भारत खाड़ी संकट के बीच तेल-गैस आयात में विविधता ला रहा है: विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के बीच भारत अपने तेल और गैस आयात के स्रोतों में व्यापक विविधता ला रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित रह सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 29 मई को यह जानकारी दी। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच चुकी हैं।
सरकार का रुख और नीति
जायसवाल ने कहा, 'हमारे लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। हम दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं और फिलहाल यही हमारी नीति है। दुनिया के विभिन्न बाज़ारों से जो भी सहयोग मिलेगा, उसका हम स्वागत करेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फारस की खाड़ी में मौजूद 14 भारतीय जहाज पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर भारत वापस लौट चुके हैं, जबकि 11 भारतीय झंडे वाले जहाज अभी भी उस क्षेत्र में फँसे हुए हैं।
वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख
भारतीय तेल कंपनियाँ अब रूस के अलावा अफ्रीकी देशों — विशेष रूप से नाइजीरिया और अंगोला — से भी तेल की खरीद बढ़ा रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, कच्चे तेल की खरीद से जुड़े फैसले मुख्य रूप से व्यावसायिक ज़रूरतों और पर्याप्त आपूर्ति उपलब्धता के आधार पर लिए जा रहे हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और दीर्घकालिक समझौतों के ज़रिए पर्याप्त मात्रा पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है।
रूसी तेल आयात: रिकॉर्ड की ओर
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत, सस्ते दामों का लाभ उठाने के लिए रूस से तेल खरीद में तेज़ी से बढ़ोतरी कर चुका है। डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आँकड़ों के अनुसार, मई में भारत का रूसी तेल आयात करीब रिकॉर्ड स्तर 19 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँच सकता है। इससे घरेलू रिफाइनरियों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के असर को संभालने में मदद मिली है।
अमेरिकी प्रतिबंधों का असर
हाल के महीनों में अमेरिका ने रूस की कुछ प्रमुख कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जिनमें बड़े कच्चा तेल सप्लायर रोसनेफ्ट और लुकोइल शामिल थे। इसके अलावा कुछ जहाज़ों और वित्तीय चैनलों पर भी पाबंदियाँ लगाई गई थीं। इन प्रतिबंधों के कारण पिछले साल कुछ समय के लिए भारतीय खरीद में कमी आई थी, लेकिन बाद में मिली राहत के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी।
वैश्विक बाज़ार पर भारत का प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की ओर से रूसी तेल की बड़े पैमाने पर खरीद ने वैश्विक बाज़ार में माँग का दबाव कम करके तेज़ी से बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने में भी भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि यह विविधीकरण रणनीति भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो किसी एक क्षेत्र या आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता से बचने पर केंद्रित है। आने वाले हफ्तों में होर्मुज की स्थिति और अमेरिकी प्रतिबंधों की दिशा भारत की ऊर्जा रणनीति को और आकार देगी।