सीआर पाटिल और जितेंद्र सिंह करेंगे जल अनुसंधान राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन, माहा मिशन होगा लॉन्च
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल सोमवार, 2 जून 2025 को नई दिल्ली में जल क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे। इस एक दिवसीय कार्यशाला का संयुक्त उद्घाटन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह के साथ मिलकर किया जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साझा मंच पर लाकर भारत में जल नवाचार की अगली लहर को दिशा देना है।
कार्यशाला के प्रमुख तकनीकी सत्र
इस कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें भूजल प्रबंधन, सिंचाई पद्धतियाँ, नदी संरचना, बाढ़ क्षेत्र का मानचित्रण, जलवायु अनुकूलन, पारिस्थितिक आकलन, बांध और जल संरचना सुरक्षा, शहरी जलभंडार मानचित्रण तथा जल प्रशासन में रिमोट सेंसिंग और उन्नत प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग जैसे विषय शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जल संकट की चुनौतियाँ लगातार गहरी होती जा रही हैं और नीति-निर्माताओं पर वैज्ञानिक समाधान खोजने का दबाव बढ़ रहा है।
माहा मिशन: जल क्षेत्र की नई पहल
कार्यशाला का सबसे बड़ा आकर्षण माहा (मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज फॉर वॉटर) का शुभारंभ होगा। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की संयुक्त पहल है। इसके अंतर्गत जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और जल उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अत्याधुनिक अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल के तहत अनुसंधान प्रस्तावों के लिए एक खुला आमंत्रण भी जारी किया जाएगा।
स्टार्टअप और एमएसएमई के लिए अवसर
जल मंत्रालय कार्यशाला में भारत-विन पोर्टल के अंतर्गत स्टार्टअप और एमएसएमई (MSME) के लिए एक खुला आमंत्रण जारी करेगा, जिसका उद्देश्य जल क्षेत्र में उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास को समर्थन देना है। गौरतलब है कि यह पहल जल प्रौद्योगिकी में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
जन भागीदारी: 'कैच द रेन' डिजिटल प्लेटफॉर्म
कार्यशाला में जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन (JSJB: CTR) नामक एक सहभागी डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया जाएगा। यह मंच नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण पहलों का दस्तावेज़ीकरण एवं प्रदर्शन करने में सक्षम बनाएगा। इस प्लेटफॉर्म के ज़रिये समुदाय-आधारित जल संरक्षण प्रयासों को डिजिटल रूप से मज़बूती देने की उम्मीद है।
व्यापक प्रभाव और आगे की राह
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस आयोजन से वैज्ञानिक संस्थानों, नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, स्टार्टअप्स, तकनीकी संगठनों और सामुदायिक हितधारकों के बीच मज़बूत समन्वय को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह कार्यशाला भारत के जल अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और सतत जल प्रबंधन के लिए नवाचार-आधारित समाधानों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।