जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल सुरक्षा सम्मेलन में 'कैच द रेन' अभियान और सिंचाई दक्षता पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 14 जुलाई 2025 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन स्थित चाणक्य हॉल में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जल संसाधन विभागों के अखिल भारतीय वरिष्ठ सचिव सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस राष्ट्रीय मंच पर जल संरक्षण, सिंचाई में जल उपयोग दक्षता, बांध सुरक्षा और अंतर-राज्यीय समन्वय को मजबूत करने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
सम्मेलन की मुख्य प्राथमिकताएँ
मंत्री पाटिल ने वरिष्ठ अधिकारियों से संवाद करते हुए देश की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया — जल संरक्षण, सिंचाई दक्षता में वृद्धि, बांध सुरक्षा, जल प्रशासन सुधार, आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय। उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा विश्वास है कि इस सम्मेलन में हुई चर्चा और उससे संबंधित सुझाव देश के जल क्षेत्र में सुधारों को नई गति प्रदान करेंगे और जल संसाधनों के अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।'
'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी
पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'कैच द रेन' पहल को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाने की समीक्षा भी की। उन्होंने नवसारी में चल रहे जल संग्रहण अभियान का विशेष उल्लेख किया, जहाँ वर्षा जल को संरक्षित कर रिचार्ज बोरवेल के माध्यम से भूजल स्तर में पहुँचाया जा रहा है। यह प्रयास जिला प्रशासन और स्थानीय जनता के सहयोग से संचालित है।
पाटिल के अनुसार, इन संरचनाओं से वर्षा जल की बर्बादी रुक रही है और भूजल स्तर में निरंतर वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा, 'यह अभियान इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं, तो पानी की हर बूंद भविष्य के लिए एक अनमोल धरोहर बन जाती है।'
सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य
यह सम्मेलन जल शक्ति मंत्रालय के उन सतत प्रयासों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य नीतिगत समन्वय में सुधार, संस्थागत सुदृढ़ीकरण, परियोजनाओं का कुशल कार्यान्वयन, बांधों की सुरक्षा में वृद्धि और जल संरक्षण में समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि भारत में भूजल का अत्यधिक दोहन एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है और इस तरह के सम्मेलन नीति-निर्माण को ज़मीनी हकीकत से जोड़ने का प्रयास करते हैं।
आगे की राह
सम्मेलन में राज्यों से प्राप्त सुझावों को नीतिगत सुधारों में शामिल किए जाने की उम्मीद है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, वैज्ञानिक जल प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को केंद्र में रखकर आने वाले समय में और ठोस कदम उठाए जाएंगे।