जल अनुसंधान को नई दिशा: सरकार लॉन्च करेगी 'महा ऑन वॉटर' मिशन, ANRF और जल शक्ति मंत्रालय की संयुक्त पहल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार भारत में जल अनुसंधान और नवाचार को सुदृढ़ करने के लिए 'महा ऑन वॉटर' (Mission for Advancement in High-impact Areas on Water) मिशन शुरू करने जा रही है। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की संयुक्त पहल होगी, जिसका लक्ष्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु लचीलापन और जल उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध को गति देना है। इस पहल की घोषणा रविवार, 1 जून को की गई।
राष्ट्रीय कार्यशाला में होगा औपचारिक शुभारंभ
नई दिल्ली में सोमवार को आयोजित होने वाली 'जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला' के दौरान इस मिशन के तहत शोध प्रस्तावों के लिए खुली आमंत्रण प्रक्रिया की भी घोषणा की जाएगी। मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस एक दिवसीय कार्यशाला में सरकार, उद्योग, शिक्षाविद, वैज्ञानिक संस्थान, स्टार्टअप्स और तकनीकी संगठनों के प्रमुख प्रतिनिधि भाग लेंगे।
कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन करेंगे। उल्लेखनीय है कि डॉ. नारायणन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव भी हैं।
स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए भारत-WIN पोर्टल
जल शक्ति मंत्रालय भारत-WIN पोर्टल के अंतर्गत स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए एक खुली आमंत्रण प्रक्रिया भी शुरू करेगा, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र में उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास को प्रोत्साहन देना है। यह कदम जल प्रौद्योगिकी में उद्यमिता को सीधे नीतिगत समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नागरिक भागीदारी के लिए डिजिटल मंच
कार्यशाला के दौरान 'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' (JSJB: CTR) नामक एक सहभागी डिजिटल मंच भी लॉन्च किया जाएगा। यह मंच नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी पहलों का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करने में सक्षम बनाएगा। इसका उद्देश्य सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण की संस्कृति को मज़बूत करना है।
ISRO के साथ MOU और उपग्रह तकनीक का उपयोग
जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है। इसके तहत जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों और उन्नत तकनीकों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, इस सहयोग के लिए 24 प्राथमिक अध्ययन और कार्यक्षेत्र पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं।
तकनीकी सत्रों में होगी गहन चर्चा
कार्यशाला में कई तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जिनमें भूजल प्रबंधन, सिंचाई पद्धतियाँ, नदी स्वरूप विज्ञान, बाढ़ क्षेत्र मानचित्रण, जलवायु लचीलापन, पारिस्थितिकीय आकलन तथा बाँधों और हाइड्रोलिक संरचनाओं की सुरक्षा जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। यह कार्यशाला भारत के जल अनुसंधान तंत्र को एक समन्वित और नवाचार-केंद्रित ढाँचे में ढालने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।