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गुजरात में 'सुजलम सुफलम जल अभियान' से 8 वर्षों में 1,38,039 लाख घन फीट जल भंडारण क्षमता बढ़ी

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गुजरात में 'सुजलम सुफलम जल अभियान' से 8 वर्षों में 1,38,039 लाख घन फीट जल भंडारण क्षमता बढ़ी

सारांश

गुजरात का 'सुजलम सुफलम जल अभियान' महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आठ वर्षों में 1,38,039 लाख घन फीट जल भंडारण क्षमता जोड़ने वाला जन आंदोलन बन चुका है। इस वर्ष अकेले 13,315 कार्य और 2.30 लाख मानव-दिवस रोज़गार — यह अभियान जल सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका दोनों को एक साथ साध रहा है।

मुख्य बातें

गुजरात में 'सुजलम सुफलम जल अभियान' के तहत इस वर्ष जल भंडारण क्षमता में 20,789 लाख घन फीट की वृद्धि दर्ज की गई।
पिछले 8 वर्षों में संचयी जल भंडारण क्षमता वृद्धि रिकॉर्ड 1,38,039 लाख घन फीट तक पहुँची।
इस वर्ष मई तक 13,315 कार्य पूरे; 626 किमी नहरें और 1,277 किमी नालियाँ साफ की गईं।
इस वर्ष 2.30 लाख मानव-दिवस रोज़गार सृजित; 8 वर्षों में कुल 206.73 लाख मानव-दिवस ।
अभियान 23 फरवरी को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा गांधीनगर में लॉन्च किया गया था।
6 विभागों — जल संसाधन, जल आपूर्ति, वन, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और SSNNL — के समन्वय से क्रियान्वयन।

गुजरात के जल संसाधन एवं जल आपूर्ति मंत्री ईश्वरसिंह पटेल ने सोमवार, 29 जून को जानकारी दी कि राज्य में जारी 'सुजलम सुफलम जल अभियान' के अंतर्गत इस वर्ष जल भंडारण क्षमता में 20,789 लाख घन फीट की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पिछले आठ वर्षों की संचयी वृद्धि रिकॉर्ड 1,38,039 लाख घन फीट तक पहुँच गई है।

अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कैच द रेन' अभियान के अनुरूप क्रियान्वित किया गया है। इसका प्रमुख लक्ष्य भूजल स्तर में सुधार लाना और पूरे गुजरात में जल संरक्षण से जुड़े बुनियादी ढाँचे का विस्तार करना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह पहल नागरिकों की व्यापक भागीदारी के साथ एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुकी है।

मंत्री ईश्वरसिंह पटेल ने कहा, 'राज्य भर में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और भूजल स्तर को ऊपर उठाने के उद्देश्य से सुजलम सुफलम जल अभियान नागरिकों की भागीदारी के माध्यम से एक महत्वपूर्ण जन आंदोलन बन गया है।'

मुख्य घटनाक्रम और कार्य विवरण

इस अभियान का राज्यव्यापी शुभारंभ 23 फरवरी को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा किया गया था। मई तक विभिन्न विभागों में समन्वित कार्यान्वयन के ज़रिए कुल 13,315 कार्य पूरे किए जा चुके थे।

इन कार्यों में तालाबों को गहरा करने की 2,450 परियोजनाएँ, चेक डैम की गाद निकालने के 3,661 कार्य और चेक डैम की मरम्मत के 1,160 कार्य शामिल हैं। इसके अलावा 626 किलोमीटर लंबी नहरों और 1,277 किलोमीटर लंबी नालियों की सफाई भी की गई।

रोज़गार सृजन और आर्थिक प्रभाव

इन संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप इस वर्ष लगभग 2.30 लाख मानव-दिवस का रोज़गार सृजित हुआ। आठ वर्षों की संचयी अवधि में यह आँकड़ा 206.73 लाख मानव-दिवस तक पहुँच चुका है। गौरतलब है कि ये कार्य जनभागीदारी, मनरेगा (MGNREGA) योजना और विभागीय कार्यान्वयन के माध्यम से संपन्न किए जाते हैं।

