जल संचय अभियान: 1.5 करोड़ संरचनाएं पूरी, सीआर पाटिल बोले — मोदी के आह्वान ने बनाया जनांदोलन
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री चंद्रकांत रघुनाथ (सीआर) पाटिल ने 31 मई 2026 को नवसारी, गुजरात में जल संचय अभियान की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा देते हुए कहा कि 6 सितंबर 2024 को शुरू हुआ यह अभियान 1 करोड़ 50 लाख जल संचय संरचनाएं पूरी कर चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान ने जल संरक्षण को देश के सबसे बड़े जनांदोलनों में से एक बना दिया है।
अभियान की ऐतिहासिक उपलब्धि
पाटिल ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने जल संचय को जन भागीदारी के माध्यम से एक जन आंदोलन में बदलने का आह्वान किया था। उन्होंने अपनी कर्मभूमि से मातृभूमि में जल संचय के लिए मदद करने की अपील भी की थी।' मंत्री के अनुसार, जनता के अपार सहयोग से 31 मई 2026 तक यह संख्या डेढ़ करोड़ को पार कर गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि देश की जनता प्रधानमंत्री के आह्वान को कितनी गंभीरता से लेती है।
पहले चरण के आंकड़े
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अभियान के पहले चरण में 31 मई 2025 तक कुल 27,50,000 संरचनाएं तैयार की गई थीं, जिससे लगभग 2.4 बीसीएम (अरब घन मीटर) अतिरिक्त जल का संग्रह संभव हुआ था। अब जब संरचनाओं की संख्या डेढ़ करोड़ को पार कर चुकी है, तो आगामी मानसून में और भी अधिक मात्रा में जल संचय की उम्मीद जताई जा रही है।
नवसारी में मानसून-पूर्व तैयारियां
आगामी मानसून का उल्लेख करते हुए पाटिल ने नवसारी महानगरपालिका के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि मानसून से पहले नवसारी की खाड़ी को नदी की तरह चौड़ा और गहरा करने का महत्वपूर्ण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसमें जिला कलेक्टर, म्युनिसिपल कमिश्नर, मेयर और अन्य सभी पदाधिकारी मिलकर जुटे हुए हैं।
प्रशासनिक तालमेल की मिसाल
मंत्री ने कहा, 'समय से पहले काम पूरा करने की जो पद्धति प्रशासन में है, वह आज यहां साफ दिखाई दे रही है।' उन्होंने आगे जोड़ा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच इस बेहतरीन तालमेल से आम जनता के काम आसान हो रहे हैं और आने वाले दिनों में जलभराव व अन्य समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में मानसून-पूर्व जलभराव और जल-प्रबंधन की चुनौतियाँ हर वर्ष गंभीर रूप लेती हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि जल संचय अभियान का विस्तार और इसकी गति भारत की दीर्घकालिक जल सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है। 1.5 करोड़ संरचनाओं के पूरा होने के साथ अब सरकार का ध्यान इन संरचनाओं के रखरखाव और आगामी मानसून में अधिकतम जल संग्रह सुनिश्चित करने पर केंद्रित होगा।