गुजरात कैबिनेट का बड़ा फैसला: सड़क चौड़ीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण हेतु अग्रिम प्रस्ताव भेजेगी सरकार

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गुजरात कैबिनेट का बड़ा फैसला: सड़क चौड़ीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण हेतु अग्रिम प्रस्ताव भेजेगी सरकार

सारांश

गुजरात सरकार ने भविष्य की सड़क परियोजनाओं के लिए वन मंजूरी की प्रतीक्षा की समस्या से निपटने का नया तरीका खोजा है — अग्रिम और समेकित प्रस्ताव। लगभग 2,000 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की ज़रूरत का अनुमान है और कच्छ में 1,000 हेक्टेयर मुआवजा भूमि पहले ही चिन्हित।

मुख्य बातें

गुजरात कैबिनेट ने 20 मई 2026 को सड़क चौड़ीकरण के लिए वन भूमि हस्तांतरण हेतु केंद्र को अग्रिम और समेकित प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया।
राज्य को आने वाले वर्षों में लगभग 2,000 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता होने का अनुमान है।
सड़क एवं भवन विभाग ने अब तक लगभग 1,000 हेक्टेयर भूमि पर चौड़ीकरण कार्य पूरा किया या शुरू किया है।
मुआवजे के तौर पर कच्छ जिले के लखपत तालुका के शह गाँव में लगभग 1,000 हेक्टेयर गैर-वन भूमि चिन्हित की गई है।

गुजरात सरकार ने भविष्य की सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के लिए आवश्यक संरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण हेतु केंद्र सरकार को अग्रिम और समेकित प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। यह फैसला 20 मई 2026 को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस कदम का उद्देश्य वन मंजूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रशासनिक जटिलताओं को कम करना है।

मुख्य घटनाक्रम

सरकारी प्रवक्ता एवं मंत्री जीतू वाघानी ने कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन सड़कों की सीमा के भीतर संरक्षित वन भूमि आती है और जहाँ भविष्य में चौड़ीकरण की योजना है, उन्हें पहले से चिन्हित किया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे संरक्षित वन क्षेत्रों के हस्तांतरण के लिए समेकित प्रस्ताव अभी से केंद्र सरकार को भेजे जाने चाहिए।

वाघानी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित वन भूमि के बदले वन विभाग को सौंपी जाने वाली गैर-वन भूमि की व्यवस्था भी साथ-साथ की जाएगी, ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में तेज़ी लाई जा सके।

भूमि की स्थिति और अनुमान

राज्य सरकार के अनुसार, सड़क एवं भवन विभाग ने अब तक राज्य भर में लगभग 1,000 हेक्टेयर भूमि पर चौड़ीकरण कार्य पूरा कर लिया है या शुरू कर दिया है। भविष्य की सड़क विस्तार योजनाओं और वन विभाग द्वारा अधिसूचित सड़क किनारे के संरक्षित वनों को ध्यान में रखते हुए, राज्य ने प्रारंभिक अनुमान लगाया है कि आने वाले वर्षों में लगभग 2,000 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता हो सकती है।

गौरतलब है कि मुआवजे के तौर पर भूमि देने की व्यवस्था के तहत, सड़क एवं भवन विभाग ने कच्छ जिले के लखपत तालुका के शह गाँव में लगभग 1,000 हेक्टेयर गैर-वन भूमि का एक भूभाग पहले ही चिन्हित कर लिया है। भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए राज्य को अनुमानतः 2,000 हेक्टेयर गैर-वन भूमि की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।

प्रशासनिक सुधार का उद्देश्य

यह पहल ऐसे समय में आई है जब बड़े बुनियादी ढाँचा प्रकल्पों में वन मंजूरी में देरी एक प्रमुख बाधा के रूप में सामने आती रही है। अग्रिम और समेकित प्रस्ताव भेजने की रणनीति से परियोजना-दर-परियोजना मंजूरी लेने की ज़रूरत समाप्त होगी, जिससे सड़क निर्माण की गति तेज़ होने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार, इस पहल से भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी प्रक्रियाओं से जुड़ी प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आने की संभावना है।

आगे की राह

राज्य सरकार अब संरक्षित वन क्षेत्रों की पहचान और गैर-वन भूमि के विकल्पों की सूची तैयार करने के काम में जुट जाएगी। केंद्र सरकार को समेकित प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया के तहत वन विभाग और सड़क एवं भवन विभाग के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। यह कदम गुजरात के सड़क बुनियादी ढाँचे के विस्तार की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'अग्रिम समेकित प्रस्ताव' की रणनीति एक अहम सवाल उठाती है — क्या वन मंजूरी की प्रक्रिया को तेज़ करने की कोशिश में पर्यावरणीय समीक्षा की गुणवत्ता से समझौता होगा? 2,000 हेक्टेयर वन भूमि का अनुमान और मुआवजे में केवल 1,000 हेक्टेयर गैर-वन भूमि की पहचान के बीच का अंतर अभी भी स्पष्ट नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में वन संरक्षण बनाम विकास की बहस तेज़ है। बिना स्वतंत्र पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन के इस तरह के बल्क प्रस्तावों की पारदर्शिता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार का वन भूमि हस्तांतरण का यह नया फैसला क्या है?
गुजरात कैबिनेट ने 20 मई 2026 को निर्णय लिया कि भविष्य की सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के लिए आवश्यक संरक्षित वन भूमि के हस्तांतरण हेतु केंद्र सरकार को अग्रिम और समेकित प्रस्ताव भेजे जाएँ। इससे परियोजना-दर-परियोजना मंजूरी की जगह एकमुश्त प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
गुजरात में कितनी वन भूमि के हस्तांतरण की ज़रूरत होगी?
राज्य सरकार के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आने वाले वर्षों में लगभग 2,000 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता हो सकती है। अब तक सड़क एवं भवन विभाग लगभग 1,000 हेक्टेयर पर चौड़ीकरण कार्य पूरा कर चुका है या शुरू कर चुका है।
वन भूमि के बदले मुआवजे में क्या दिया जाएगा?
सरकार प्रस्तावित वन भूमि के बदले वन विभाग को गैर-वन भूमि सौंपेगी। इस क्रम में कच्छ जिले के लखपत तालुका के शह गाँव में लगभग 1,000 हेक्टेयर गैर-वन भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है।
इस पहल से क्या फायदा होगा?
सरकार के अनुसार, इस पहल से भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरी प्रक्रियाओं से जुड़ी प्रशासनिक जटिलताओं में कमी आएगी। अग्रिम प्रस्ताव भेजने से मंजूरी में होने वाली देरी घटेगी और सड़क निर्माण की गति तेज़ होगी।
यह निर्णय किसने और कब लिया?
यह निर्णय 20 मई 2026 को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक के बाद सरकारी प्रवक्ता एवं मंत्री जीतू वाघानी ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।
राष्ट्र प्रेस
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