पश्चिम एशिया तनाव के बीच जयशंकर की खाड़ी यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा रही केंद्र में: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हाल ही में संपन्न कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान की आधिकारिक यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा चर्चाओं का एक अहम हिस्सा रही। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएँ उभरी हैं।
यात्रा का दायरा और मुख्य घटनाक्रम
जयशंकर 5 से 10 जुलाई के बीच इन चारों खाड़ी देशों की आधिकारिक यात्रा पर थे। जायसवाल ने बताया कि उन्होंने प्रत्येक देश के शीर्ष नेतृत्व और अपने समकक्ष विदेश मंत्रियों से विस्तृत बातचीत की, जिसमें व्यापार, ऊर्जा और निवेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। जायसवाल ने स्पष्ट किया, 'ऊर्जा बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। इसके अलावा पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।'
होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा आपूर्ति की चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और यह दुनिया के सबसे रणनीतिक ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का निर्यात इसी मार्ग से भारत सहित एशिया और विश्व के अन्य देशों तक पहुँचता है। रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य हमलों की खबरें आईं, और इससे पहले तेहरान की ओर से इस जलमार्ग से गुजर रहे जहाजों पर हमले की सूचना मिली थी। इन घटनाओं ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को धुंधला किया है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
देशवार द्विपक्षीय बैठकें
ओमान में जयशंकर ने विदेश मंत्री सैयद बद्र अलबुसैदी से मुलाकात की और भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी के सभी पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान भारतीय नाविकों की सहायता के लिए ओमान का धन्यवाद भी किया।
कुवैत में जयशंकर ने क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह, प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह, रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह और विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह से अलग-अलग बैठकें कीं। MEA के अनुसार इन चर्चाओं में भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
बहरीन में 6 और 7 जुलाई की दो दिवसीय यात्रा के दौरान जयशंकर ने राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात की, जिसमें क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा भी उपस्थित रहे। उन्होंने उप प्रधानमंत्री शेख खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा और विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायनी से भी बातचीत की। जयशंकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ दीं और बहरीन में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहाँ के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।
कतर में जयशंकर ने विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क पर केंद्रित द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की। जयशंकर ने अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए कतर की सराहना भी की।
क्यों मायने रखती है यह यात्रा
यह यात्रा ऐसे नाजुक भू-राजनीतिक दौर में हुई है जब पश्चिम एशिया में अस्थिरता भारत की ऊर्जा आयात श्रृंखला को सीधे प्रभावित कर सकती है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, और इस क्षेत्र में लाखों भारतीय प्रवासी भी कार्यरत हैं। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव चरम पर है, जो भारतीय ऊर्जा कूटनीति की तात्कालिकता को रेखांकित करती है।
आगे की राह
MEA ने संकेत दिया कि खाड़ी देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा और निवेश पर बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा। क्षेत्रीय तनाव के बीच वैकल्पिक ऊर्जा मार्गों और आपूर्ति विविधीकरण पर भारत का ध्यान आने वाले महीनों में कूटनीतिक एजेंडे पर केंद्रित रहने की उम्मीद है।