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जल अनुसंधान को नई दिशा: सरकार लॉन्च करेगी 'महा ऑन वॉटर' मिशन, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त पहल

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जल अनुसंधान को नई दिशा: सरकार लॉन्च करेगी 'महा ऑन वॉटर' मिशन, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त पहल

सारांश

जल संकट से जूझते भारत में सरकार ने एक बड़ा नीतिगत कदम उठाया है — 'महा ऑन वॉटर' मिशन के ज़रिए ANRF और जल शक्ति मंत्रालय मिलकर अनुसंधान, स्टार्टअप और ISRO की उपग्रह तकनीक को एक छत के नीचे लाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुख्य बातें

सरकार 'महा ऑन वॉटर' मिशन शुरू करेगी — जल शक्ति मंत्रालय और ANRF की संयुक्त पहल।
नई दिल्ली में सोमवार को राष्ट्रीय जल अनुसंधान कार्यशाला में शोध प्रस्तावों के लिए खुली आमंत्रण प्रक्रिया की घोषणा होगी।
उद्घाटन में मंत्री सी.आर.
जितेंद्र सिंह, राज भूषण चौधरी और ISRO अध्यक्ष डॉ.
नारायणन शामिल होंगे।
ISRO और जल शक्ति मंत्रालय के बीच MOU संभावित; 24 प्राथमिक कार्यक्षेत्र पहले ही चिन्हित।
भारत-WIN पोर्टल के तहत स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए जल क्षेत्र में उत्पाद विकास हेतु खुली आमंत्रण प्रक्रिया।
'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' (JSJB: CTR) डिजिटल मंच नागरिकों को जल संरक्षण दस्तावेज़ीकरण में जोड़ेगा।

केंद्र सरकार भारत में जल अनुसंधान और नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए 'महा ऑन वॉटर' (Mission for Advancement in High-impact Areas on Water) मिशन शुरू करने जा रही है। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की संयुक्त पहल होगी, जिसका लक्ष्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु लचीलापन और जल उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध को गति देना है। इस पहल की घोषणा रविवार, 1 जून को की गई।

राष्ट्रीय कार्यशाला में होगा औपचारिक शुभारंभ

नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित होने वाली 'जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला' के दौरान इस मिशन के तहत शोध प्रस्तावों के लिए खुली आमंत्रण प्रक्रिया की भी घोषणा की जाएगी। मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस एक दिवसीय कार्यशाला में सरकार, उद्योग, शिक्षाविद, वैज्ञानिक संस्थान, स्टार्टअप्स और तकनीकी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि भाग लेंगे।

कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन करेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ. नारायणन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव भी हैं।

स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए भारत-WIN पोर्टल

जल शक्ति मंत्रालय भारत-WIN पोर्टल के अंतर्गत स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए एक खुली आमंत्रण प्रक्रिया भी शुरू करेगा, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र में उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास को प्रोत्साहन देना है। यह कदम जल प्रौद्योगिकी में उद्यमिता को सीधे नीतिगत समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नागरिक भागीदारी के लिए डिजिटल मंच

कार्यशाला के दौरान 'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' (JSJB: CTR) नामक एक सहभागी डिजिटल मंच भी लॉन्च किया जाएगा। यह मंच नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी पहलों का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण की संस्कृति को मज़बूत करना है।

ISRO के साथ MOU और उपग्रह तकनीक का उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। इसके तहत जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों और उन्नत तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, इस सहयोग के लिए 24 प्राथमिक अध्ययन और कार्यक्षेत्र पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं।

तकनीकी सत्रों में होगी गहन चर्चा

कार्यशाला में कई तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भूजल प्रबंधन, सिंचाई पद्धतियाँ, नदी स्वरूप विज्ञान, बाढ़ क्षेत्र मानचित्रण, जलवायु लचीलापन, पारिस्थितिकीय आकलन तथा बाँधों और हाइड्रोलिक संरचनाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। यह कार्यशाला भारत के जल अनुसंधान तंत्र को एक समन्वित और नवाचार-केंद्रित ढाँचे में ढालने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। ANRF और ISRO जैसी संस्थाओं को एक ढाँचे में जोड़ना महत्वाकांक्षी है, पर अतीत में भी जल प्रबंधन से जुड़ी कई योजनाएँ समन्वय की कमी के चलते अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। स्टार्टअप्स और MSMEs को भारत-WIN पोर्टल के ज़रिए जोड़ना नवाचार की दिशा में सही संकेत है, लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब शोध से उत्पाद तक की यात्रा में वित्तपोषण और बाज़ार-पहुँच की स्पष्ट रूपरेखा हो। बिना जवाबदेही तंत्र के, यह मिशन भी 'नीति पर नीति' की उस परंपरा का हिस्सा बन सकता है जो घोषणाओं में समृद्ध और ज़मीनी बदलाव में कमज़ोर रही है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'महा ऑन वॉटर' मिशन क्या है?
'महा ऑन वॉटर' (Mission for Advancement in High-impact Areas on Water) जल शक्ति मंत्रालय और ANRF की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु लचीलापन और जल उपयोग दक्षता जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा देना है। इसके तहत शोध प्रस्तावों के लिए खुली आमंत्रण प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
राष्ट्रीय जल अनुसंधान कार्यशाला में क्या होगा?
नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में 'महा ऑन वॉटर' मिशन की औपचारिक घोषणा, भारत-WIN पोर्टल के तहत स्टार्टअप्स के लिए आमंत्रण प्रक्रिया और JSJB: CTR डिजिटल मंच का शुभारंभ होगा। इसके अलावा भूजल, बाढ़ मानचित्रण और जलवायु लचीलेपन पर तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।
ISRO और जल शक्ति मंत्रालय के बीच MOU किस लिए है?
यह MOU जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित तकनीकों के उपयोग को मज़बूत करने के लिए है। इस सहयोग के तहत 24 प्राथमिक अध्ययन और कार्यक्षेत्र पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं।
भारत-WIN पोर्टल से स्टार्टअप्स को क्या फायदा होगा?
भारत-WIN पोर्टल के ज़रिए स्टार्टअप्स और MSMEs को जल क्षेत्र में उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास के लिए सीधे सरकारी समर्थन और आमंत्रण प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह जल प्रौद्योगिकी में उद्यमिता को नीतिगत प्रोत्साहन देने की दिशा में एक नया कदम है।
'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' डिजिटल मंच क्या करेगा?
यह सहभागी डिजिटल मंच नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण पहलों का दस्तावेज़ीकरण व प्रदर्शन करने में मदद करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण की भागीदारी बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
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