10 जुलाई 2026
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जयशंकर-अलबुसैदी मस्कट वार्ता: व्यापार, रक्षा, साइबर और हॉर्मुज समुद्री सुरक्षा पर सहमति

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जयशंकर-अलबुसैदी मस्कट वार्ता: व्यापार, रक्षा, साइबर और हॉर्मुज समुद्री सुरक्षा पर सहमति

सारांश

जयशंकर की मस्कट यात्रा महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं थी — हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ओमान के साथ व्यापार, रक्षा, साइबर और AI सहयोग पर ठोस सहमति बनाई। सदियों पुराने समुद्री रिश्ते अब रणनीतिक साझेदारी की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 10 जुलाई 2026 को मस्कट में ओमानी विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से द्विपक्षीय वार्ता की।
बैठक में व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, रक्षा, साइबर सुरक्षा और AI पर सहयोग के एजेंडे पर सहमति बनी।
जयशंकर ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान भारतीय सीफेयरर्स को त्वरित सहायता के लिए ओमान का आभार व्यक्त किया।
अलबुसैदी ने हॉर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने हेतु कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया।
ओमान जयशंकर की छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव है; इसके बाद वे न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स जाएंगे।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10 जुलाई 2026 को मस्कट में ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह बैठक भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी को नई गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

बैठक में क्या हुई चर्चा

दोनों विदेश मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, समुद्री क्षेत्र, तकनीक, रक्षा, साइबर और AI सहित सहयोग के व्यापक क्षेत्रों पर विस्तार से विचार साझा किए। खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों पर भी गहन चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'हमारी बातचीत ने भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी में भरोसे और मजबूती को दिखाया।'

भारतीय नाविकों की सहायता के लिए ओमान का आभार

MEA के अनुसार, जयशंकर ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान भारतीय समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) को त्वरित सहायता पहुँचाने के लिए ओमान सरकार का विशेष आभार व्यक्त किया। यह संदर्भ हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़े तनाव की पृष्ठभूमि में विशेष महत्व रखता है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है।

ओमानी विदेश मंत्री का बयान

अलबुसैदी ने एक्स पर लिखा कि हॉर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कूटनीतिक प्रयासों पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। उन्होंने कहा, 'ओमान-भारत के बीच सदियों पुराने समुद्री संबंधों ने दोनों देशों के लोगों को जोड़ा है और आज भी हमारी साझेदारी को मजबूत आधार देते हैं।' उन्होंने भारत के समर्थन के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

भारतीय समुदाय से मुलाकात

बैठक से पहले जयशंकर ने ओमान में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और भारत-ओमान संबंधों को मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रवासी भारतीयों की रुचि और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव

गौरतलब है कि जयशंकर कुवैत की यात्रा पूरी करने के बाद गुरुवार को ओमान पहुँचे। ओमान उनकी छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव है। इसके बाद वे न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स की यात्रा पर जाएंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और भारत अपने समुद्री व ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कूटनीति पर जोर दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन घोषणाओं को ठोस समझौतों और समयबद्ध क्रियान्वयन में बदलने की परीक्षा अभी बाकी है। छह देशों के दौरे की यह गति भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का विस्तार खाड़ी तक करने की स्पष्ट रणनीतिक मंशा को रेखांकित करती है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर और अलबुसैदी की मस्कट बैठक में क्या हुआ?
10 जुलाई 2026 को मस्कट में हुई इस बैठक में भारत और ओमान के विदेश मंत्रियों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, साइबर सुरक्षा, AI और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता पर सहमति बनाई। MEA के अनुसार, बैठक में खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का भारत-ओमान वार्ता में क्या महत्व है?
हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है और भारत के ऊर्जा आयात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओमानी विदेश मंत्री अलबुसैदी ने इस जलमार्ग पर समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया और भारत के समर्थन के प्रति आभार जताया।
जयशंकर ने भारतीय सीफेयरर्स के संदर्भ में ओमान का आभार क्यों माना?
MEA के अनुसार, हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान ओमान ने भारतीय समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) को त्वरित सहायता पहुँचाई थी, जिसके लिए जयशंकर ने ओमान सरकार का विशेष धन्यवाद किया।
जयशंकर की छह देशों की यात्रा में ओमान कौन-सा पड़ाव है?
ओमान जयशंकर की छह देशों की यात्रा का चौथा पड़ाव है। इससे पहले वे कुवैत की यात्रा पूरी कर चुके थे। इसके बाद वे न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स जाएंगे।
भारत-ओमान रणनीतिक साझेदारी की क्या पृष्ठभूमि है?
भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने समुद्री और व्यापारिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी में हाल के वर्षों में रक्षा, ऊर्जा और तकनीक जैसे नए क्षेत्र जुड़े हैं। ओमान में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी समुदाय भी इस साझेदारी की मजबूत कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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