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जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा — 'जल हमारी सभ्यता की पहचान', 315+ R&D परियोजनाएं शुरू

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जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा — 'जल हमारी सभ्यता की पहचान', 315+ R&D परियोजनाएं शुरू

सारांश

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 500 हितधारकों के बीच राष्ट्रीय जल R&D कार्यशाला का उद्घाटन किया। 315+ परियोजनाएं, 1.5 करोड़ जल संरचनाएं और नया जेएसजेबी:सीटीआर पोर्टल — यह जल सुरक्षा को तकनीक और जन भागीदारी से जोड़ने की बड़ी कोशिश है।

मुख्य बातें

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 1 जून 2026 को नई दिल्ली में जल R&D राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया।
जल क्षेत्र में 315 से अधिक R&D परियोजनाएं शुरू, जिनमें मंत्रालय द्वारा सीधे समर्थित 113 परियोजनाएं शामिल।
जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत देश में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं स्थापित।
नया जेएसजेबी:सीटीआर पोर्टल लॉन्च — नागरिकों, उद्योगों और NGOs की भागीदारी से सामुदायिक जल संरक्षण को डिजिटल आधार।
कार्यशाला में 500 हितधारक शामिल; इसरो अध्यक्ष वी.
नारायणन और जितेंद्र सिंह भी उपस्थित।

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने सोमवार, 1 जून 2026 को नई दिल्ली में जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि 'जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है।' उन्होंने उभरती जल चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यशाला का स्वरूप और भागीदारी

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सरकार, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स से जुड़े 500 हितधारकों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य जल सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन हासिल करने के लिए एक समन्वित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना था।

कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, अंतरिक्ष विभाग के सचिव एवं इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन, एएनआरएफ के सीईओ, वरिष्ठ सचिव, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और देश भर के उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अनुसंधान एवं विकास में मंत्रालय की पहल

पाटिल ने बताया कि जल क्षेत्र में अब तक 315 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनमें मंत्रालय द्वारा सीधे समर्थित 113 परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने वैज्ञानिक जल प्रबंधन और जल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और संस्थागत साझेदारियों की भूमिका को भी रेखांकित किया।

जन भागीदारी अभियान की सफलता

केंद्रीय मंत्री ने जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके अंतर्गत देश भर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की स्थापना की जा चुकी है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण की चेतना किस गति से बढ़ रही है।

नया पोर्टल लॉन्च

पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (जेएसजेबी:सीटीआर) पोर्टल के शुभारंभ की घोषणा की। यह राष्ट्रव्यापी डिजिटल पहल नागरिकों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से समुदाय-आधारित जल संरक्षण को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

विकसित भारत 2047 का संदर्भ

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को एकजुट करते हुए समग्र सरकारी और राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच जल प्रबंधन में तकनीकी नवाचार अब नीतिगत प्राथमिकता बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनका ज़मीनी जल-स्तर पर मापनीय असर कितना पड़ा है। भारत के कई हिस्सों में भूजल संकट गहराता जा रहा है, और कार्यशालाओं व पोर्टल लॉन्च तब तक पर्याप्त नहीं, जब तक अनुसंधान के निष्कर्ष नीति और क्षेत्रीय कार्यान्वयन में सीधे नहीं उतरते। जेएसजेबी:सीटीआर पोर्टल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी नागरिक इसे कितना अपना पाते हैं — डिजिटल पहुँच की असमानता एक अनदेखी बाधा बनी रह सकती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने राष्ट्रीय जल R&D कार्यशाला में क्या घोषणाएं कीं?
पाटिल ने जल क्षेत्र में 315 से अधिक R&D परियोजनाओं की जानकारी दी और जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (जेएसजेबी:सीटीआर) पोर्टल लॉन्च किया। उन्होंने अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण को जल सुरक्षा की कुंजी बताया।
जेएसजेबी:सीटीआर पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करेगा?
जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन पोर्टल एक राष्ट्रव्यापी डिजिटल मंच है जो नागरिकों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों को समुदाय-आधारित जल संरक्षण गतिविधियों में जोड़ता है। इसका उद्देश्य वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण प्रयासों को डिजिटल रूप से ट्रैक और समन्वित करना है।
जल संचय जन भागीदारी अभियान की अब तक की उपलब्धि क्या है?
जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तहत देश भर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की स्थापना की जा चुकी है। यह आँकड़ा सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण की व्यापक पहुँच को दर्शाता है।
इस कार्यशाला में कौन-कौन से प्रमुख अधिकारी शामिल हुए?
कार्यशाला में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, इसरो अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग सचिव वी. नारायणन, एएनआरएफ के सीईओ और देश भर के 500 हितधारक उपस्थित रहे।
जल क्षेत्र में अनुसंधान को विकसित भारत 2047 से कैसे जोड़ा जा रहा है?
जितेंद्र सिंह ने कार्यशाला में कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, SME और स्टार्टअप्स को एकजुट कर समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। जल अनुसंधान इस विजन का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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