आठ वर्षों की संचयी उपलब्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले आठ वर्षों में इस पहल के तहत कुल 1,23,635 कार्य पूरे किए गए हैं। इनमें तालाबों को गहरा करने और निर्माण से संबंधित 39,770 कार्य, चेक डैम की गाद निकालने के 26,873 कार्य और चेक डैम की मरम्मत के 7,810 कार्य शामिल हैं। इसी अवधि में 80,793 किलोमीटर लंबी नहरों और नालियों की सफाई का कार्य भी पूरा हो चुका है।

छह विभागों का समन्वित प्रयास

राज्य सरकार ने इस अभियान को जल संसाधन, जल आपूर्ति, वन एवं पर्यावरण, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड — इन छह विभागों के समन्वय से लागू किया है। यह बहु-विभागीय दृष्टिकोण अभियान की व्यापकता और प्रभाव को रेखांकित करता है। आने वाले वर्षों में इस अभियान के और विस्तार की संभावना है, जो गुजरात में दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

38,039 लाख घन फीट की संचयी वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह है कि इससे किसानों की सिंचाई ज़रूरतें और पेयजल संकट कितना हल हुआ — जो आँकड़े सरकारी बयान में अनुपस्थित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात के कई ज़िले भूजल दोहन की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। मनरेगा के साथ जोड़कर रोज़गार सृजन की दोहरी उपलब्धि की दावेदारी सराहनीय है, पर स्वतंत्र सत्यापन के बिना इन आँकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल बना रहेगा। बहु-विभागीय समन्वय का मॉडल अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय हो सकता है, बशर्ते दीर्घकालिक भूजल पुनर्भरण के मापने योग्य परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात का 'सुजलम सुफलम जल अभियान' क्या है?
यह गुजरात सरकार का एक बहु-विभागीय जल संरक्षण अभियान है, जिसका उद्देश्य तालाबों को गहरा करना, चेक डैम की मरम्मत और नहरों की सफाई के ज़रिए जल भंडारण क्षमता बढ़ाना और भूजल स्तर में सुधार लाना है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कैच द रेन' अभियान के अनुरूप क्रियान्वित किया जा रहा है।
इस वर्ष अभियान से कितनी जल भंडारण क्षमता बढ़ी?
जल संसाधन मंत्री ईश्वरसिंह पटेल के अनुसार, इस वर्ष अभियान के तहत जल भंडारण क्षमता में 20,789 लाख घन फीट की वृद्धि हुई है। पिछले आठ वर्षों में संचयी वृद्धि 1,38,039 लाख घन फीट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
अभियान में कितने कार्य पूरे हुए और कौन से विभाग शामिल हैं?
मई 2025 तक इस वर्ष 13,315 कार्य पूरे किए गए, जबकि आठ वर्षों में कुल 1,23,635 कार्य संपन्न हुए हैं। अभियान में जल संसाधन, जल आपूर्ति, वन एवं पर्यावरण, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड — ये छह विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हैं।
इस अभियान से रोज़गार पर क्या असर पड़ा?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अभियान के तहत लगभग 2.30 लाख मानव-दिवस रोज़गार सृजित हुआ। पिछले आठ वर्षों में यह संचयी आँकड़ा 206.73 लाख मानव-दिवस तक पहुँच चुका है, जिसमें मनरेगा और जनभागीदारी का महत्वपूर्ण योगदान है।
अभियान का शुभारंभ कब और कहाँ हुआ?
इस वर्ष 'सुजलम सुफलम जल अभियान' का राज्यव्यापी शुभारंभ 23 फरवरी को गांधीनगर में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा किया गया था। यह अभियान पिछले आठ वर्षों से निरंतर चल रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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