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क्या केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल संरक्षण अभियान की सराहना की और नमामि गंगे की प्रगति पर जानकारी दी?

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क्या केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने जल संरक्षण अभियान की सराहना की और नमामि गंगे की प्रगति पर जानकारी दी?

सारांश

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राजकोट में जल संरक्षण और नमामि गंगे अभियान की प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने जल संचय के महत्व को रेखांकित किया और बताया कि सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। जानें इस महत्वपूर्ण अभियान की नई उपलब्धियों के बारे में।

मुख्य बातें

जल संरक्षण का महत्व नमामि गंगे की उपलब्धियां जल जीवन मिशन के तहत 35 लाख जल संरचनाएं गुजरात मॉडल की सफलता प्रधानमंत्री का आह्वान जल संचय के लिए

राजकोट, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने राजकोट में एक कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने जल संरक्षण और नमामि गंगे अभियान पर विस्तार से चर्चा की।

मंत्री पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है कि जल संचय और जल आंदोलन को जन-भागीदारी का स्वरूप दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपनी कर्मभूमि से मातृभूमि के लिए जल संरक्षण में योगदान देना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस अभियान को देशभर में जबरदस्त समर्थन मिला है और लोगों ने भरपूर सहयोग किया है।

उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन और जल संरक्षण अभियान के तहत अब तक देश में लगभग 35 लाख जल संरक्षण संरचनाएं निर्मित की जा चुकी हैं। गुजरात का मॉडल कई राज्यों ने अपनाया है, जबकि कुछ राज्य गुजरात से आगे भी निकल गए हैं। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि हर जगह जरूरत के अनुसार पानी उपलब्ध हो और इस दिशा में केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने जल संचय को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है। गुजरात मॉडल को अपनाने वाले राज्य आगे बढ़ रहे हैं और हमारा लक्ष्य है कि जहां जितना पानी चाहिए, वहां उतना पानी पहुंचे।"

सीआर पाटिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नमामि गंगे अभियान की प्रगति साझा की। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि नमामि गंगे केवल एक योजना नहीं, बल्कि मां गंगा के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प है। वर्ष 2025 में अब तक 39 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिससे कुल पूर्ण परियोजनाओं की संख्या 344 हो गई है। इसके अलावा 2,368 करोड़ रुपए की लागत से 34 नए प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं, जिससे कुल परियोजनाओं की संख्या 513 तक पहुंच गई है।

मंत्री ने लिखा, "हर निर्णय और हर परियोजना के केंद्र में एक ही भावना है—गंगा हमारी है और उसकी स्वच्छता हमारी प्राथमिकता।"

बता दें कि नमामि गंगे अभियान गंगा नदी की सफाई और पुनर्जीवन के लिए शुरू किया गया महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का प्रतीक बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक जन आंदोलन है। हमें मिलकर जल संरक्षण की दिशा में काम करना होगा, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नमामि गंगे अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
नमामि गंगे अभियान का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी की सफाई और पुनर्जीवन है, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का प्रतीक है।
जल जीवन मिशन के तहत कितनी जल संरचनाएं बनाई गई हैं?
जल जीवन मिशन के तहत अब तक लगभग 35 लाख जल संरक्षण संरचनाएं निर्मित की जा चुकी हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का जल संचय के लिए क्या संदेश है?
प्रधानमंत्री मोदी ने जल संचय को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है ताकि हर नागरिक अपने हिस्से का योगदान दे सके।
गुजरात मॉडल को अन्य राज्यों ने क्यों अपनाया है?
गुजरात मॉडल को अन्य राज्यों ने इसकी सफलता और प्रभावशीलता के कारण अपनाया है, जिससे जल संरक्षण में बेहतर परिणाम मिले हैं।
नमामि गंगे अभियान में कितनी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं?
वर्तमान में नमामि गंगे अभियान में 344 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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