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गुजरात के 9 नए नगर निगमों को 5 साल के लिए मुफ्त सरकारी ज़मीन, 11 श्रेणियों के बुनियादी ढाँचे को मंज़ूरी

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गुजरात के 9 नए नगर निगमों को 5 साल के लिए मुफ्त सरकारी ज़मीन, 11 श्रेणियों के बुनियादी ढाँचे को मंज़ूरी

सारांश

गुजरात में नगरपालिका से नगर निगम बने 9 शहरों को अब 5 साल तक मुफ्त सरकारी ज़मीन मिलेगी — सीवेज प्लांट से लेकर आंगनवाड़ी तक 11 श्रेणियों की परियोजनाओं के लिए। 14 साल में पहले इस नगर निगम विस्तार के बाद यह कदम नए निकायों की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने की दिशा में अहम है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 10 जुलाई को 9 नवगठित नगर निगमों को 5 वर्षों तक निःशुल्क सरकारी भूमि देने का निर्णय लिया।
लाभान्वित नगर निगम: मेहसाना, नाडियाड, आनंद, नवसारी, वापी, मोरबी, गांधीधाम, सुरेंद्रनगर और पोरबंदर ।
11 श्रेणियों की परियोजनाएँ पात्र — जिनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल शोधन संयंत्र, अग्निशमन केंद्र, आंगनवाड़ी और सामुदायिक हॉल शामिल हैं।
ये निकाय 1 जनवरी 2025 को 'ए' श्रेणी नगरपालिकाओं से नगर निगम में उन्नत हुए; यह 2010 के बाद पहला विस्तार था।
गुजरात में नगर निगमों की कुल संख्या 8 से बढ़कर 17 हो गई है।
जिला स्तर पर भूमि आवंटन प्रक्रिया सरल की जाएगी ताकि विकास कार्यों में तेज़ी आए।

गुजरात सरकार ने शुक्रवार, 10 जुलाई को राज्य के नौ नवगठित नगर निगमों को अगले पाँच वर्षों तक नागरिक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि निःशुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा लिया गया यह फैसला मेहसाना, नाडियाड, आनंद, नवसारी, वापी, मोरबी, गांधीधाम, सुरेंद्रनगर और पोरबंदर के नगर निगमों पर लागू होगा।

निर्णय की पृष्ठभूमि

ये नौ नगर निकाय पहले 'ए' श्रेणी की नगरपालिकाएँ थीं, जिन्हें 1 जनवरी 2025 को गुजरात मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद नगर निगमों में उन्नत किया गया। यह 2010 में गांधीनगर नगर निगम के गठन के बाद राज्य में 14 वर्षों में पहली बार नगर निगमों का विस्तार था। इस उन्नयन से गुजरात में नगर निगमों की कुल संख्या आठ से बढ़कर 17 हो गई है।

योजना में क्या शामिल है

इस निर्णय के अंतर्गत नगर निगमों को 11 श्रेणियों की सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाओं के लिए सरकारी ज़मीन बिना किसी शुल्क के मिलेगी। पात्र परियोजनाओं में नगर सेवा सदन के कार्यालय भवन, अग्निशमन केंद्र, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल शोधन संयंत्र, भूमिगत सीवरेज नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन, जल आपूर्ति अवसंरचना, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, वर्षा जल निकासी व्यवस्था, आंगनवाड़ी केंद्र तथा टाउन हॉल, सामुदायिक हॉल एवं सम्मेलन केंद्र जैसे सार्वजनिक भवन शामिल हैं।

प्रशासनिक ढाँचे में बदलाव

नगरपालिका से नगर निगम में रूपांतरण के साथ इन निकायों के अधिकार क्षेत्र में काफी नए क्षेत्र भी जोड़े गए हैं, जिससे नागरिक सेवाओं और बुनियादी ढाँचे की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। निर्वाचित नगर निकायों के गठन तक जिला कलेक्टरों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था। सरकार ने अब जिला स्तर पर भूमि आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्णय लिया है, ताकि विकास कार्यों में तेज़ी आ सके।

सरकार का उद्देश्य

राज्य सरकार के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना और उन्हें बढ़ी हुई प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ बुनियादी नागरिक सेवाएँ अधिक कुशलता से प्रदान करने में सक्षम बनाना है। गौरतलब है कि नव उन्नत नगर निगमों के पास अभी तक अपनी भूमि और संसाधन सीमित हैं, जिससे यह भूमि आवंटन उनके शुरुआती विकास के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

आगे की राह

यह लाभ अगले पाँच वर्षों तक उपलब्ध रहेगा। सरल भूमि आवंटन प्रक्रिया के साथ इन नगर निगमों से अपेक्षा है कि वे शीघ्र ही आवश्यक अवसंरचना परियोजनाएँ शुरू करेंगे और नागरिकों को बेहतर शहरी सुविधाएँ उपलब्ध कराएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी। नव उन्नत निकायों में अभी निर्वाचित परिषदें नहीं हैं और जिला कलेक्टर प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं — ऐसे में जवाबदेही का ढाँचा अभी भी अधूरा है। भूमि आवंटन की सुविधा तब तक अधूरी रहेगी जब तक इन निकायों के पास पर्याप्त तकनीकी जनशक्ति और वित्तीय क्षमता न हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ज़मीन मिलने के बाद परियोजनाएँ कागज़ों से ज़मीन पर उतरें।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात के किन 9 नगर निगमों को मुफ्त सरकारी ज़मीन मिलेगी?
मेहसाना, नाडियाड, आनंद, नवसारी, वापी, मोरबी, गांधीधाम, सुरेंद्रनगर और पोरबंदर के नगर निगमों को यह लाभ मिलेगा। ये सभी पहले 'ए' श्रेणी की नगरपालिकाएँ थीं जिन्हें 2025 में नगर निगम का दर्जा दिया गया।
मुफ्त भूमि किन परियोजनाओं के लिए मिलेगी?
11 श्रेणियों की सार्वजनिक उपयोगिता परियोजनाओं के लिए भूमि निःशुल्क दी जाएगी, जिनमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, जल शोधन संयंत्र, अग्निशमन केंद्र, आंगनवाड़ी केंद्र, टाउन हॉल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र और वर्षा जल निकासी व्यवस्था शामिल हैं।
यह योजना कितने समय तक लागू रहेगी?
यह लाभ अगले पाँच वर्षों तक उपलब्ध रहेगा। इस अवधि में नगर निगम सरकारी भूमि पर आवश्यक नागरिक अवसंरचना परियोजनाएँ बिना किसी भूमि शुल्क के विकसित कर सकेंगे।
गुजरात में नए नगर निगमों का गठन कब हुआ?
1 जनवरी 2025 को गुजरात मंत्रिमंडल ने नौ 'ए' श्रेणी नगरपालिकाओं को नगर निगम में उन्नत करने की मंज़ूरी दी। यह 2010 में गांधीनगर नगर निगम के गठन के बाद 14 वर्षों में राज्य में पहला नगर निगम विस्तार था, जिससे कुल संख्या 8 से बढ़कर 17 हो गई।
इस निर्णय से आम नागरिकों को क्या फायदा होगा?
मुफ्त भूमि मिलने से नगर निगम तेज़ी से सीवेज, पेयजल, अपशिष्ट प्रबंधन और अग्निशमन जैसी बुनियादी सेवाएँ विकसित कर सकेंगे। इससे नव विस्तारित शहरी क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बेहतर और तीव्र गति से नागरिक सुविधाएँ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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