जयशंकर-अलबुसैदी मस्कट वार्ता: व्यापार, रक्षा, साइबर और हॉर्मुज समुद्री सुरक्षा पर सहमति
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 जुलाई 2026 को मस्कट में ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह बैठक भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।
बैठक में क्या हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, समुद्री क्षेत्र, तकनीक, रक्षा, साइबर और AI सहित सहयोग के व्यापक क्षेत्रों पर विस्तार से विचार साझा किए। खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों पर भी गहन चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हमारी बातचीत ने भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी में भरोसे और मजबूती को दिखाया।'
भारतीय नाविकों की सहायता के लिए ओमान का आभार
MEA के अनुसार, जयशंकर ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान भारतीय समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) को त्वरित सहायता पहुँचाने के लिए ओमान सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। यह संदर्भ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।
ओमानी विदेश मंत्री का बयान
अलबुसैदी ने एक्स पर लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक प्रयासों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। उन्होंने कहा, 'ओमान-भारत के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंधों ने दोनों देशों के लोगों को जोड़ा है और आज भी हमारी साझेदारी को मजबूत आधार देते हैं।' उन्होंने भारत के समर्थन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
भारतीय समुदाय से मुलाकात
बैठक से पहले जयशंकर ने ओमान में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और भारत-ओमान संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रवासी भारतीयों की रुचि और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव
गौरतलब है कि जयशंकर कुवैत की यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को ओमान पहुँचे। ओमान उनकी छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव है। इसके बाद वे न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स की यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और भारत अपने समुद्री व ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कूटनीति पर जोर दे रहा है।