जर्मन राजदूत एकरमैन ने जल संकट पर चिंता व्यक्त की, तकनीकी समाधान की आवश्यकता बताई
सारांश
Key Takeaways
- जल संकट एक गंभीर वैश्विक मुद्दा है।
- तकनीकी समाधान जल प्रबंधन के लिए आवश्यक हैं।
- भारत और जर्मनी के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
- समान जल वितरण का महत्व अत्यधिक है।
- आईजीएसईसी द्वारा जल प्रबंधन को फंडिंग योजना में शामिल किया जाना सराहनीय है।
नई दिल्ली, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जर्मन राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने विज्ञान भवन में आईजीएसटीसी स्ट्रेटजिक कॉन्क्लेव 2026 में भाग लिया। उन्होंने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए भारत की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने कॉन्क्लेव को संबोधित भी किया।
मीडिया से बातचीत में जर्मन राजदूत ने जल संसाधन प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा, "जल संसाधन प्रबंधन आज की दुनिया, विशेषकर भारत में, सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक है। इस पर चर्चा करना बेहद आवश्यक है। मुझे इस बात का गर्व है कि हम वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और क्षेत्र के श्रमिकों के साथ मिलकर इस पर विचार कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि जल प्रबंधन के मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है। "यह कॉन्क्लेव एक उपयोगी और समय पर किया गया अभ्यास है। मुझे खुशी है कि जर्मनी भारत के साथ मिलकर इस पर कार्य कर रहा है।"
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के बारे में उन्होंने कहा, "यह समिट बहुत सफल रहा। 80 से अधिक देशों ने हमारे डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए। भारत ने एक बार फिर साबित किया कि वह ऐसे आयोजनों का बेहतरीन मेज़बान है।"
जर्मन राजदूत ने पानी को सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन बताते हुए कहा, "दुनिया की वर्तमान स्थिति के कारण जल प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। हमें जल संसाधनों का सही ढंग से उपयोग करने के उपाय खोजने होंगे ताकि सभी को लाभ मिल सके।"
उन्होंने कहा, "हमें यह स्वीकृति देनी होगी कि हम पानी के साथ लापरवाह हैं और इसे सही तरीके से वितरित करने के लिए स्मार्ट समाधान आवश्यक हैं। आईजीएसईसी को बधाई कि उन्होंने जल प्रबंधन के मुद्दे को 2026 के लिए अपनी फंडिंग योजना में शामिल किया है।"