गुजरात में 221 लाख क्यूबिक मीटर गाद हटाई, 500+ हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई जल
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में जल संसाधन विभाग ने 2022-23 से 2024-25 के तीन वर्षों के दौरान राज्यभर के जलाशयों, नहरों, नदियों और अन्य जल निकायों से 221 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक गाद हटाने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया — जो निर्धारित लक्ष्य 203 लाख क्यूबिक मीटर से भी अधिक है। इस अभियान का सीधा लाभ 500 से 600 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई जल के रूप में मिलेगा।
अभियान का दायरा और उपलब्धि
राज्य सरकार द्वारा संचालित इस व्यापक सफाई अभियान में गाद और अवांछित वनस्पतियों को हटाकर जल संरक्षण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। राज्य की 1,474 विभिन्न साइट्स पर कार्य किया गया, जिसमें औसतन 88 से 96 भारी मशीनों की सहायता से लगभग 4,223 किलोमीटर की लंबाई में संरचनात्मक सुधार और सफाई का काम संपन्न हुआ। इसके अलावा, लगभग 123 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में गहरीकरण और सफाई का कार्य किया गया।
मंत्री की प्रतिक्रिया
जल संसाधन एवं जल आपूर्ति मंत्री ईश्वरभाई पटेल ने कहा, 'पिछले तीन वर्षों में लगभग 123 लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में सफाई और गहरीकरण का कार्य किया गया है। सरकार का उद्देश्य राज्य में जल संरक्षण क्षमता को बढ़ाना और सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।' यह अभियान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब गुजरात के कई जिलों में भूजल स्तर में गिरावट एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
जूनागढ़ में दगड़-जांबुडा परियोजना
इसी अभियान के अंतर्गत सौराष्ट्र क्षेत्र के जूनागढ़ जिले की मानावदर तालुका में दगड़ और जांबुडा झीलों को जोड़कर एक बड़ा तालाब विकसित किया जा रहा है। ₹6.5 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में हिताची मशीनों और डंपरों की सहायता से तालाब को गहरा किया जा रहा है। किसान रमेश बरारिया ने बताया, 'पिछले डेढ़ महीने से तालाब को गहरा करने का काम लगातार जारी है। चेक डैम की ऊंचाई भी बढ़ाई जा रही है, जिससे पहले की तुलना में तीन गुना अधिक पानी संग्रहित किया जा सकेगा।'
किसानों पर सीधा असर
किसान प्रवीण विरदा ने बताया कि तालाब गहरा होने से उनके खेतों तक पानी पहुँचेगा, जो लगभग तीन से साढ़े तीन किलोमीटर दूर स्थित हैं। किसान लंबे समय से इस मांग को उठाते आ रहे थे। सिंचाई विभाग के डिप्टी एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एम.एल. खंभाला के अनुसार, पहले तालाब की जल संग्रह क्षमता लगभग 20 मिलियन क्यूबिक फीट थी, किंतु मरम्मत और वेस्ट वीयर की ऊंचाई बढ़ाने के बाद इसमें उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परियोजना से माणावदर शहर और आसपास के पाँच से छह गाँवों को सीधा लाभ मिलेगा।
व्यापक जल संरक्षण नीति
गुजरात सरकार 'सुजलाम सुफलाम योजना' और 'कैच द रेन' जैसे अभियानों के माध्यम से राज्य में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने में जुटी है। गौरतलब है कि इन पहलों से भूजल स्तर में सुधार हो रहा है और किसानों को सिंचाई के लिए अधिक जल उपलब्ध हो रहा है। आगामी खरीफ सीजन से पहले इस परियोजना के पूरा होने की उम्मीद किसानों के लिए राहत की खबर है।