गुजरात में बनेगी पहली हाई-टेक नर्सरी, बनासकांठा में 3.5 करोड़ की लागत से होगा 'ग्रीन मॉडल'

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गुजरात में बनेगी पहली हाई-टेक नर्सरी, बनासकांठा में 3.5 करोड़ की लागत से होगा 'ग्रीन मॉडल'

सारांश

गुजरात सरकार ने बनासकांठा में पहली हाई-टेक नर्सरी स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे वृक्षारोपण और पौधों के संरक्षण में मदद मिलेगी। यह नर्सरी 13 एकड़ क्षेत्र में फैली होगी और 3.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगी।

Key Takeaways

  • गुजरात में पहली हाई-टेक नर्सरी की स्थापना।
  • 3.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगी।
  • उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग कर पौधों का उत्पादन।
  • बीज बैंक और जैविक खाद उत्पादन की सुविधा।
  • पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान।

बनासकांठा, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस) - गुजरात सरकार अब बनासकांठा जिले के डीसा तालुका के दावास गांव में लगभग 13 एकड़ में फैली अपनी पहली हाई-टेक नर्सरी की स्थापना करने जा रही है, जिसकी कुल लागत लगभग 3.5 करोड़ रुपए है।

राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री प्रवीण माली के मार्गदर्शन में, गुजरात वन विभाग और सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा इस परियोजना की निगरानी की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य भर में वृक्षारोपण प्रयासों को सुदृढ़ करना और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का संरक्षण करना है।

अधिकारियों ने बताया कि यह नर्सरी गुजरात में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में कार्य करेगी।

उन्होंने कहा, "इसका मुख्य उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकी, नियंत्रित वातावरण और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले, रोगमुक्त और मजबूत पौधे उगाना है। यह पहल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करेगी और राज्य के पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को सुदृढ़ करेगी।"

यह अत्याधुनिक नर्सरी हर वर्ष 10 लाख से अधिक पौधे तैयार करेगी। धुंध कक्ष, अंकुरण कक्ष, पॉलीहाउस और नेट हाउस जैसी उन्नत सुविधाएं प्रतिकूल मौसम में भी पौधों की शानदार वृद्धि सुनिश्चित करेंगी।

विलुप्त होने के कगार पर खड़ी पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए, मिट्टी रहित माध्यमों जैसे तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे पौधों की तीव्र और स्वस्थ वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

इस सुविधा केंद्र में एक बीज बैंक और बीज प्रसंस्करण इकाई भी होगी, जो दुर्लभ और मूल्यवान बीजों को वैज्ञानिक तरीके से दीर्घकालिक संरक्षण के लिए संग्रहित करेगी।

इसके अतिरिक्त, एक 'नर्सरी सूचना केंद्र' छात्रों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों को पौधों की खेती, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संरक्षण पर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

इस परियोजना में स्वस्थ पौधों की वृद्धि के लिए जैविक खाद उत्पादन हेतु एक वर्मीकम्पोस्टिंग इकाई भी शामिल होगी।

राज्य भर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए, लंबे और मजबूत पौधों को विकसित करने के तरीके भी लागू किए जाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि यह नर्सरी न केवल गुजरात के हरित आवरण को बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगी और लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

उन्होंने कहा, "यह नर्सरी आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण में एक मानदंड के रूप में कार्य करेगी, जो राज्य के अन्य जिलों को मार्गदर्शन प्रदान करेगी।"

Point of View

बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह परियोजना राज्य के लिए एक सकारात्मक कदम है, जो प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद करेगी।
NationPress
06/03/2026

Frequently Asked Questions

हाई-टेक नर्सरी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले रोगमुक्त पौधे उगाना और दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का संरक्षण करना है।
यह नर्सरी कितने पौधे तैयार करेगी?
यह नर्सरी हर वर्ष 10 लाख से अधिक पौधे तैयार करेगी।
क्या इसमें जैविक खाद का उत्पादन भी होगा?
हाँ, इस परियोजना में जैविक खाद उत्पादन हेतु एक वर्मीकम्पोस्टिंग इकाई शामिल होगी।
नर्सरी सूचना केंद्र का क्या कार्य होगा?
यह केंद्र छात्रों, किसानों और पर्यावरण प्रेमियों को पौधों की खेती और प्राकृतिक संरक्षण पर मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
इस नर्सरी की लागत कितनी है?
इस नर्सरी की कुल लागत लगभग 3.5 करोड़ रुपए है।
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