जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने असम की सिंचाई परियोजनाओं और NERIWALAM की समीक्षा की

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जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने असम की सिंचाई परियोजनाओं और NERIWALAM की समीक्षा की

सारांश

जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने NERIWALAM की छठी शासी निकाय बैठक में असम की सिंचाई परियोजनाओं, ब्रह्मपुत्र कटाव से विस्थापित परिवारों की आजीविका और उत्तर पूर्व में जल प्रबंधन सुधार पर गहन समीक्षा की — साथ ही सिंचाई प्रयोगशाला स्थापना का प्रस्ताव भी सामने आया।

मुख्य बातें

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 19 मई 2026 को NERIWALAM के शासी निकाय की छठी बैठक की अध्यक्षता की।
असम में सतत सिंचाई विकास और ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव पर अध्ययनों की समीक्षा हुई।
क्षेत्र में सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
MTech और PhD छात्रों के लिए छात्रवृत्ति, संकाय विकास और GIS-आधारित जल अनुसंधान पर सिफारिशें की गईं।
शासी निकाय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को मंजूरी दी।
ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव-प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास और आजीविका हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श हुआ।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार, 19 मई 2026 को नई दिल्ली में उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (NERIWALAM) के शासी निकाय की छठी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में असम में सतत सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव और उत्तर पूर्वी भारत में जल प्रबंधन पद्धतियों पर चल रहे अध्ययनों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में क्या हुआ

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के अंतर्गत संचालित NERIWALAM की इस बैठक में पाटिल ने वैज्ञानिक जल प्रबंधन की अनिवार्यता पर बल दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने उत्तर पूर्वी क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए क्षमता निर्माण और राज्य सरकारों की अधिक भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही।

मंत्री ने जल एवं भूमि प्रबंधन में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में NERIWALAM की भूमिका को सुदृढ़ करने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बाह्य वित्तपोषित परियोजनाओं में संस्थान की विस्तारित भूमिका की भी समीक्षा की।

सिंचाई प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म का प्रस्ताव

बैठक के प्रमुख एजेंडा में क्षेत्र में सिंचाई प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान, क्षेत्र प्रदर्शन और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए एक सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल था। यह पहल उत्तर पूर्व के किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

शासी निकाय ने MTech और PhD छात्रों के लिए छात्रवृत्ति सहायता, संकाय विकास, अनुसंधान क्षमताओं को सुदृढ़ करने और जल संसाधन प्रबंधन में जलवायु एवं GIS-आधारित अनुप्रयोगों में अध्ययन को आगे बढ़ाने संबंधी सिफारिशों पर भी विचार-विमर्श किया।

ब्रह्मपुत्र कटाव पीड़ितों की आजीविका पर अध्ययन

बैठक में ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव से प्रभावित परिवारों की आजीविका संबंधी चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा की गई। गौरतलब है कि ब्रह्मपुत्र का कटाव असम के लाखों परिवारों के लिए दशकों से विस्थापन और जीविका संकट का कारण रहा है। शासी निकाय ने विस्थापित समुदायों के लिए स्थायी पुनर्वास और आजीविका हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया।

संस्थागत उपलब्धियाँ और वित्तीय अनुमोदन

शासी निकाय ने वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को मंजूरी दी। क्षमता निर्माण, अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों में NERIWALAM की निरंतर प्रगति की सराहना की गई और प्रमुख संस्थागत मामलों को भी अनुमोदित किया गया।

आगे की राह

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब उत्तर पूर्व भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ और कटाव की घटनाएँ बढ़ रही हैं। NERIWALAM से अपेक्षा है कि वह राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाते हुए अनुसंधान-आधारित नीति सिफारिशें तैयार करे, जिससे क्षेत्र में जल एवं भूमि प्रबंधन को दीर्घकालिक दिशा मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ ब्रह्मपुत्र का कटाव और अनियमित मानसून हर साल लाखों लोगों की आजीविका को खतरे में डालता है। सिंचाई प्रयोगशाला और GIS-आधारित अनुसंधान के प्रस्ताव दिशा में सही हैं, लेकिन असली परीक्षा यह है कि ये अध्ययन जमीनी नीति में कितनी तेजी से तब्दील होते हैं। राज्यों की 'अधिक भागीदारी' पर जोर देना स्वागतयोग्य है, किंतु केंद्र-राज्य समन्वय की ऐतिहासिक कमी को देखते हुए बिना बाध्यकारी क्रियान्वयन ढाँचे के यह भी महज संकल्प बनकर रह सकता है।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NERIWALAM क्या है और यह किसके अंतर्गत काम करता है?
NERIWALAM यानी उत्तर पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग के अंतर्गत कार्यरत एक विशेषज्ञ संस्थान है। यह उत्तर पूर्व भारत में जल एवं भूमि प्रबंधन में अनुसंधान, क्षमता निर्माण और नीति सहायता प्रदान करता है।
19 मई 2026 की NERIWALAM बैठक में कौन-से प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में असम में सतत सिंचाई विकास, ब्रह्मपुत्र नदी के जलमार्ग परिवर्तन के आर्थिक प्रभाव, कटाव-प्रभावित परिवारों की आजीविका, सिंचाई प्रयोगशाला स्थापना का प्रस्ताव और MTech-PhD छात्रों के लिए छात्रवृत्ति जैसे विषयों पर चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों को भी मंजूरी दी गई।
ब्रह्मपुत्र कटाव से प्रभावित परिवारों के लिए क्या निर्णय लिए गए?
बैठक में ब्रह्मपुत्र घाटी में कटाव से विस्थापित परिवारों की आजीविका चुनौतियों पर एक अध्ययन के निष्कर्षों की समीक्षा की गई। शासी निकाय ने इन समुदायों के लिए स्थायी पुनर्वास और आजीविका हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया, हालाँकि ठोस कार्ययोजना की घोषणा अभी बाकी है।
प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला का उद्देश्य क्या है?
प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र प्रयोगशाला और प्रदर्शन फार्म का उद्देश्य उत्तर पूर्वी क्षेत्र में सिंचाई प्रौद्योगिकियों का अनुसंधान, क्षेत्र प्रदर्शन और किसानों तक उनका प्रसार करना है। यह पहल क्षेत्र के कृषि समुदायों को आधुनिक सिंचाई विधियों से जोड़ने की दिशा में है।
जल शक्ति मंत्री पाटिल ने उत्तर पूर्व के लिए किन प्राथमिकताओं पर जोर दिया?
मंत्री सीआर पाटिल ने वैज्ञानिक जल प्रबंधन, क्षमता निर्माण और उत्तर पूर्वी राज्यों की अधिक भागीदारी को प्राथमिकता बताया। उन्होंने NERIWALAM को जल एवं भूमि प्रबंधन उत्कृष्टता केंद्र के रूप में और मजबूत करने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
राष्ट्र प्रेस
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