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जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल सुरक्षा सम्मेलन में 'कैच द रेन' अभियान और सिंचाई दक्षता पर दिया जोर

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जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल सुरक्षा सम्मेलन में 'कैच द रेन' अभियान और सिंचाई दक्षता पर दिया जोर

सारांश

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने नई दिल्ली में राज्यों के वरिष्ठ सचिवों के साथ जल सुरक्षा पर मंथन किया। 'कैच द रेन' अभियान से लेकर नवसारी के रिचार्ज बोरवेल तक — सम्मेलन में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की रणनीति पर जोर दिया गया।

मुख्य बातें

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने नई दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के वरिष्ठ सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन की अध्यक्षता की।
सम्मेलन में जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता, बांध सुरक्षा, जल प्रशासन सुधार, आधुनिक प्रौद्योगिकी और राज्यों के बीच समन्वय — छह प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।
पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कैच द रेन' पहल को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने की समीक्षा की।
नवसारी में वर्षा जल संग्रहण और रिचार्ज बोरवेल के माध्यम से भूजल पुनर्भरण का अभिनव मॉडल प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को जल क्षेत्र के नीतिगत सुधारों में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 14 जुलाई 2025 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन स्थित चाणक्य हॉल में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के अखिल भारतीय वरिष्ठ सचिव सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस राष्ट्रीय मंच पर जल संरक्षण, सिंचाई में जल उपयोग दक्षता, बांध सुरक्षा और अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

सम्मेलन की मुख्य प्राथमिकताएँ

मंत्री पाटिल ने वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद करते हुए देश की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया — जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता में वृद्धि, बांध सुरक्षा, जल प्रशासन सुधार, आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि इस सम्मेलन में हुई चर्चा और उससे संबंधित सुझाव देश के जल क्षेत्र में सुधारों को नई गति प्रदान करेंगे और जल संसाधनों के अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।'

'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी

पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कैच द रेन' पहल को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने की समीक्षा भी की। उन्होंने नवसारी में चल रहे जल संग्रहण अभियान का विशेष उल्लेख किया, जहाँ वर्षा जल को संरक्षित कर रिचार्ज बोरवेल के माध्यम से भूजल स्तर में पहुँचाया जा रहा है। यह प्रयास जिला प्रशासन और स्थानीय जनता के सहयोग से संचालित है।

पाटिल के अनुसार, इन संरचनाओं से वर्षा जल की बर्बादी रुक रही है और भूजल स्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा, 'यह अभियान इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो पानी की हर बूंद भविष्य के लिए एक अनमोल धरोहर बन जाती है।'

सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य

यह सम्मेलन जल शक्ति मंत्रालय के उन सतत प्रयासों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य नीतिगत समन्वय में सुधार, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, परियोजनाओं का कुशल कार्यान्वयन, बांधों की सुरक्षा में वृद्धि और जल संरक्षण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि भारत में भूजल का अत्यधिक दोहन एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है और इस तरह के सम्मेलन नीति-निर्माण को ज़मीनी हकीकत से जोड़ने का प्रयास करते हैं।

आगे की राह

सम्मेलन में राज्यों से प्राप्त सुझावों को नीतिगत सुधारों में शामिल किए जाने की उम्मीद है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को केंद्र में रखकर आने वाले समय में और ठोस कदम उठाए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सिंचाई में जल उपयोग दक्षता दशकों से एक अधूरा एजेंडा बना हुआ है। नवसारी का रिचार्ज बोरवेल मॉडल उत्साहजनक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इसे राष्ट्रीय स्तर पर दोहराया जा सकता है। 'कैच द रेन' जैसी पहलें तब तक प्रतीकात्मक रहेंगी, जब तक राज्यों के बीच जल डेटा साझाकरण और स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित नहीं होता।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने किस सम्मेलन की अध्यक्षता की?
सीआर पाटिल ने नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के वरिष्ठ सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में जल सुरक्षा, संरक्षण और सिंचाई दक्षता पर चर्चा हुई।
'कैच द रेन' अभियान क्या है और इसका सम्मेलन से क्या संबंध है?
'कैच द रेन' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है जो वर्षा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर केंद्रित है। सम्मेलन में पाटिल ने इस अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने की समीक्षा की और नवसारी के रिचार्ज बोरवेल मॉडल को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
नवसारी में जल संग्रहण का अभिनव प्रयास क्या है?
नवसारी में जिला प्रशासन और जनता के सहयोग से वर्षा जल को रिचार्ज बोरवेल के माध्यम से भूजल में पहुँचाया जा रहा है। यह मॉडल वर्षा जल की बर्बादी रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने में कारगर बताया जा रहा है।
इस सम्मेलन से जल नीति पर क्या असर पड़ेगा?
सम्मेलन में राज्यों से प्राप्त सुझावों को जल शक्ति मंत्रालय के नीतिगत सुधारों में शामिल किए जाने की उम्मीद है। मंत्रालय का लक्ष्य नीतिगत समन्वय, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए सतत जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
सम्मेलन में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में जल संरक्षण, सिंचाई में जल उपयोग दक्षता, बांध सुरक्षा, जल प्रशासन सुधार, आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय — इन छह प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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