके अनुसार वास्तव में दो अलग पासपोर्ट नहीं थे, बल्कि एक ही पासपोर्ट में जन्मतिथि का सुधार कराया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि 2018 में जमा किए गए दस्तावेजों की पूरी जाँच पासपोर्ट कार्यालय द्वारा की गई थी और जाँच के बाद ही पासपोर्ट जारी किया गया था। पासपोर्ट अधिकारी ने भी अदालत में बयान दिया कि प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी हुई थी।
सपा की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'समाजवादी पार्टी अदालत के इस फैसले का स्वागत करती है। पार्टी का मानना है कि पासपोर्ट और पैन कार्ड से जुड़े मामलों सहित कई केस, एक ही मुद्दे पर बार-बार दायर किए गए थे। आजम खान, अब्दुल्ला आजम और उनके परिवार पर कई तरह के आरोप लगाए गए थे — ऐसे मामले अदालत में टिक नहीं पाएंगे। जब भी ऐसे मामले अदालतों तक पहुंचेंगे तो न्याय की ही जीत होगी, क्योंकि देश की न्यायिक व्यवस्था बहुत मजबूत है।'
अभी भी एक मामला लंबित
हालाँकि राहत आंशिक है। बचाव पक्ष के वकीलों के अनुसार, पैन कार्ड से जुड़ा एक और मामला अभी भी लंबित है, जिसमें पहले अपील खारिज हो चुकी है। अब इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दायर किए जाने की तैयारी है। जब तक इस मामले में भी कोई अंतिम राहत नहीं मिलती, तब तक अब्दुल्ला आजम खान की पूर्ण रिहाई का रास्ता साफ नहीं होगा। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में आजम खान परिवार के खिलाफ दर्ज मुकदमों की लंबी श्रृंखला का हिस्सा है, जिस पर विपक्ष लगातार राजनीतिक उत्पीड़न का आरोप लगाता रहा है।