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दिल्ली स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी: ₹400 करोड़ से अधिक निवेश, 5 साल में बनेगा इनोवेशन हब

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दिल्ली स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी: ₹400 करोड़ से अधिक निवेश, 5 साल में बनेगा इनोवेशन हब

सारांश

दिल्ली सरकार ने स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दी है — ₹400 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ। 11 विश्वविद्यालयों और 13 कॉलेजों में इन्क्यूबेशन सेंटर बनेंगे। लक्ष्य है दिल्ली के युवाओं को नौकरी खोजने वाले से नौकरी देने वाला बनाना।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने 16 जुलाई 2026 को दिल्ली स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति को मंजूरी दी।
अगले 5 वर्षों में ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा।
पहले चरण में 11 राज्य विश्वविद्यालयों और 13 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों सहित पॉलिटेक्निक, आईटीआई और स्कूलों में इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित होंगे।
स्टार्ट-अप्स को प्रोटोटाइप से व्यावसायीकरण तक हर चरण में लक्ष्य-आधारित वित्तीय सहायता मिलेगी।
प्रतिवर्ष 'दिल्ली स्टार्ट-अप यूथ फेस्टिवल' आयोजित होगा।
नीति की निगरानी के लिए स्टेट इन्क्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार ने 16 जुलाई 2026 को दिल्ली स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति को औपचारिक मंजूरी दे दी, जिसके तहत अगले पाँच वर्षों में ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा। इस नीति का मूल उद्देश्य दिल्ली को देश के अग्रणी नवाचार और उद्यमिता केंद्रों में स्थापित करना तथा युवाओं को 'जॉब सीकर' की बजाय 'जॉब क्रिएटर' बनाना है।

नीति में क्या है खास

नई नीति के पहले चरण में 11 राज्य विश्वविद्यालयों, 13 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। पात्र संस्थानों को केंद्र स्थापित करने के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता के साथ-साथ मेंटरिंग, नेटवर्किंग और नवाचार गतिविधियों के लिए वार्षिक संचालन सहायता भी प्रदान की जाएगी।

स्टार्ट-अप्स को उनके विकास के विभिन्न चरणों — प्रोटोटाइप निर्माण, कॉन्सेप्ट परीक्षण, उत्पाद विकास, बाजार परीक्षण और व्यावसायीकरण — में लक्ष्य-आधारित वित्तीय सहायता दी जाएगी। इन केंद्रों में युवा उद्यमियों को आधुनिक बुनियादी ढाँचा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बौद्धिक संपदा (IP) सहायता, प्रयोगशाला सुविधाएँ और निवेशकों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह नीति केवल स्टार्ट-अप शुरू करने में सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, पूर्व छात्रों और युवा उद्यमियों को संसाधनों, मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की कमी के बिना अपने विचारों को सफल कारोबार में बदलने का अवसर देगी। उन्होंने इसे 'आत्मनिर्भर और नवाचार-आधारित दिल्ली' के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

दिल्ली स्टार्ट-अप यूथ फेस्टिवल और निगरानी तंत्र

नीति के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष 'दिल्ली स्टार्ट-अप यूथ फेस्टिवल' का आयोजन किया जाएगा, जो युवा नवप्रवर्तकों, शैक्षणिक संस्थानों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा। यह उत्सव नई साझेदारियों और विचारों के प्रदर्शन का केंद्र बनेगा।

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए स्टेट इन्क्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसमें सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति पारदर्शी प्रशासन और प्रदर्शन-आधारित वित्तीय सहायता सुनिश्चित करेगी।

आगे की राह

यह नीति ऐसे समय में आई है जब बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर भारत के स्टार्ट-अप मानचित्र पर दिल्ली से आगे माने जाते हैं। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की स्टार्टअप इंडिया पहल के बाद राज्य स्तर पर ऐसी विशिष्ट नीतियाँ अपेक्षाकृत कम देखी गई हैं। यदि क्रियान्वयन तय समय-सीमा में हुआ, तो दिल्ली का यह कदम राजधानी के उद्यमिता परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — दिल्ली सरकार की पिछली योजनाओं में संस्थागत देरी और नौकरशाही अवरोध बड़ी चुनौती रहे हैं। स्टेट मॉनिटरिंग कमेटी का प्रावधान सकारात्मक संकेत है, लेकिन बिना स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र और सार्वजनिक रिपोर्टिंग के, यह महज एक प्रशासनिक औपचारिकता बन सकती है। बेंगलुरु और हैदराबाद से प्रतिस्पर्धा में दिल्ली को केवल बुनियादी ढाँचे से नहीं, बल्कि निवेशक-अनुकूल नियामक वातावरण और तेज़ स्वीकृति प्रक्रिया से भी आगे आना होगा — जिसका इस नीति में अभी स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली स्टार्ट-अप और इन्क्यूबेशन नीति क्या है?
यह दिल्ली सरकार की एक नई नीति है जिसे 16 जुलाई 2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत अगले पाँच वर्षों में ₹400 करोड़ से अधिक का निवेश कर राजधानी में नवाचार, शोध और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा।
इन्क्यूबेशन सेंटर कहाँ-कहाँ स्थापित होंगे?
पहले चरण में 11 राज्य विश्वविद्यालयों, 13 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, आईटीआई और सरकारी स्कूलों में अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
स्टार्ट-अप्स को इस नीति से क्या-क्या सुविधाएँ मिलेंगी?
स्टार्ट-अप्स को प्रोटोटाइप निर्माण से लेकर व्यावसायीकरण तक हर चरण में लक्ष्य-आधारित वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा आधुनिक बुनियादी ढाँचा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बौद्धिक संपदा सहायता, प्रयोगशाला सुविधाएँ और निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
दिल्ली स्टार्ट-अप यूथ फेस्टिवल क्या होगा?
यह एक वार्षिक आयोजन होगा जो युवा नवप्रवर्तकों, शैक्षणिक संस्थानों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं को एक साझा मंच पर लाएगा। इसका उद्देश्य नए विचारों का प्रदर्शन, साझेदारी के अवसर और युवा उद्यमियों को प्रेरित करना है।
इस नीति की निगरानी कैसे होगी?
नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्टेट इन्क्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति पारदर्शी प्रशासन और प्रदर्शन-आधारित वित्तीय सहायता सुनिश्चित करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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