भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता: डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सारांश
Key Takeaways
- द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए समझौते की आवश्यकता है।
- भारत की विकास दर 7 प्रतिशत के करीब है।
- ऑस्ट्रिया के 60 व्यापारिक नेता भारत में मौजूद हैं।
- 10060 ऑस्ट्रियाई कंपनियाँ भारतीय बाजार में सक्रिय हैं।
- भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच संयुक्त कार्य की आवश्यकता है।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके पश्चात, दोनों नेताओं ने अपने विचार साझा किए। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच के मुक्त व्यापार समझौते को वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
स्टॉकर ने कहा, "मेरा यह दौरा भारत-ऑस्ट्रिया संबंध के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है। मुझे गर्व है कि मैं 40 वर्षों में पहले फेडरल चांसलर के रूप में भारत आया हूँ। पीएम मोदी, आप 2024 में वियना की यात्रा पर आए थे और मैं गर्व से कह सकता हूँ कि हमारे 75 वर्षों के कूटनीतिक रिश्ते बहुत मजबूत हैं। यहाँ आमंत्रित करने के लिए आपका धन्यवाद।"
स्टॉकर ने यह भी कहा, "मैं यहाँ अकेला नहीं आया, बल्कि मेरे साथ 60 उच्च स्तरीय व्यापारिक नेता हैं, जो ऑस्ट्रिया के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इस डेलिगेशन का नेतृत्व विदेश मंत्री और ऑस्ट्रिया के आर्थिक चेंबर के उपाध्यक्ष कर रहे हैं। हमारे मजबूत राजनीतिक संबंधों से हमारे व्यापार को काफी लाभ मिल रहा है। भारत पहले से ही ऑस्ट्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। हमारे द्विपक्षीय व्यापार संबंध पिछले 10 वर्षों में सकारात्मक रूप से 3 बिलियन यूरो तक पहुँच चुके हैं।"
उन्होंने आगे बताया कि 10060 ऑस्ट्रियाई कंपनियाँ भारतीय बाजार के मुख्य तकनीकी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह हमारे गहरे रिश्ते को दर्शाता है। भारत की विकास दर, जो लगभग 7 प्रतिशत है, हमारे लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार है। भविष्य में ऑस्ट्रियाई कंपनियाँ भारत के इस गतिशील बाजार से और लाभ प्राप्त करेंगी। आज मैं भारत-ऑस्ट्रिया बिजनेस समिट का उद्घाटन करने जा रहा हूँ, जो निर्णय लेने वालों को एक साथ लाएगा और भारत-ऑस्ट्रिया कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
भारत-यूरोपीय संघ एफटीए पर उन्होंने कहा, "भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता सकारात्मक विकास को प्रोत्साहित करेगा। यह व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करेगा और निवेश, निर्यात और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर प्रदान करेगा। भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें इन चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा और निर्भरता कम करने तथा विविधता लाने की आवश्यकता है। यह आवश्यक है।"