14 जुलाई 2026
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ओडिशा में 'ज्ञानोदय योजना' लागू: केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा, गाइडलाइंस जारी

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ओडिशा में 'ज्ञानोदय योजना' लागू: केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा, गाइडलाइंस जारी

सारांश

ओडिशा ने 'ज्ञानोदय – शिक्षारु समृद्धि' योजना के दिशा-निर्देश जारी कर केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा का रास्ता खोल दिया है। सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में एडमिशन व डेवलपमेंट फीस राज्य सरकार वहन करेगी। मंत्री का दावा है कि ओडिशा यह कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य है।

मुख्य बातें

उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने 14 जुलाई को 'ज्ञानोदय – शिक्षारु समृद्धि' योजना के दिशा-निर्देश जारी किए।
योजना सरकारी कॉलेजों, पब्लिक विश्वविद्यालयों और 488 व 662 ग्रांट-इन-एड श्रेणी के सहायता प्राप्त कॉलेजों में रेगुलर UG व PG कोर्स पर लागू होगी।
राज्य सरकार एडमिशन, री-एडमिशन और डेवलपमेंट फीस का वहन करेगी; परीक्षा शुल्क छात्रों को देना होगा।
लाभ के लिए SAMS पोर्टल पर पंजीकरण और न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य; विशेष मामलों में 65% तक छूट।
MBA, MCA, BBA, BCA, BEd, LLB, LLM जैसे प्रोफेशनल और सेल्फ-फाइनेंस कोर्स योजना के दायरे से बाहर।
लक्ष्य: ओडिशा विजन 2036 व 2047 के तहत राज्य का GER 60 प्रतिशत तक बढ़ाना।

ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने मंगलवार, 14 जुलाई को भुवनेश्वर में 'ज्ञानोदय – शिक्षारु समृद्धि' योजना के क्रियान्वयन के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए। इस योजना के तहत किंडरगार्टन (केजी) से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट (पीजी) स्तर तक की शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क की जाएगी। मंत्री सूर्यवंशी ने दावा किया कि ओडिशा यह योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

मंत्री सूर्यवंशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार संभालने के बाद राज्य सरकार तीन प्रमुख समस्याओं को लेकर सबसे अधिक चिंतित थी — राज्य में बढ़ती ड्रॉपआउट दर, ओडिशा के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) का राष्ट्रीय औसत से नीचे रहना, और आर्थिक तंगी के कारण छात्रों का पढ़ाई बीच में छोड़ना। उन्होंने कहा कि इन्हीं समस्याओं के समाधान के रूप में यह निर्णय लिया गया कि उच्च शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा में आर्थिक बाधाओं को दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

किन संस्थानों और कोर्स पर लागू होगी योजना

दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य के पब्लिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और 488 व 662 ग्रांट-इन-एड श्रेणी के गैर-सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में रेगुलर अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। राज्य सरकार एडमिशन फीस, री-एडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस और प्रवेश के समय लिए जाने वाले अन्य शुल्क का वहन करेगी। हालाँकि, परीक्षाओं की गंभीरता बनाए रखने के उद्देश्य से छात्रों को परीक्षा शुल्क स्वयं देना होगा।

योजना के दायरे से बाहर क्या है

यह योजना सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स, बिना सहायता वाले निजी संस्थानों, डिस्टेंस और ओपन लर्निंग कार्यक्रमों तथा एमबीए, एमसीए, बीबीए, बीसीए, बीएड, एलएलबी, एलएलएम जैसे प्रोफेशनल कोर्स पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा पीपीपी-मोड वाले कोर्स भी इस योजना के दायरे से बाहर हैं।

पात्रता और शर्तें

योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रों को स्टूडेंट एकेडमिक मैनेजमेंट सिस्टम (SAMS) पोर्टल के माध्यम से दाखिला लेना अनिवार्य होगा। साथ ही न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखना जरूरी है, हालाँकि विशेष परिस्थितियों में यह सीमा 65 प्रतिशत तक कम की जा सकती है। यह लाभ किसी छात्र को UG या PG प्रोग्राम में पहली बार प्रवेश लेने पर ही मिलेगा। गौरतलब है कि सरकार ने फीस रेगुलेशन सिस्टम भी लागू किया है, जिसके तहत संस्थान स्टेट फीस रेगुलेशन कमिटी की मंजूरी के बिना एडमिशन से जुड़ी फीस में बदलाव नहीं कर सकते।

दीर्घकालिक लक्ष्य

मंत्री सूर्यवंशी ने भरोसा जताया कि यह पहल ओडिशा विजन 2036 और विजन 2047 के तहत राज्य के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 60 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में सहायक सिद्ध होगी। ये दिशा-निर्देश राज्यभर के उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के साथ साझा किए जाएंगे। आने वाले शैक्षणिक सत्र में इस योजना का व्यापक असर ओडिशा के लाखों विद्यार्थियों पर पड़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। राज्य का GER राष्ट्रीय औसत से पहले से नीचे है और ड्रॉपआउट की समस्या केवल फीस तक सीमित नहीं — परिवहन, छात्रावास और आजीविका का दबाव भी बड़े कारण हैं, जिन्हें यह योजना संबोधित नहीं करती। MBA, LLB जैसे व्यावसायिक कोर्स को बाहर रखना उन छात्रों को वंचित करता है जो रोज़गार-केंद्रित शिक्षा चाहते हैं। 488 और 662 ग्रांट-इन-एड कॉलेजों की फीस-प्रतिपूर्ति का बोझ राज्य के बजट पर कितना पड़ेगा, इसका ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है — और यही वह बिंदु है जहाँ योजना की दीर्घकालिक व्यवहार्यता तय होगी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा की 'ज्ञानोदय योजना' क्या है?
'ज्ञानोदय – शिक्षारु समृद्धि' योजना ओडिशा सरकार की वह पहल है जिसके तहत केजी से पीजी स्तर तक की शिक्षा निःशुल्क की जाएगी। इसके दिशा-निर्देश 14 जुलाई को उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने जारी किए।
इस योजना का लाभ किन छात्रों को मिलेगा?
सरकारी कॉलेजों, पब्लिक विश्वविद्यालयों और 488 व 662 ग्रांट-इन-एड श्रेणी के सहायता प्राप्त कॉलेजों में रेगुलर UG या PG प्रोग्राम में पहली बार दाखिला लेने वाले छात्र इस योजना के पात्र हैं। SAMS पोर्टल पर पंजीकरण और न्यूनतम 75% उपस्थिति अनिवार्य है।
योजना के तहत कौन-सी फीस माफ होगी और कौन-सी नहीं?
राज्य सरकार एडमिशन फीस, री-एडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस और प्रवेश के समय लिए जाने वाले अन्य शुल्क का वहन करेगी। हालाँकि परीक्षा शुल्क छात्रों को स्वयं देना होगा।
कौन-से कोर्स इस योजना के दायरे से बाहर हैं?
MBA, MCA, BBA, BCA, BEd, LLB, LLM जैसे प्रोफेशनल कोर्स, सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स, पीपीपी-मोड कार्यक्रम, बिना सहायता वाले निजी संस्थान और डिस्टेंस व ओपन लर्निंग प्रोग्राम इस योजना के लाभ से वंचित रहेंगे।
ओडिशा सरकार का इस योजना से दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
सरकार का लक्ष्य ओडिशा विजन 2036 और विजन 2047 के तहत राज्य के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 60 प्रतिशत तक बढ़ाना है। साथ ही ड्रॉपआउट दर घटाना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना भी प्रमुख उद्देश्य हैं।
राष्ट्र प्रेस
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