जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा: 'जल सभ्यता और विकास की पहचान', 315+ R&D परियोजनाएं शुरू
सारांश
मुख्य बातें
जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 2 जून 2025 को नई दिल्ली में जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि 'जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है।' उन्होंने उभरती जल चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जन भागीदारी के त्रिपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यशाला में किसने लिया भाग
इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सरकार, शिक्षा जगत, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स से जुड़े 500 से अधिक हितधारक उपस्थित रहे। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, अंतरिक्ष विभाग के सचिव एवं इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन तथा ANRF के सीईओ समेत वरिष्ठ वैज्ञानिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद थे।
मुख्य घोषणाएं और उपलब्धियां
पाटिल ने बताया कि जल क्षेत्र में अब तक 315 से अधिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनमें मंत्रालय द्वारा सीधे समर्थित 113 परियोजनाएं शामिल हैं। उन्होंने जल संचय जन भागीदारी (JSJB) अभियान की सफलता का भी उल्लेख किया, जिसके तहत देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की स्थापना की गई है।
इसके साथ ही उन्होंने जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (JSJB:CTR) पोर्टल के शुभारंभ की घोषणा की। यह पोर्टल नागरिकों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों की सहभागिता के ज़रिए समुदाय-आधारित जल संरक्षण को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
भू-स्थानिक तकनीक की भूमिका
पाटिल ने वैज्ञानिक जल प्रबंधन और जल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों और रणनीतिक साझेदारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। यह ऐसे समय में आया है जब जलवायु परिवर्तन के कारण देश के कई हिस्सों में जल संकट गहराता जा रहा है।
विकसित भारत 2047 से जुड़ाव
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने के लिए शिक्षा जगत, उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को एकजुट करने वाले समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। गौरतलब है कि जल सुरक्षा को अब राष्ट्रीय विकास एजेंडे के केंद्र में रखा जा रहा है, और इस कार्यशाला को उसी दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।