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आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा, एमपी-एमएलए कोर्ट ने बढ़ाई सजा और जुर्माना

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आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा, एमपी-एमएलए कोर्ट ने बढ़ाई सजा और जुर्माना

सारांश

रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान की दो पैन कार्ड मामले में सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी और जुर्माना ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹5 लाख किया। बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा 7 साल बरकरार, लेकिन जुर्माना बढ़कर ₹3.50 लाख हुआ।

मुख्य बातें

एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट, रामपुर ने 23 मई 2026 को आजम खान की सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी।
आजम खान पर जुर्माना ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹5 लाख किया गया।
बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा 7 साल बरकरार, लेकिन जुर्माना बढ़ाकर लगभग ₹3.50 लाख किया गया।
मामला वर्ष 2019 में BJP विधायक आकाश कुमार सक्सेना की शिकायत पर रामपुर की सिविल लाइन कोतवाली में दर्ज हुआ था।
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को दोषी ठहराया था; आजम खान की अपील 20 अप्रैल 2026 को खारिज हो चुकी थी।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान की कानूनी मुश्किलें शनिवार, 23 मई 2026 को और गहरी हो गईं, जब रामपुर की एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने दो पैन कार्ड रखने के मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा पहले तय की गई 7 साल की सजा को बढ़ाकर 10 साल कर दिया। साथ ही अदालत ने जुर्माने की राशि भी पहले के ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी।

कोर्ट का फैसला: क्या बदला

अभियोजन पक्ष की वकील सीमा राणा ने बताया कि एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी और उन पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया गया। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा 7 साल बरकरार रखी गई, लेकिन उन पर जुर्माना बढ़ाकर लगभग ₹3.50 लाख कर दिया गया। इससे पहले निचली अदालत ने दोनों पर ₹50-50 हजार का जुर्माना लगाया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला वर्ष 2019 में रामपुर की सिविल लाइन कोतवाली में दर्ज किया गया था। मुकदमा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने दर्ज कराया था। 17 नवंबर 2025 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को दोषी करार दिया और 7-7 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 19 नवंबर 2025 को आजम खान ने सजा के खिलाफ अपील दायर की, जिसे 20 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया गया। गौरतलब है कि सजा बढ़ाने की अपील अभियोजन पक्ष की ओर से की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

BJP विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 'दो पैन कार्ड के मामले में यह ऐतिहासिक फैसला है। यह अपने आप में अनोखा फैसला है क्योंकि इस मामले में सजा बढ़ाने की अपील की गई थी और सजा बढ़ाई भी गई।' उन्होंने यह भी कहा कि अब्दुल्ला आजम की सजा बरकरार रखी गई है और उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।

आजम खान पर मुकदमों का बोझ

यह ऐसे समय में आया है जब आजम खान पहले से ही कई अन्य मामलों में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। रामपुर से कई बार विधायक और सांसद रहे आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में से एक माने जाते हैं। दो पैन कार्ड रखने का यह मामला उनके खिलाफ दर्ज दर्जनों मुकदमों में से एक है।

आगे क्या होगा

एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिली तो यह फैसला उनकी राजनीतिक गतिविधियों पर भी असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर नई सजा उनकी राजनीतिक वापसी की संभावना को और संकुचित करती है। सवाल यह है कि क्या यह न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रूप से चल रही है या राजनीतिक दबाव का कोई प्रतिबिंब है — इसका जवाब उच्च न्यायालय की सुनवाई में मिलेगा। समाजवादी पार्टी के लिए यह फैसला उत्तर प्रदेश में उनके सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे की प्रासंगिकता पर एक और प्रश्नचिह्न है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आजम खान के दो पैन कार्ड मामले में क्या फैसला आया?
एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट, रामपुर ने 23 मई 2026 को आजम खान की सजा 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी और जुर्माना ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹5 लाख किया। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की सजा 7 साल बरकरार रखी गई लेकिन जुर्माना बढ़ाकर लगभग ₹3.50 लाख कर दिया गया।
दो पैन कार्ड का मामला कब और कैसे दर्ज हुआ?
यह मामला वर्ष 2019 में रामपुर की सिविल लाइन कोतवाली में दर्ज किया गया था। BJP विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने यह मुकदमा दर्ज कराया था। 17 नवंबर 2025 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी।
आजम खान की सजा के खिलाफ अपील का क्या हुआ?
आजम खान ने 19 नवंबर 2025 को सजा के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे 20 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद अभियोजन पक्ष की ओर से सजा बढ़ाने की अपील की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
अब आजम खान के पास क्या कानूनी विकल्प बचे हैं?
एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट के फैसले के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकते हैं। यदि वहाँ से राहत नहीं मिली तो यह फैसला उनकी राजनीतिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकता है।
BJP ने इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
BJP विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने इस फैसले को 'ऐतिहासिक' बताते हुए स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सजा बढ़ाने की अपील की गई थी और कोर्ट ने उसे स्वीकार कर सजा बढ़ाई — यह अपने आप में अनोखा फैसला है।
राष्ट्र प्रेस
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