अब्दुल्ला आजम को बड़ी राहत: रामपुर कोर्ट ने नकली पासपोर्ट मामले में 7 साल की सजा रद्द की
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को शुक्रवार, 29 मई 2026 को नकली पासपोर्ट मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली। रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दिसंबर 2025 में सुनाई गई सात साल की सजा को पलट दिया और उन्हें आरोपों से बरी कर दिया। हालाँकि, अन्य लंबित मामलों के चलते अब्दुल्ला की जेल से रिहाई फिलहाल संभव नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 30 जुलाई 2019 का है, जब सदर इलाके के तत्कालीन विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में अब्दुल्ला आजम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला ने अपने नाम पर दो पासपोर्ट बनवाए, जिनमें जन्मतिथियाँ अलग-अलग दर्ज थीं, और इन दस्तावेजों का उपयोग कर कथित तौर पर लोगों को धोखा दिया।
मामले की जाँच स्पेशल मजिस्ट्रेट स्तर पर की गई। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2025 में अब्दुल्ला को दोषी ठहराते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
अदालत का फैसला
ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए अब्दुल्ला आजम ने रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में आपराधिक अपील दायर की। अब्दुल्ला के वकील नासिर सुल्तान ने बताया कि एमपी-एमएलए कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि आदेश को निरस्त कर दिया और उन्हें इस मामले में बरी घोषित किया।
जेल से रिहाई अभी दूर
वकील नासिर सुल्तान ने स्पष्ट किया कि इस राहत के बावजूद अब्दुल्ला को जेल में ही रहना होगा। उनके अनुसार, पैन कार्ड से जुड़ा एक अन्य मामला अभी भी लंबित है, जिसमें ऊपरी अदालत में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर करनी होगी। इसके अलावा कई अन्य मामलों में अदालतों के फैसले आना बाकी हैं।
उल्लेखनीय है कि अब्दुल्ला एक नकली आधार कार्ड उपयोग के मामले में पिछले वर्ष गिरफ्तार हुए थे। उनके पिता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान भी इस समय रामपुर जेल में बंद हैं।
राजनीतिक और कानूनी संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब आजम खान परिवार के खिलाफ कई मुकदमे विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। गौरतलब है कि सपा के इस वरिष्ठ नेता के परिवार पर दशकों से राजनीतिक और कानूनी दबाव बना हुआ है। एमपी-एमएलए कोर्ट का यह फैसला परिवार के लिए आंशिक राहत है, लेकिन लंबित मामलों की लंबी सूची को देखते हुए यह राहत सीमित है।
आगे क्या होगा
वकील नासिर सुल्तान के अनुसार, पैन कार्ड मामले में ऊपरी अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जब तक सभी लंबित मामलों में अनुकूल निर्णय नहीं आते, अब्दुल्ला आजम की रिहाई संभव नहीं है।